सुरीर कांड: दबंगों ने किसी की मूंछ उखाड़ी तो किसी को खिलाया शौच

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मथुरा। दबगों एवं पुलिस के गठजोड़ से त्रस्त जोगेन्दर ठाकुर एवं उसकी पत्नी चन्द्रवती द्वारा कोतवाली सुरीर में पैट्रोल छिड़कर आग लगाने के बाद जोगेन्द्र सिंह की मौत हो जाने से जहां पुलिस की कार्य प्रणाली पर प्रश्न चिन्ह् लग रहे हैं वहीं दबंगों को बचाने के लिये राजनैतिक एवं जातीय संगठन भी मैदान में आ गये हैं। जिससे जोगेन्द्र को न्याय मिलने पर सवालिया निशान लगने शुरू हो गये हैं।

गत 28 अगस्त को कस्बा सुरीरकलां निवासी ईंट भट्टा मजदूर जोगेन्द्र सिंह एवं उसकी पत्नी चन्द्रवती ने सुरीर कोतवाली के प्रांगण में पैट्रोल छिड़ककर अपने आपको आग लगा ली थी। जिसमें से रविवार की सुबह जोगेन्द्र ने दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में दम तोड़ दिया वहीं इससे पूर्व पुलिस ने अपना बचाव करते हुए मृृतक के पुत्र जगदीश से पांच लोगों के खिलाफ तेल छिड़क कर माता-पिता को आग लगाने का मामला दर्ज करा दिया था। इस संबंध में ‘‘विषबाण’’ टीम द्वारा की गई जांच-पड़ताल में चैंकाने वाले खुलासे सामने आये हैं। जिसमें दबंगों एवं पुलिस के गठजोड़ के उत्पीड़न से त्रस्त होकर पति-पत्नी आग लगाने पर मजबूर हो गये। जिस पर कोतवाल एवं 2 दरोगाओं को निलम्बित कर दिया गया था तथा मुख्य आरोपी सत्यपाल एवं उसके सहयोगी पूर्व प्रधान मोहन श्याम शर्मा को पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत करने पर जहां सत्यपाल को जेल भेज दिया गया वहीं मोहनश्याम शर्मा को जमानत पर रिहा कर दिया गया था।

इस घटना में दबंगों एवं पुलिस के गठजोड़ की कहानी जांच पड़ताल में सामने आयी है। जिसमें पुत्र द्वारा नामजद कराये गये बबलू ठाकुर, मोहनश्याम शर्मा, सत्यपाल सिंह की तिकड़ी का कस्बा सहित पूरे क्षेत्र में आतंक सामने आया है। जिसमें ईंट भट्टा कारोबार करने वाले पूर्व प्रधान मोहन श्याम शर्मा एक राजनैतिक दल से जुड़े हुए हैं। वहीं जनपद के कई कद्दावर नेताओं का संरक्षण प्राप्त होने के कारण मोहन श्याम शर्मा के हौसलें बुलन्द थे। मृतक के चाचा लीलाधर उर्फ गुड्््डू ठाकुर एवं अन्य ग्रामीण बताते हैं मोहन श्याम ने बेटे की शादी में तय की गई बस को लेकर मालिक की बीच बाजार में मूछ उखाड़ ली गई थी। इसी तरह गांव के एक ठाकुर के पुत्र का नाम चोरी में आने पर उसकी भी भरी भीड़ के बीच मूछें उखाड़ ली गई थीं। इसी तरह प्रधान की चुनावी रंजिश में पूर्व प्रधान योगेश शर्मा के भाई दाऊजी शर्मा को लाठी मारकर लहु-लुहान कर दिया गया। जो कई वर्षों बाद आज भी जीवन-मौत के बीच चारपायी पर नारकीय जिन्दगी जीने पर मजबूर है। मोहन श्याम की दबंगई का अन्दाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सुरीर के एक प्रमुख व्यापारी से शौच के समय मारपीट कर उसके मुंह में शौच भर दिया गया था।

जोगेन्दर का पुत्र जगदीश

इसी तरह मोहन श्याम ने अपने प्रतिद्वंदी पूर्व प्रधान दिलीप गुप्ता के विरूद्ध पुलिस से सांठ-गांठ कर चैथ वसूली का झूठा मुकद्मा दर्ज कराकर उसे पुलिस से गिरफ्तार करा दिया। बल्कि उसके नाबालिग पुत्र एवं भाईयों को भी नामजद करा दिया गया।बताते हैं कि कस्बा सहित क्षेत्र में हुई कई हत्याओं के मामले में भी मोहनश्याम का नाम तो उछला लेकिन पुलिस के गठजोड़ एवं राजनैतिक पहुंच के चलते बच निकलने में सफल रहा। बताते हैं कि पिछले दिनों एक दलित महिला से छेड़छाड़ का मामला भी सामने आया लेकिन रिपोर्ट दर्ज नहीं हो सकी। जिसकी सुनवाई न्यायालय में चल रही है। बताते हैं कि 28 सितम्बर को दम्पत्ति के आग लगाने के बाद मोहनश्याम शर्मा कोतवाली पहुंचा तो जनता का गुस्सा भड़क गया और उसका गिरेबान पकड़कर दीवार से दे मारा। बताते हैं कि मुख्य आरोपी सत्यपाल को मोहनश्याम का पूरा संरक्षण प्राप्त था। जब घटना ने देश-प्रदेश में जोर पकड़ा तो पुलिस ने मोहन श्याम पर दबाब बनाया जिस पर मोहनश्याम ने ही सत्यपाल को पुलिस के हवाले कर दिया। जिसमें पुलिस अधिकारियों ने साजिश एवं संरक्षण के आरोप में मोहनश्याम को भी गिरफ्तार कर लिया। इसी तरह तीसरे अन्य आरोपी बबलू ठाकुर की दबंगई के किस्से बड़े पैमाने पर मशहूर हैं जिसमें जनता बताती है कि लेन-देन को लेकर बबलू ठाकुर ने अपने ही नजदीकी मित्र को पेड़ से बांधकर बुरी तरह पीटा था। इसी तरह एक स्वर्णकार के बेटे द्वारा वैश्य परिवार की लड़की को भगा ले जाने के मामले की रिपोर्ट दर्ज नहीं होने दी गई थी। आरोपी युवक के पिता से इसके बदले 50 लाख से अधिक की वसूली की गई थी। जबकि ईंट भट्टा में शामिल किये गये एक ब्राह्मण को खेत बेचने पर मजबूर कर दिया गया। बताते हैं कि धनपाल सिंह तौमर की हत्या में बबलू ठाकुर के खिलाफ खनन, धोखाधड़ी, हत्या जैसे मामले दर्ज होने के बाबजूद भी वह कभी जेल के सीखचों के अन्दर नहीं जा सका।

