प्रदूषण मुक्ति यात्रा का मथुरा में हुआ भव्य स्वागत

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गांधीवादी विचारक और राष्ट्रीय एकता परिषद के संस्थापक अध्यक्ष राष्ट्रीय एकता के लिए इंदिरा गांधी राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित पी .वी राजगोपालन के नेतृत्व में आए वैश्विक यात्री दल का गोवर्धन रोड स्थित ज्ञानदीप शिक्षा भारती प्रांगण में भव्य स्वागत किया गया । यात्री दल में महाराष्ट्र ,पश्चिम, बंगाल, राजस्थान, गुजरात, असाम, केरल, उड़ीसा, झारखंड, उत्तर प्रदेश आदि के अतिरिक्त जर्मनी, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, कीनिया, थाईलैंड, न्यूजीलैंड, कनाडा आदि देशों के भी गांधीवादी विचारधारा के रचनात्मक कार्यकर्ता उपस्थित थे। ज्ञानदीप के संस्थापक सचिव पद्मश्री मोहन स्वरूप भाटिया ने स्वागत कार्यक्रम में पी.वी राजगोपालन का परिचय देते हुए बताया कि उन्होंने सन् 1972 मैं चंबल क्षेत्र के 578 डकैतों के समर्पण, 2007 मैं आदिवासी क्षेत्रों के 25000 भूमिहीन गरीबों की दिल्ली तक 25000 किलोमीटर की पदयात्रा की। वह गांधी जी के शांति तथा अहिंसा के संदेशों को संपूर्ण विश्व में पहुंचाने के लिए प्रयासरत है। उन्होंने सन 2012 में पूरे देश से आए लगभग एक लाख लोगों के मार्च का नेतृत्व करते हुए भूमि और आजीविका संसाधनों पर नियंत्रण की मांग की थी।

पी.वी राजगोपालन ने स्वागत के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस यात्रा का उद्देश्य जल ,वायु तथा ध्वनि प्रदूषण से मुक्ति के साथ यमुना को भी प्रदूषण से मुक्त कराया जाना है। उन्होंने कहा कि आज संसार में सड़क से लेकर आकाश तक बढ़ती जा रही हिंसात्मक गतिविधियों पर अहिंसा के सिद्धांतों से ही नियंत्रण किया जा सकेगा।

इस अवसर पर ब्रज क्षेत्र के शमशान स्थलों को वायु प्रदूषण से मुक्ति और वृक्षों के कटान रोकने के लिए मोक्षिदा हरित शवदाह प्रणाली के संस्थापक विनोद अग्रवाल , विषवाण संपादक मफतलाल अग्रवाल, शिक्षाविद संदीप कुलश्रेष्ठ ,प्रशासनिक अधिकारी ज्ञानदीप आशीष भाटिया, समाजसेवी पवन चतुर्वेदी, निरंजन लाल, गुप्ता कवित्री, उषा शर्मा, मेमोरियल प्रेरणा शर्मा, उमेश गर्ग, ललित शर्मा, पत्रकार श्रेया शर्मा, डॉक्टर एसपी गोस्वामी आदि ने पी.वी राजगोपालन स्वामी नारायण दास तथा यात्री दल का चंदन लगाकर माल्यार्पण कर तथा उत्तरीय उड़ा कर स्वागत किया।

पीवी राजगोपाल ने स्वागत के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि 2 अक्टूबर को राजघाट दिल्ली से प्रारंभ यात्रा का 364 वें दिन गांधी जी की सेवाग्राम कुटिया पर समापन होगा। यात्रा समापन के पश्चात वह मथुरा आएंगे और ब्रज क्षेत्र की समस्याओं के निराकरण के लिए अहिंसात्मक आंदोलन करेंगे।