मोदी लहर में गुम हो गए कमल-भाजपा के नारे

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नई दिल्ली। भारतीय राजनीति में चुनावी नारों की बहुत अहम भूमिका रही है। कोई भी चुनाव रहा हो, कोई भी पार्टी रही हो। सभी राजनीतिक दल नए नए नारों से चुनावी समां बांधने का प्रयास करते हैं। नारों के सहारे राजनेता अपनी खूबियां तो गिनाते ही हैं वरन् अपने विरोधियों की कमियों को भी तरीके से कम शब्दों में ही उजागर कर देते हैं। हालांकि यह नारे व्यक्तिगत कम और पार्टी पर अधिक आधारित होते हैं लेकिन इस बार के चुनावों में भाजपा की ओर से पीएम मोदी को लेकर व्यक्तिगत नारे गढ़े गए हैं जो कि चर्चा में बने हुए हैं।
लोकसभा चुनाव 2019 का बिगुल बज चुका है। चुनावों के इतिहास पर नजर डालें तो चुनावी नारे शुरुआती दौर से ही पार्टियों द्वारा मतदाताओं को लुभाने के लिए बनाए गए। इन नारों ने बखूबी अपना काम भी किया। नारे हिट हुए तो पार्टी को सत्ता भी मिली। गत लोकसभा चुनाव 2014 में भाजपा द्वारा ‘अबकी बार, मोदी सरकार’, ‘सबको देखा बार-बार, मोदी को देखो एक बार’, ‘कमल का फूल, न जाना भूल’, ‘गली गली में मचा है शोर, जनता चली भाजपा की ओर’ ऐसे ही चुनावी नारे भी रहे थे। जिन्होंने भाजपा की नरेंद्र मोदी सरकार बनने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इस बार जब कांग्रेस ने राफेल घोटाले का आरोप लगाते हुए पीएम मोदी को लेकर ‘चैकीदार चोर है’ का नारा दिया तो भाजपा ने ‘मैं भी चैकीदार’ कैंपेन शुरु कर विरोधियों के होश उड़ा दिए हैं। मोदी के साथ उनके सभी केंद्रीय मंत्रियों और भाजपा कार्यकर्ताओं ने अपने नाम के आगे चैकीदार लिख लिया है। यह स्लोगन इस चुनाव में काफी फेमस हो रहा है लेकिन इस बार चुनाव से भाजपा और उसके चुनाव चिन्ह को लेकर कोई नारा सुनने में नहीं आ रहा है। जबकि इससे पहले हर चुनाव में भाजपा और कमल के फूल को लेकर खूब नारे लगते थे। भाजपा हाईकमान ने इस बार कहा भी है कि लोकसभा की सभी सीटों पर प्रत्याशियों को देखकर वोट न दें वरन् यह सोचें कि सभी सीटों मोदी ही चुनाव लड़ रहे हैं। इसे ध्यान में रखते हुए ही इस बार नारे और स्लोगन सिर्फ और सिर्फ मोदी तक ही सिमट कर रह गए हैं। ‘फिर एक बार, मोदी सरकार’, ‘कहो दिल से, मोदी फिर से’, ‘सब देखते रह जाएंगे, मोदी फिर से आएंगे’ आदि ऐसे ही नारे हैं। जबकि इस बार पुराने नारे ‘कमल का फूल, न जाना भूल’, ‘चलती है साइकिल उड़ती है धूल, फिर से खिलेगा कमल का फूल,’ आदि नारे खत्म ही हो चुके हैं। अब तो झंडों में भी कमल के फूल की जगह मोदी का चेहरा ही दिखता है। जनसभाओं में भी अब कमल और भाजपा के नारे नहीं लगते हैं वरन् मोदी-मोदी के ही नारे लगते दिखाई देते हैं।