विकास को तरसा हेमामालिनी का आदर्श ग्राम मानागढ़ी

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मथुरा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना ‘आदर्श सांसद ग्राम’ योजना मथुरा जनपद में दम तोड़ती नजर आ रही है। भाजपा की सांसद हेमामालिनी द्वारा गोद लिए गए नौहझील के गांव मानागढ़ी के हालात आदर्श ग्राम से बिलकुल जुदां हैं। यहां के बांशिदों को मूलभूत सुविधाएं ही उपलब्ध नहीं हैं। न तो पीने के लिए मीठा पानी है तो न ही बेहतर सड़क मार्ग। स्वास्थ्य सुविधाएं भी ग्रामीणों को नहीं मिल पा रही हैं।

ग्राम मानागढ़ी में सड़क पर भरा हुआ नालियों का गंदा पानी

जिला मुख्यालय से करीब 80 किलोमीटर दूर अलीगढ़ सीमा से सटे कस्बा नौहझील के गांव मानागढ़ी को सासंद हेमामालिनी ने 25 दिसम्बर 2017 को आदर्श गांव बनाने के लिए गोद लिया। लगा कि बदहाल गांव के हालात शायद अब बदल जाएंगे लेकिन एक वर्ष से अधिक बीतने के बाद भी गांव के हालातों में कोई अधिक बदलाव नहीं है। गांव की सड़कों पर नालियों का गंदा पानी उफान मार रहा है। इससे ग्रामीणों को पैदल निकलने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। गांव की प्रमुख सड़क का भी यही हाल था। जब स्थानीय ग्रामीणों ने इसे लेकर हंगामा किया तो स्थानीय भाजपा
कार्यकर्ता के मुताबिक करीब डेढ़ करोड़ की लागत से सीसी रोड का निर्माण कराया गया। चिकित्सालय न केवल खंडहर में तब्दील हो गए हैं वरन् कूड़ा घर बन गए हैं। गंभीर बीमारी तो छोड़िए साधारण बीमारी के लिए भी ग्रामीण गांव से बाहर जाने के लिए मजबूर हैं। गर्भवती महिलाओं को भी गांव में प्रसव की सुविधा नहीं मिल पा रही हैं। सामाजिक कार्यकर्ता सुभाष नौहवार कहते हैं कि पूरा गांव अवैध कब्जों की चपेट में हैं। सरकारी जमीनों को कब्जा मुक्त कराने के लिए किसी भी प्रकार की कोई पहल नहीं की गई है। यहां ना मृत पशुओं को दफनाने के लिये जगह है ना मृत इंसान के लिये शमशान स्थल हैं। सड़क किनारे ही शवों का अंतिम दाह संस्कार किया जाता है। पूरा गांव गंदगी के कारण बीमारियों की चपेट में है। भाजपा से जुड़े देवेंद्र चैधरी उर्फ छोटू का दावा है कि सांसद द्वारा गांव में विकास कार्यों की शुरूआत कर दी है। 150 मीटर नाली का निर्माण करा दिया गया है। गांव में पर्याप्त रोशनी के लिए 12 सोलर लाइट लगाई गई हैं। करीब 1,50,00,000 रुपए की लागत से सीसी सड़क का निर्माण कराया गया है। पेयजल की परेशानी दूर करने के लिए चुनाव आचार संहिता से कुछ दिन पूर्व ही मीठे पानी की टंकी का शिलान्यास किया है। इसकी लागत करीब ढाई करोड़ रुपए है।

चिकित्सालय में लगा ताला और यहां आराम फरमाते हुए स्थानीय ग्रामीण।

क्या है सांसद आदर्श ग्राम योजना?
गांवों के विकास के लिए सांसद आदर्श ग्राम योजना शुरू हुई थी। प्रधानमंत्री नरें‍द्र मोदी ने 11 अक्टूबर 2014 को यह योजना शुरू की थी। इस योजना के तहत देश के सभी सांसदों को एक साल के लिए एक गांव को गोद लेकर वहां विकास कार्य करना होता है। इससे गांव में बुनियादी सुविधाओं के साथ ही खेती, पशुपालन, कुटीर उद्योग, रोजगार आदि पर जोर दिया जाता है।

ऐसे होती है फंड की व्यवस्था
आदर्श सांसद ग्राम योजना के तहत विकास कार्य पूरा करने के लिए कई तरह से फंड मिलते हैं। इनमें इंदिरा आवास, पीएमजीएसवाई, मनरेगा शामिल है। इसके अलावा सांसदों को मिलने वाला विकास फंड भी कार्यक्रम पूरा करने में मददगार है। ग्राम पंचायत भी अपने फंड का इस्तेमाल इस योजना के लिए करती है। कंपनियां भी काॅरपोरेट सोशल रिस्पान्सिबिलिटी ‘सीएसआर’ के जरिए इस योजना के लिए मदद देती हैं।

सांसद आदर्श ग्राम योजना में इन विकास कार्यों पर जोर
-स्कूल और शिक्षा के प्रति जागरूकता
-पंचायत भवन, चैपाल और धार्मिक स्थल
-गर्भवती महिलाओं के लिए पोषक आहार की व्यवस्था
-गोबर गैस के लिए सार्वजनिक प्लांट
-भोज-दावत की मिठाई या खाने को मिड डे मील में बांटना
-किसानों को ड्रिप इरिगेशन की सुविधा