मथुरा वेटरनरी कुलपति नियुक्ति में घोटाला : मुर्दों को दर्शाया जिन्दा, पीएमओ तक हंगामा

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लखनऊ/मथुरा। केन्द्र की मोदी एवं उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के भ्रष्टाचार मुक्त सरकारों के दावे जमीनी धरातल पर चकना चूर होते नजर आ रहे हैं। शिक्षक भर्ती, पीएफ घोटाले के बाद अब उ.प्र. की एक मात्र मथुरा वेटरनरी यूनिवर्सिटी के कुलपति की नियुक्ति में फर्जीवाड़े का खुलासा होने के बाद पीएमओ से लेकर राज्यपाल कार्यालय तक हंगामा मचा हुआ है जिस पर पर्दा डालने के प्रयास किये जा रहे हैं।

उत्तर प्रदेश के एक मात्र उ.प्र. पन्डित दीन दयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्व विद्यालय एवं गौ अनुसंधान मथुरा के कुलपति की नियुक्ति में घोटाला सामने आया है। जिसका खुलासा आरटीआई में हुआ है। कुलपति पद के लिये आवेदन करने वाले पशु पालन महाविद्यालय महू मध्य प्रदेश के औषिधि विभाग के प्रधानध्यापक डॉ. आर.के. बघेल द्वारा मथुरा विश्व विद्यालय में कुलपति की नियुक्ति के सम्बन्ध में आरटीआई के माध्यम से पशु-पालन विभाग उ.प्र. से जानकारी मांगी गई। जिसमें विभाग द्वारा दी जानकारी में बताया कि कुलपति की नियुक्ति राज्यपाल सचिवालय द्वारा की गई है। इसके बाद आवेदक द्वारा राज्यपाल सचिवालय उ.प्र. से आरटीआई द्वारा नियुक्ति के सम्बन्ध में जानकारी की गई तो बताया गया कि कुलपति की नियुक्ति पशुपालन विभाग द्वारा की गई है।

डॉ. आर.के. बघेरवाल (प्रधानध्यापक : औषिधि विभाग पशु पालन महाविद्यालय महू मध्य प्रदेश)

डॉ. बघेरवाल का कहना है कि पशुपालन विभाग अथवा राज्यपाल सचिवालय द्वारा कुलपति की नियुक्ति के लिये ना तो विज्ञप्ति जारी की गई और ना ही छानबीन समिति का अंसवैधानिक एवं पैनल के गठन का उल्लंघन कर कुलपति का चयन किया गया। जिसमें 15 फरवरी 2019 को गठित समिति में उच्च न्यायालय लखनऊ के जज शबीहुल हसनैन, पशुधन विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. सुधीर एम बोबड़े, डॉ. भीमराव अम्बेडकर विश्व विद्यालय आगरा के कुलपति डॉ. अरविन्द कुमार दीक्षित की तीन सदस्यीय चयन समिति में से 18 आवेदकों में से डॉ. चन्द्रवीर सिंह काकस विभागाध्यक्ष जैनेटिक्स एनिमल ब्रीडिंग जीबी पन्त कृषि एवं प्रोद्योगिक विश्व विद्यालय पन्त नगर उत्तराखण्ड, डॉ. दीपक शर्मा विभागाध्यक्ष एनिमल जैनेटिक्स डिवीजन इन्डियन वेटरनरी इंस्टीट्यूट बरेली, डॉ. गिरिजेश कुमार सिंह डीन कॉलेज आफ वेटरनरी एण्ड एनिमल साइंस पन्त नगर (उत्तराखण्ड), ले.ज. जगविन्दर सिंह डायरेक्टर जनरल इण्डियन आर्मी दिल्ली, डॉ. सीता प्रसाद तिवारी डीन छत्तीसगढ़ कामधेनु विश्व विद्यालय दुर्ग मध्य प्रदेश सहित 5 लोगों को नामित कर मथुरा कॉलेज के कुलपति पद के लिये सन्तुति की गई। जिसमें से राज्यपाल एवं चयनित समिति द्वारा 27 फरवरी 2019 को डॉ. गिरिजेश कुमार सिंह को मथुरा वेटरनरी के कुलपति पद नियुक्ति कर दी गई।

