लोकसभा चुनावः आगरा-फतेहपुर सीकरी में भी जूझ रही भाजपा

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आगरा/मथुरा। लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को जीतने के लिए प्रत्याशियों के साथ साथ अपनी ही पार्टी की भितरघात से भी जूझना पड़ रहा है। इससे आगरा मंडल की आगरा और फतेहपुर सीकरी की लोकसभा सीट के साथ मथुरा में भी जीत के लिए भाजपा को नाकों चने चबाने जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है।
आगरा मंडल की आगरा सीट (सुरक्षित) से भाजपा ने इस बार सिटिंग सांसद रमाशंकर कठेरिया की टिकट काटकर एसपी सिंह बघेल को प्रत्याशी घोषित किया। यहां से बसपा गठबंधन ने मनोज सोनी और कांग्रेस ने प्रीता हरित को प्रत्याशी बनाया है। गठबंधन प्रत्याशी से भाजपा को जहां कड़ी चुनौती मिल रही है वहीं दलित चेहरे के रुप में फेमस रहे रमाशंकर कठेरिया के समर्थकों की नाराजगी भी झेलनी पड़ रही है। रमाशंकर कठेरिया आरएसएस से जुड़ रहे हैं और उन्हें पार्टी के बडे़ नेताओं में शुमार किया जाता है। उन्होंने कहा भी था कि पार्टी के इस निर्णय से दलित समुदाय को काफी ठेस पहुंची है। रमाशंकर वर्तमान में एससी/एसटी आयोग के अध्यक्ष भी हैं। हालांकि भाजपा ने इससे निपटने के लिए रमाशंकर कठेरिया को इटावा सीट से उतारकर उनके समर्थकों की नाराजगी को दूर करने का प्रयास किया है। फतेहपुर सीकरी से भाजपा ने राजकुमार चाहर पर दांव खेला है और सिटिंग सांसद बाबूलाल जाट का टिकट काट दिया है। राजकुमार चाहर फतेहपुर सीकरी से पहले तीन बार चुनाव लड़ चुके हैं और तीनों बार ही उन्हें हार का सामना करना पड़ा है। वर्ष 2002 में चाहर ने बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा। वर्ष 2007 में भाजपा के टिकट पर विधायक बनने का सपना देखा लेकिन दोनों बार ही उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा। वर्ष 2012 में जब भाजपा ने उन्हें टिकट नहीं दिया तो उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा और फिर से हार गए। अब सिटिंग सांसद बाबूलाल को हटाकर भाजपा ने चाहर पर दांव खेला है। वहीं मथुरा में पार्टी भितरघात से जूझ रही है। हालांकि प्रत्याशी हेमामालिनी को जिताने और गुटबाजी खत्म करने के लिए भाजपा के साथ आरएसएस ने भी प्रयास करने शुरु कर दिए हैं।