बार अध्यक्ष एवं सचिव गुट आमने-सामने, एक दूसरे पर लगाए आरोप

0
267

मथुरा। बार एसोसिएशन में काफी समय से चला आ रहा टकराव एक बार फिर उफान पर दिखाई दे रहा है। इसमें बार के पूर्व अध्यक्ष विजयपाल सिंह तोमर के निलंबन-बहाली को लेकर न सिर्फ वर्तमान अध्यक्ष और सचिव दो गुटों में बंटे नजर आ रहे हैं। वरन् अन्य अधिवक्ता भी दोनों के साथ खड़े हो गए हैं।
पूर्व बार एसोसिएशन द्वारा लगातार दो बार अध्यक्ष बनने वाले विजयपाल सिंह तोमर को रोकने के लिए अध्यक्ष सहित अन्य पदों पर लगातार चुनाव लड़ने पर संविधान में संशोधन कर रोक लगा दी गई थी। इसे पूर्व बार अध्यक्ष विजयपाल सिंह तोमर द्वारा चुनौती दी गई थी लेकिन सफलता न मिलने पर वह चुनाव नहीं लड़ सके थे लेकिन उनके समर्थित अवधेश सिंह चैहान चुनाव जीतने में सफल रहे और अध्यक्ष पद पर विजयी रहे। इस पर बुधवार को साधारण सभा की बैठक बुलाकर बार के पूर्व निर्णय को बदल कर संविधान संशोधन करते हुए लगातार चुनाव लड़ने पर लगी रोक को हटा दिया गया। इसे लेकर बार सचिव विशाल सिंह एवं उनके समर्थकों ने नाराजगी जताते हुए इस निर्णय का विरोध करते हुए वाक आउट कर दिया और पुनः गुरुवार को एक बैठक बुलाकर साधारण सभा के सदस्यों की सर्वसम्मति से एक अध्यक्ष मंडल बना दिया। इसमें बार के पूर्व अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह, पूर्व सचिव राधारमन उपाध्याय एवं पूर्व सचिव नंद किशोर उपमन्यु को शामिल किया गया। सभा में बार एसोसिएशन द्वारा 6 अपै्रल 2019 को पूर्व अध्यक्ष विजय पाल सिंह तोमर के निलंबन को बहाल किए जाने का विरोध करते हुए प्रस्ताव निरस्त कर दिया। कहा गया कि पूर्व अध्यक्ष विजय पाल सिंह तोमर की बहाली अंसवैधानिक है, वह निष्कासित हैं और रहेंगे। साथ ही बार के सचिव विशाल सिंह ने अध्यक्ष अवधेश सिंह चैहान एवं अन्य से सदन के समक्ष माफी मांगने की बात कही। इस सभा में डा. श्यामबाबू गौतम, डाॅ. ब्रजगोपाल शर्मा, सुशील शर्मा, आलोक सिंह, अजीत तेहरिया, त्रिलोकचंद शर्मा, जयनारायन वाष्र्णेय, हरीहर नाथ शर्मा, अजय चैधरी, भानुप्रताप सिं, इंद्र कुमार वशिष्ठ, ठाकुर मदनगोपाल सिंह, दिनेश चंद्र शर्मा, ठाकुर रामवीर सिंह, बाबू लाल गौतम, ओमवीर सारस्वत, गिर्राज सिंह सिसौदिया सहित करीब 350 अधिवक्ता उपस्थित रहे।
वहीं दूसरी ओर बार के अध्यक्ष अवधेश सिंह चैहान, उपाध्यक्ष बिजयेंद्र वैदिक, कोषाध्यक्ष बिजेंद्र सिंह, संयुक्त सचिव पूजा वर्मा ने बुधवार को सचिव विशाल सिंह को बार एसोसिएशन की साधारण सभा में अनुशासनहीनता दिखाने, सदस्यों के साथ अपमानजनक व्यवहार, एसोसिएशन की गरिमा गिराने एवं बहुमत की अवज्ञा करने के आरोप में एक सप्ताह के लिए निलंबित कर दिया। संयुक्त सचिव पूजा वर्मा को सचिव पद की