भाजपा चुनावः दिग्गजों की उड़ाई महिलाओं ने नींद, पत्नी ने की मुख्यमंत्री से शिकायत

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मथुरा। भाजपा में एकतरफ जहां जिला एवं महानगर अध्यक्ष पद को लेकर घमासान मचा हुआ है जिसमें वर्तमान जिलाध्यक्ष को पुनः जिलाध्यक्ष बनने से रोकने के लिये विरोधी गुट सक्रिय नजर आ रहा है जहां उनकी पहली पत्नी विरोधी गुट के साथ तालमेल करती हुई नजर आ रही हैं। जिनके द्वारा मुख्यमंत्री सहित पार्टी हाई कमान को लिखे पत्रों ने पार्टी में अफरा-तफरी का माहौल उत्पन्न कर दिया है।
भाजपा द्वारा गत दिवस घ्मण्डल अध्यक्षों की घोषणा में एक ही गुट का कब्जा होने के बाद 21 नवम्बर को पार्टी कार्यालय पर हुए नामांकन में जिलाध्यक्ष पद के लिये वर्तमान जिलाध्यक्ष नागेन्द्र सिंह सिकरवार सहित 11 तथा महानगर अध्यक्ष पद के लिये 28 नामांकन दाखिल किये गये थे। बताते हैं वर्तमान महानगर अध्यक्ष चेतन स्वरूप पाराशर के नामांकन न करने के कारण वह मैदान में नहीं हैं लेकिन जिलाध्यक्ष नागेन्द्र सिंह सिकरवार ने पुनः जिलाध्यक्ष पद पर नामांकन कर विरोधियों की नींद उड़ा दी है। बताते हैं कि जिलाध्यक्ष पद की दौड़ में मुकेश कुमार वार्ष्णेय, निर्भय पाण्डेय, मधु शर्मा, अनिल चौधरी, बलवीर सिंह, चौधरी भगत सिंह, पवन हिण्डौल, भानुप्रताप सिंह का नाम शामिल हैं जिसमें सभी अपनी-अपनी गोटी फिट करने में लगे हैं। लेकिन वर्तमान जिलाध्यक्ष नगेन्द्र सिंह सिकरवार इस दौड़ में सबसे आगे होते हुए भी प्रतिद्वंदियों द्वारा बिछाई गई बिसात के सामने कमजोर पड़ते दिखाई दे रहे हैं।
सूत्र बताते हैं कि पिछले दिनों एक नवागत महिला को पार्टी में शामिल कर उसे क्षेत्रीय कमैटी में महत्वपूर्ण पद देने एवं महिला की फोटो पार्टी नेताओं के साथ वायरल होने तथा होटलों में घुमाए जाने का मामला तूल पकड़ने पर महिला नेत्री को पार्टी नेताओं ने बाहर का रास्ता तो दिखा दिया लेकिन महिला नेत्री के गंभीर बीमारी के चपेट में आने के बाद ये मामला पुनः संघ से लेकर भाजपा हाईकमान तक पहुंच गया। इस मामले को पुनः प्रतिद्वंदी गुट उछाल कर जिलाध्यक्ष को लपेटने में लगा था। जिसकी काट करने में नगेन्द्र सिकरवार अपने गुट के साथ लगे हुए थे कि सिकरवार की पहली पत्नी इन्दिरा सिकरवार ने नगेन्द्र सिकरवार के खिलाफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं पार्टी हाईकमान से महिला उत्पीड़न की शिकायत कर सिकरवार पर सत्ता का दुरपयोग करने का आरोप लगाते हुए न्याय की गुहार का वीडियो वायरल कर दिया।

