मथुरा में दूसरी बार नहीं बन सका कोई बाहरी ‘सांसद’

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दिलीप यादव
मथुरा। मथुरा लोकसभा सीट का इतिहास रहा है कि यहां से कोई बाहरी व्यक्ति एक बार सांसद बनने के बाद दोबारा सांसद नहीं सका है। अभी तक के हालात पर नजर डालें तो गठबंधन प्रत्याशी और भाजपा प्रत्याशी के मध्य मुकाबले में भी यही तस्वीर उभर कर सामने आ रही है। सांसद के बाहरी होने के कारण विकास मुद्दा नहीं रहा है। भाजपा मोदी के नाम पर तो गठबंधन प्रत्याशी विकास से ज्यादा जाति बिरादरी की खाप पंचायतों के भरोसे हैं। भाजपा प्रत्याशी को मजबूती प्रदान करने को संघ और संगठन ने कई पदाधिकारियों के कार्यक्षेत्र बदले हैं। गोवर्धन विधानसभा से जिला महामंत्री ज्ञानेन्द्र सिंह राणा को छाता में लगाया गया है, वहीं पूर्व विधायक अजय कुमार पोइया की मांग गोवर्धन क्षेत्र से होने लगी है। गोवर्धन और बलदेव विधानसभा क्षेत्र में भाजपा को हालात संयत करने को खासी मशक्कत करनी पड़ रही है।


गठबंधन प्रत्याशी कुंवर नरेन्द्र सिंह का चुनाव प्रचार भले ही बहुत ज्यादा हाई प्रोफाइल नहीं दिख रहा लेकिन उनके साथ जुट रहे यादव, जाटव, मुस्लिम, ठाकुर मतदाताओं की संख्या उनके राह की मुश्किल आसान किए हुए हैं। भाजपा प्रत्याशी हेमा मालिनी की ओर से जाटों का रुझान कम करने के लिए रालोद मुखिया और जयंत चौधरी के अंतिम दिनों में लगाए जा रहे कार्यक्रम भाजपा की मुश्किल बन रहे हैं।


बलदेव और गोवर्धन विधानसभा में पार्टी की स्थिति कमजोर नजर आ रही है। बलदेव में पूर्व विधायक अजय कुमार पोइया का टिकट काटकर पूरन प्रकाश को दिया गया। इसकी नाराजगी और गठबंधन के समीकरण में जाटों को रोकना चुनौती बना हुआ है। यही हाल गोवर्धन विधानसभा का है। पूर्व में सुरक्षित रही इस जाट बाहुल्य विधानसभा को पूर्व विधायक अजय कुमार पोइया ने अपने व्यवहार से पार्टी के पाले में कर दिया। अपने दो कार्यकालों में उन्होंने ब्रज के विकास, मंदिरों के अधिग्रहण कर तीर्थाटन एवं पर्यटन की संभावनाओं को लेकर विधानसभा में याचिका और अनेक सवाल उठाए लेकिन तत्कालीन भाजपा सरकार में यह परवान नहीं चढ़ सके। दो दशक बाद इन प्रस्तावों पर अमल होना शुरू हुआ है। पार्टी के लोगों को अब लग रहा है कि गोवर्धन में अजय कुमार पोइया का सहयोग लेेकर हालात संयत किए जाएं। कुल मिलाकर बेदाग छवि की सांसद हेमा मालिनी विकास के मुद्दों के दम पर जाति बिरादरी के तिलस्म को तोड़ती नजर नहीं आ रहीं। अभी चुनाव दूर है और कुछ भी अंतिम नहीं हो सकता लेकिन भाजपा की राह में दिक्कतें बहुत हैं।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।)