 

शिकायत कर्ता डॉ. बघेरवाल ने जब आरटीआई में दी गई जानकारी की जांच पड़ताल की तो पता चला कि तीन सदस्यीय समिति ने जिन 5 नामों की सन्तुति की उनमें से डॉ. दीपक शर्मा बरेली, लेफ्टीनेंट जनरल जगविन्दर सिंह की मौत चयन समिति की रिपोर्ट से सालों पहले ही हो चुकी थी। जिन्हें जिंदा दर्शाकर कुलपति के पद के 5 नामों के पैनल में सन्तुति की गई थी। कुलपति नियुक्ति में हुए फर्जीवाड़े का अन्दाजा इसी से लगाया जा सकता है कि शिकायत कर्ता द्वारा जब चयन समिति द्वारा 5 लोगों के नामों की सन्तुति का डाटा आरटीआई में राजभवन कार्यालय से मांगा गया तो उसमें से मात्र कुलपति पद पर नियुक्त डॉ. गिरिजेश कुमार सिंह एवं डॉ. सीताराम तिवारी का विवरण ही उपलब्ध कराया गया जबकि तीन अन्य दावेदारों का विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया। इस नियुक्ति में किस तरह मनमानी हुई इसका अन्दाजा इसी से लगाया जा सकता है कि चयन समिति में भारतीय कृषि अनु संधान परिषद एवं सरकार आदि के नामित लोगों को रखने का प्रवधान है के नियम एवं कुलपति की चयन प्रक्रिया होने के बाद कुलधापति (राज्यपाल) चयनित व्यक्ति का खुद या अपने सचिव के माध्यम से पालन अनुमोदन कर नियुक्ति करता है के नियम का भी पालन नहीं किया गया।

इस भर्ती घोटाले का अन्दाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जब सरकारी विभाग चपरासी, माली, चालक रसोईया जैसी सरकारी नौकरियों एवं संविदा पर तैनात कर्मचारियों के लिये सरकारी विज्ञापन तो प्रकाशित कराये जाते हैं लेकिन कुलपति की नियुक्ति के लिये कोई विज्ञप्ति तक जारी क्यों नहीं की गई।

डॉ. गिरिजेश कुमार सिंह
कुलपति – वेटरनरी, मथुरा

करीब 10 माह से कुलपति नियुक्ति में फर्जीवाड़े में कार्यवाही को लेकर जंग लड़ रहे डॉ. बघेरवाल का कहना है कि फर्जीवाड़े के खुलासे के बाद राज्यपाल सचिवालय द्वारा उनसे बायोडाटा मांगकर तैनाती का भरोसा दिया जा रहा है। जबकि उनकी नियुक्ति पहले से ही है। उन्होंने कहा कि अगर जांच कर दोषियों के खिलाफ कोई कार्यवाही कर नियुक्ति तो निरस्त नहीं किया गया तो वह न्यायालय की शरण लेंगे और दोषियों के खिलाफ कार्यवाही कराकर शान्त बैठेंगे। इस सम्बन्ध में नियुक्त कुलपति डॉ. गिरिजेश कुमार सिंह से ‘‘विषबाण’’ द्वारा कई बार सम्पर्क किया गया लेकिन वार्ता नहीं हो सकीं।

 

 