घटना के मुख्य आरोपी सत्यपाल का आतंक भी कस्बे सहित क्षेत्र में कम नहीं था बताते हैं कि शराब पीकर वह खुलेआम मारपीट-गाली गलौज की घटनाऐं आये दिन करता था। जिसमें कुछ दिन पूर्व ही उसने एक साधू वेषधारी पर गरम सरिया से बीच बाजार में हमला बोलकर लहु-लुहान कर दिया गया था। जिसकी शिकायत पीड़ित कोतवाली सुरीर करने पहुंचा था लेकिन दबंगों के गठजोड़ के कारण कोई कार्यवाही नहीं हो सकी थी। खास बात तो यह है कि पूर्व प्रधान मोहन श्याम शर्मा जिसपर डेढ़ दर्जन करीब संगीन धाराओं के मुकद्मे हैं जो सुरीर कोतवाली का हिस्ट्रीशीटर भी है वह कोतवाली में हर समय पुलिस के आस-पास नजर आता था। बल्कि कोतवाल से लेकर पुलिस कर्मियों के आवासों में कई-कई घण्टे गुजारता था। चर्चा है कि वह पुलिस और अपराधी तत्वों के मध्य मध्यस्थ की भूमिका अदा करता था। जिसके साथ बबलू ठाकुर की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहती थी। इसी तरह तीनों दबंगों की तिगड़ी का कस्बा सहित क्षेत्र में जबरदस्त आतंक था। चर्चा ये भी है कि जोगेन्दर की मौत के बाद भी कोई भी ग्रामीण अपना मुंह खोलने को तैयार नहीं था बल्कि ये कहना था कि इस मामले में भी पीड़ित पक्ष को समझौता करने पर दबंग मजबूर कर सकते हैं।

जोगेन्द्र की मौत के बाद भी उसे न्याय मिल पायेगा ये तो अभी भविष्य के गर्भ में छिपा हुआ है। जिसमें सत्यपाल तो जेल में है लेकिन मोहन श्याम शर्मा, बबलू ठाकुर सहित अन्य 4 आरोपी अभी फरार हैं जो न्यायालय से लेकर राजनैतिक नेताओं-पुलिस अफसरों से अपने बचाव की उम्मीदें तलाशने में जुटे हुए हैं। वहीं मृतक जोगेन्द्र का पुत्र जगदीश दबंगों और पुलिस के गठजोड़ के बीच अपने को भयभीत महसूस कर रहा है। जबकि उसकी माँ चन्द्रवती जीवन और मौत के बीच लगातार संघर्ष कर रही है। वहीं पुलिस अपने बचाव के रास्ते तलाशने में जुटी हुई है।

जोगेन्द्र की मौत पर लगा प्रश्नचिन्ह्!
रविवार सुबह जोगेन्द्र की सफदरजंग अस्पताल में हुई मौत पर प्रश्न चिन्ह् लगाते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
मृतक जोगेन्द्र सिंह के रिश्ते के चाचा लीलाधर उर्फ गुड्डू ठाकुर ने ‘विषबाण’ से कहाकि 31 अगस्त की रात जोगेन्द्र से उसकी टेलीफोन से बातचीत हुई थी जिसमें वह अच्छी तरह बात कर रहे थे। इसके बाद 1 सितम्बर को रविवार की सुबह 4 बजे डाॅक्टरों द्वारा तीन इंजेक्शन लगाकर उसे केले खिलाये गये जिसके बाद जोगेन्द्र सिंह की मौत हो गई। इस घटना क्रम के दौरान सुरक्षा एवं देखभाल में तैनात महिला एवं पुरूष दरोगा गायब हो गये। जिनकी शिकायत किये जाने पर दोनों दरोगाओं ने बाथरूम जाना बातया गया है। गुड्डू ठाकुर का कहना है कि एक तरफ पुलिस ने बेटे से रिपोर्ट दर्ज कराई है दूसरी तरफ जोगेन्द्र की रहस्यमय तरीके से मौत हुई है। इसकी उच्च स्तरीय जांच कराई जानी चाहिये। जिसमें दोषियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही हो।