सचल दलों का व्यापारी पर कहर, नेताओं पर मेहर

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मथुरा। लोकसभा चुनाव आते ही पुलिस टीम के साथ अन्य टीमें चेकिंग करती हैं। ताकि चुनावी मौसम में शराब और रुपया बंटने से रोका जा सके। लेकिन इसकी आड़ में चेकिंग टीमें अधिकतर आम आदमी को परेशान कर अपना उल्लू सीधा करती है। व्यापारियों के साथ चेकिंग टीमों द्वारा अभद्र व्यवहार किया जा रहा है। व्यापारियों का चेकिंग के दौरान उत्पीड़न किया जा रहा है। यदि इसका विरोध किया जाए तो यह साम दाम दंड भेद के माध्यम से विरोध को भी आसानी से दबा देते हैं। ऐसा ही एक मामला सामने आया जब सचल दल एक टेंपो चालक से चेकिंग के दौरान मामला रफा दफा करने के लिए सुविधा शुल्क की मांग कर रही थी। एक पत्रकार ने इसकी वीडियो और फोटो बना ली। तो चेकिंग टीम ने पत्रकार पर अनर्गल आरोप लगाते हुए थाने में बंद करा दिया। उनके ऊपर मुकदमा दर्ज कराया।
यमुना एक्सप्रेस वे के बाजना इंटरचेंज पर गत दिवस सेल्स टैक्स टीम चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान एक लोडिंग टेंपों को चेकिंग के लिए रुकवाया। इसमें फ्रिज, कूलर आदि रखे हुए थे। टीम ने टेंपों चालक से कागजात दिखाने की कहा। टेंपो चालक ने कागजात दिखाने के साथ ही लेनदेन कर मामला रफा दफा करने का आफर दिया। इसी दौरान वहां से गुजर रहे एक दैनिक समाचार पत्र के बाजना के स्थानीय संवाददाता ने यह वाकया देखा तो सेटिंग गेटिंग कर रही टीम की फोटो और वीडियो बनानी शुरु कर दी। यह देखते ही टीम प्रभारी विकास विक्रम सिंह ने संवाददाता को पकड़ लिया और उससे पहचान पत्र मांगा। पत्रकार आईडी कार्ड नहीं दिखा सका तो टीम ने उसके साथ मारपीट कर दी और भ्रामक सूचना जिला प्रशासन को देते हुए युवक को पकड़कर थाने ले आए। यहां भी पत्रकार के साथ जमकर अभद्रता की गई। टीम प्रभारी विकास विक्रम सिंह ने स्वयं को एक केंद्रीय मंत्री का करीबी रिश्तेदार बताते हुए जिला प्रशासन और पुलिस पर पत्रकार के खिलाफ कार्यवाही किए जाने का दबाव बनाया। पीड़ित पत्रकार के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर लिया गया। मामले में जनपद की मीडिया जिला प्रशासन के सामने नतमस्तक दिखाई दी। हालांकि जब मीडिया ने दबाव बनाया तो अगले दिन उसे जमानत पर रिहा किया गया। हालांकि देर शाम वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के साथ पत्रकारों की एक बैठक में मामले का सही निस्तारण करने का आश्वासन दिया गया।

इसी तरह दूसरा मामला कस्बा मांट का है। यहां एक सचल दल ने जूता व्यापारी के वाहन को रुकवा लिया। कागजात पूरा न होने पर मोटी रकम की मांग की गई। जो घटते घटते 2500 रुपए तक आ गई। सुविधा शुल्क के लेन देन के बाद मामला रफा दफा कर गाड़ी को छोड़ा गया। इसके अलावा जनपद में अन्य मामले भी सामने आ रहे हैं लेकिन चुनाव आचार संहिता की आड़ में अधिकारी बैखौफ और व्यापारी खौफजदा नजर आ रहे हैं।