फर्जी नियुक्ति में खुली मोदी-योगी के दावों की पोल

पीएम मोदी हो या सीएम योगी सरकार में पारदर्शिता के भले ही लाख दावे करें लेकिन ये सरकारी राजकाज में ध्वस्त होते नजर आ रहे हैं उ.प्र. में ऊर्जा विभाग के कर्मचारियों के भविष्य निधि घोटाला हो फिर शिक्षक भर्ती घोटाला उसके गहरे सम्बन्ध मथुरा से रहे हैं। आखिर हो भी क्यों ना जब ऊर्जा विभाग की कमान मथुरा के हाथों में हो और शिक्षक भर्ती के घोटाले बाज मुख्यमंत्री-राज्यपाल के साथ फोटो खिचाऐंगे तो घोटालोंबाजों के हौंसले बुलन्द होना लाजिमी है। अब उ.प्र. की एक मात्र वेटरनरी विश्व विद्यालय के कुलपति नियुक्ति का फर्जीवाड़ा सामने आने और इसकी शिकायत पीएमओ, राष्ट्रपति, मुख्यमंत्री, राज्यपाल तक होने के बाबजूद भी कोई कार्यवाही ना होने से जाहिर होता है कि घोटाले बाजों की जड़ें पीएमओ से लेकर सीएम कार्यालय तक जुड़ी हुई हैं। कुलपति के फर्जीवाड़े में पदों के शामिल होने की भूमिका का अन्दाजा इसी से लगाया जा सकता है कि डॉ. आर के बघेरवाल द्वारा पशु पालन विभाग से नियुक्ति की जानकारी मांगते हैं तो वहां राज्यपाल कार्यालय से जानकारी के लिये कहा जाता है। जब राज्यपाल कार्यालय से जानकारी मांगी जाती है तो पशुपालन विभाग से सम्पर्क करने के लिये कहा जाता है।

इस सम्बन्ध में डॉ. बाघेरवाल ने केन्द्रीय पशुधन मंत्री गिर्राज सिंह को भी घोटाले से अवगत कराया गया। इस पीएमओ दिल्ली को अप्रैल 2019 में शिकायत संख्या 0813 को कराई गई जिसमें पीएमओ कार्यालय मुख्यसचिव उ.प्र. में जांचधीन होना बताते हुए शिकायत नं. 60000190053171 देते हुए 3 मई 2019 को अवगत कराया।

इस सम्बन्ध में 27 अगस्त 2019 को राष्ट्रपति को पत्र लिखकर कुलपति नियुक्ति में धांधली एवं आरटीआई के जबाब ना देने की शिकायत के साथ धांधली के साक्षों के साथ की गई लेकिन किसी पर कोई कार्यवाही नहीं हो सकी। खासबात तो यह है कि इस घोटाले को दबाने के लिये कभी राज्यपाल कार्यालय पशुपालन विभाग के पाले में गैंद को फैंक देता है तो कभी पशुपालन विभाग राज्य भवन के पाले में शिकायत कर्ता भेज देता है। पिछले करीब 10 माह से अफसरों की मनमानी का शिकार बने शिकायत कर्ता हाईकोर्ट – सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में जुटा है तो उच्च अधिकारी शिकायत करता को सन्तुष्ट करने के लिये कई तरह के हथकण्डे अपना रहे हैं।

वीआईपी केन्द्र बना वेटेनरी कॉलेज

उ.प्र. का एक मात्र वेटरनरी कॉलेज जहां पूरे देश में अपनी पहचान बनाये हुए है वहीं दूसरी तरफ वीआईपी के लिये भी प्रमुख केन्द्र बना हुआ है। कॉलेज के दीक्षान्त समारोह में समय-समय राज्यपाल, मुख्यमंत्री, पशु-पालन मंत्री का आगमन होता रहा है। 11 सितम्बर 2019 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वेटेनरी कॉलेज प्रांगण से पशुधन, पर्यावरण, प्लास्टिक सिंगलयूज के अभियान का अलख जगाने के साथ गौमाता की सेवा का संकल्प भी व्यक्त किया गया था लेकिन वेटरनरी की कुलपति की नियुक्ति में हुए घोटाले ने पीएम मोदी के ‘‘खाऊंगा ना खाने दूँगा’’ के दावों पर प्रश्न चिन्ह् लगा दिया है।