सभी जिम्मेदारियां सौंप दी गईं। गुरुवार को बार सचिव की बैठक के जवाब में बार अध्यक्ष गुट ने भी एक बैठक आयोजित की। बैठक में बताया गया कि सचिव विशाल सिंह द्वारा साधारण सभा में लिए गए निर्णय और बहुमत की अवज्ञा के दुराग्रह से गुरुवार को नंदकिशोर उपमन्यु, राधारमन उपाध्याय एवं भूपेंद्र सिंह के साथ मिलकर गुटबाजी करते हुए संवैधानिक प्रावधानों के विपरीत गुट विशेष की एक बैठक की गई। जबकि इसका बार सचिव को इसका कोई अधिकार प्राप्त नही है। इनकी कार्य से विरत रहने की सूचना जिला न्यायाधीश को दी गई और न्यायालय के कार्य मंे जानबूझ कर बाधा डाली गई। इसे लेकर ही नंदकिशोर उपमन्यु, राधा रमन उपाध्याय एवं भूपेंद्र सिंह को भी निलंबित कर दिया गया है। साथ ही चेतावनी भी दी गई है कि वह अपने इस कृत्य के लिए माफी मांगते हुए इस तरह का कृत्य भविष्य में न करने का आश्वासन भी दें। ऐसा न करने की स्थिति में तो कार्यवाही के लिए बार काउंसिल एवं उच्च न्यायालय को अवगत कराया जाएगा।
बार अध्यक्ष एवं बार सचिव की गुटबाजी के बीच शुक्रवार को बार कार्यालय विलंब से खुलने पर अधिवक्ताओं में चर्चा का बाजार गर्म हो गया। यह चर्चा चलने लगी कि बार कार्यालय पर एक गुट द्वारा ताला डाल दिया गया है। इस संबंध में बार सचिव विशाल सिंह ने विषबाण से बातचीत में कहा कि कार्यालय की चाबी उनके पास थी, वह अपने निजी कार्य के चलते थोड़ा लेट हो गए थे। इसके चलते ही कार्यालय विलंब से खुल सका। उन्होंने आॅफिस पर तालाबंदी किए जाने से इंकार किया। साथ ही कहा कि बार पदाधिकारी को उनके निलंबन का कोई अधिकार नहीं है।
इस संबंध में बार अध्यक्ष अवधेश सिंह चैहान ने विषबाण को बताया कि सचिव गलत तरीके से आॅफिस की चाबी अपने साथ ले गए। जबकि पहले से ही कार्यालय की चाबी कर्मचारी के पास रहती आई है। इस कारण कार्यालय के कार्य में व्यवधान उत्पन्न हुआ है। धारा 36 के अंतर्गत अध्यक्ष को विशेषाधिकार प्राप्त हैं और सचिव को पूर्व बहुमत के साथ साधारण सभा की बैठक में निलंबित किया गया है।
दूसरी तरफ अधिवक्ताओं में चर्चा है कि पूर्व में 2 बार अध्यक्ष रहे विजय पाल सिंह तोमर अपनी बहाली के बाद फिर से आने वाले चुनाव मंे लड़ सकते हैं। उन्हें रोकने के लिए ही आने वाले चुनावों की तैयारी में जुटे अन्य अधिवक्ता लामबंद हो रहे हैं। बताते हैं कि पूर्व अध्यक्ष विजयपाल सिंह तोमर 2 बार चुनाव जीतने के बाद भी लगातार चुनाव लड़ते रहे हैं और अपने प्रतिद्वंदियों को कड़ी टक्कर देते रहे हैं। आने वाले चुनाव में विजयपाल सिंह तोमर को मजबूत प्रत्याशी के रुप में देखा जा रहा है। इसके कारण बार पदाधिकारी एवं अधिवक्ता आमने-सामने आ गए हैं। अब देखना होगा कि विजयपाल सिंह तोमर का विरोध कितना सफल हो पाता है।