भाजपा जिलाध्यक्ष नगेन्द्र सिकरवार की पहली पत्नी सरिता सिकरवार ।

इस सम्बंध में भाजपा जिलाध्यक्ष सिकरवार से ‘‘विषबाण’’ द्वारा मोबाइल पर सम्पर्क किया गया तो फोन कॉल रिसीव नहीं की गई। इसके बाद व्हाट्सऐप पर सन्देश भेजा गया जिसे पढ़ तो लिया गया लेकिन भाजपा जिलाध्यक्ष ने कोई जवाब नहीं दिया। लेकिन उनके नजदीकी एवं नौहझील मण्डल अध्यक्ष द्वारा फोन पर जिलाध्यक्ष का कार्यक्रम में व्यस्त होना, प्रतिद्वंदी गुट द्वारा चुनाव में साजिश रचना एवं पहली पत्नी से 12 वर्ष पूर्व तलाक होना बताया गया।
इस सम्बंध में सिकरवार की पहली पत्नी सरिता सिकरवार से ‘‘विषबाण’’ द्वारा सम्पर्क स्थापित किया तो उन्होंने बताया कि उनका नगेन्द्र सिकरवार से अभी कोई तलाक नहीं हुआ है। उनकी शादी जुलाई 1991 में हुई थी। 2011 में हिमाचल की सरिता ठाकुर उर्फ सारू नाम की महिला से नजदीकी होने के कारण वह अलग-थलग हो गईें थी। सरिता ने फोन पर बिलखते हुए कहा कि पति के कारण पिछले वर्ष 2018 में उनकी एक बेटी की मौत हो चुकी है जबकि दूसरी बेटी भी विक्षिप्त अवस्था में पहुंच गई है जबकि बेटा नौकरी कर रहा है। सरिता ने बताया कि उनका एक मुकदमा न्यायालय में धारा 125 का चल रहा है लेकिन सत्ता की ताकत के कारण सिकरवार न्यायालय में उपस्थित नहीं हो रहे हैं जिससे वह मामला लम्बित पड़ा हुआ है। सरिता ने बताया कि वर्तमान में वह अपने मायके रमूपुरा पटियाली (एटा) में अपने मायके में रहकर न्याय के लिये लड़ रही हैं। उन्होंने कहा योगी सरकार दो शादी करने वालों को दण्डित करने का ऐलान कर रही है लेकिन वहीं उन्हें न्याय देने की जगह आरोपी को जिलाध्यक्ष बनाकर उन्हें ताकत दी जा रही है।
वर्तमान जिलाध्यक्ष की पहली पत्नी की शिकायत योगी सरकार एवं पार्टी हाईकमान पर कितना असर छोड़ेगी ये भविष्य में पता चलेगा लेकिन विरोधी इन्दिरा सिकरवार के वीडियो एवं शिकायती पत्र को मुद्दा बनाकर जिलाध्यक्ष की नींद उड़ाये हुए हैं। सूत्रों का कहना है कि भाजपा-संघ जहां जिलाध्यक्ष पद पर आधा दर्जन नामों पर मंथन कर रहा है वहीं दूसरी तरफ नामांकन से हटकर भी किसी नये नाम की घोषणा 3 दिसम्बर तक हो सकती है। जबकि दूसरी तरफ महानगर अध्यक्ष पद के लिये 28 नामांकन होने के बाद घमासान मचा हुआ है। भाजपा से जुड़े सूत्र बताते हैं कि महानगर पद पर राजकुमार अग्रवाल मांट वाले, विनोद अग्रवाल सुपाड़ी वाले, मुकेश खण्डेलवाल वैश्य वर्ग से मजबूत माने जा रहे हैं तो वहीं पिछड़ी जाति से पूर्व मंत्री स्व. राम प्रसाद कमल के पुत्र भुवन भूषण कमल के अलावा संजय शर्मा, संजय गोविल, कल्पना गर्ग आदि भी प्रमुख रूप से अपनी दावेदारी कर रहे हैं। बताया जाता है महानगर अध्यक्ष पद संघ एवं भाजपा वैश्य वर्ग की झोली में, तो जिलाध्यक्ष किसी जाट एवं ठाकुर के खाते में देना चाह रहे हैं। जबकि सभी वर्गां के दावेदार अपने-अपने पक्ष में तमाम तर्क प्रस्तुत कर रहे हैं। सबसे दिलचस्प पहलू तो यह है कि पीएफ घोटाले के बाद जहां ऊर्जा मंत्री श्रीकान्त शर्मा समर्थर्कों में मायूसी देखी जा रही है वहीं सांसद हेमा मालिनी समर्थर्कों में जोश नजर आ रहा है। यही कारण है कि ऊर्जा मंत्री समर्थित अनेक दिग्गज हेमा के पाले में जाकर ऊर्जा मंत्री समर्थकों को चुनौती दे रहे हैं।
भाजपा जिलाध्यक्ष एवं महानगर अध्यक्ष पद पर घोषणा चाहे किसी भी वर्ग-गुट से हो लेकिन पार्टी में मचा घमासान कई नेताओं के कारनामों की शिकायतों से संघ-भाजपा हलकान नजर आ रहे हैं। लेकिन वह गांधी जी के तीन बन्दरों की आकृति को ही चरितार्थ कर रहे हैं।