सड़क निर्माण में घोटाला : टूटी सड़कों पर भ्रष्टाचार का ओवरलोड

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मथुरा। उ.प्र. के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा विकास कार्यों में परिवर्तिता बरतने के तमाम निर्देशों के बाबजूद भी सड़क निर्माण में घोटाले का खेल थमता नजर नहीं आ रहा है। जहां सड़क निर्माण के तीन माह के अन्दर ही पूर्ण रूप से ध्वस्त हो गई। इस घोटाले में जिलाधिकारी द्वारा सख्त कार्यवाही के आदेशों के बाद ठेकेदार द्वारा सड़क मरम्मत का कार्य तो शुरू कर दिया गया है। लेकिन दोषियों के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं हो सकी है।

उ.प्र. में सत्ता परिवर्तन के बाद भी विकास कार्यों में कमीशन खोरी के चलते सड़क निर्माण की गुणवत्ता में सुधार होता नजर नहीं आ रहा है। मार्च 2019 में करीब 13.50 करोड़ की लागत से स्पेशल रिपेयर के तहत छाता-शेरगढ़ मार्ग की सड़क मात्र तीन माह के अन्दर रेत के महल की तरह ढ़ह गयी। जब इस सड़क मार्ग से जिलाधिकारी मथुरा सर्वज्ञराम मिश्र गुजरे तो सड़क की हालत देखकर उनका माथा ठनक गया उन्होंने सम्बंधित अधिकारियों एवं निर्माण ठेकेदार को तलब किया तो ठेकेदार ने अपने राजनैतिक रसूख का प्रयोग करते हुए ना अपना कुछ होने दिया और ना ही दोषी अफसरों का कुछ बिगड़ने दिया।

सड़क घोटाले का खुलासा होने के बाद ठेकेदार ने पिछले दिनों घोटाले को दबाने के लिये सड़क पर मरहम पट्टी लगाने की कोशिश की लेकिन सड़क घोटाले का राज नहीं छिप सका और उसे काम बन्द करना पड़ा। इसके बाद पुनः सड़क पर मरम्मत का काम शुरू कराया गया है। जिसमें एक तरफ घोटाले की मरहम पट्टी होती है तो दूसरी तरफ सड़क में गढ्ढे नजर आने लगते हैं। सड़क मरम्मत में जुटे ठेकेदार के कर्मचारी ने बताया कि सपा सरकार ने सड़क मरम्मत के लिये लोक निर्माण विभाग द्वारा भेजा गया जो भाजपा सरकार में 13.5 करोड़ कर दिया। उसका कहना था कि एरिया में वाटर लेबी ऊंचा होने के कारण सड़़क क्षतिग्रस्त हुई है। उन्होंने कहा कि पुनः सड़क रिपेयर का प्रयास किया गया है लेकिन सफलता ना मिलने पर कार्य रोक दिया गया है और नये सिरे से शीलकोड डलवा कर सही कराया जायेगा। एक तरफ सड़क घोटाले की पटकथा लिखी गई तो दूसरी तरफ परिवहन विभाग, पुलिस, राजनैतिक गठजोड़ के कारण आगरा-दिल्ली हाइवे से गाजियाबाद- अलीगढ़ आदि स्थानों के लिये ओवर लोड गिट्टी, बजरी, पत्थर से लदे भारी वाहन जहां सरकार को करोड़ों की राजस्व की हानि पहुंचाकर सड़क दुर्घटनाओं को बढ़ावा दे रहे हैं। वहीं मानकों के विपरीत बन रही सड़कों को चन्द दिनों में ही ध्वस्त कर सरकार के ओवरलोड वाहनों के खिलाफ सख्त कार्यवाही के आदेशों की खुली धज्जियां उड़ा रहे हैं।

‘‘विषबाण’’ की टीम जब इस सड़क मार्ग से गुजरी तो गढ्ढा युक्त सड़क पर 17 टन पर पास डम्फर 40 टन तथा 27 टन पर पास 22 टायर डम्फर 70 टन ऊपर तक ओवर लोड लेकर तेज रफ्तार में दौड़ते नजर आये। सड़क मार्ग पर जगह-जगह खड़ी पुलिस पीआरवी की गाड़ियों के सामने से भी ये ओवरलोड डम्पर तेज रफ्तार में दौड़ रहे थे जिन्हें कोई रोकने वाला नहीं था। जबकि बगैर हेलमेट बाइक सवारों को रोककर चालान काटे जा रहे थे। नौहझील-शेरगढ़ मार्ग स्थित पं. दीन दयाल उपाध्याय इण्टर कॉलेज के प्रबंधक मोरध्वज अग्रवाल ने बताया कि विद्यालय आने-जाने वाले बच्चों का सड़क पर विशेष ध्यान रखा जाता है। ओवर लोड वाहनों के कारण दर्जनों हादसे हो चुके हैं। जिसमें बड़ी संख्या में लोगों की मौत हो चुकी है। इसके बावजूद भी सड़क पर ना ओवरलोड वाहनों पर अंकुश लग रहा है और ना ही सड़क हादसे थम रहे हैं। उन्होंने कहा कि ओवरलोड वाहन पुलिस प्रशासन की सांठ-गांठ से चल रहे हैं जिन पर तत्काल रोक लगनी चाहिये।