वृंदावन में सौभरि वन को लेकर किसान-प्रशासन आमने सामने, आंदोलन का ऐलान

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मथुरा। धर्मनगरी वृंदावन में जमीनों की आसमान छूती कीमतें अब किसानों और प्रशासन के टकराव का कारण बन गई हैं। वृंदावन में करीब 400 एकड़ जमीन में ब्रज तीर्थ विकास परिषद् द्वारा विकसित किए जा रहे फारेस्ट सिटी सौभरि ऋषि वन के चलते टकराव की स्थिति बन रही है। इस बेशकीमती जमीन के चलते मथुरा में भी सोनभद्र जैसी घटना की पुनरावृत्ति की संभावनाएं उत्पन्न हो रही हैं।
वृंदावन के सुनरख, आटस, बड़ी एवं कीकी नगला गांवों की यमुना खादर स्थित जमीन पर बीते काफी वर्षां से किसान खेती कर रहे हैं। ग्राम समाज द्वारा इस जमीन को वर्ष 1954 में 64 किसानों को पट्टे दिए गए थे। इसके चलते ही इस समय करीब 200 किसान इन पर खेती कर रहे थे। करीब 400 एकड़ से अधिक इस बेशकीमती जमीन पर भूमाफियाओं की नजरें टिक गई और वर्ष 2007 में बसपा सरकार में भूमाफियाओं ने शासन के साथ मिलकर इस जमीन के पट्टे निरस्त कराते हुए जमीन को ग्राम समाज की जमीन में जुड़वा लिया। इसके खिलाफ किसान न्यायालय चले गए लेकिन उन्हें वहां से कोई राहत नहीं मिली। उप्र के शासनादेश संख्या 1272/आठ-4-2018-07 विविध/2018 आवास एवं शहरी नियोजन अनुभाग 4 23 अपै्रल 2018 के अनुपालन में भूमि प्रबंधन समिति सुनरख की ग्राम समिति की एक बैठक का आयोजन 16 अगस्त 2018 को प्राथमिक विद्यालय गोपालगढ़ में ग्राम प्रधान वीरमति देवी की अध्यक्षता में किया गया। इसमें फारेस्ट सिटी सौभरि ऋषि वन के रुप में ग्राम समाज की 400 एकड़ से अधिक जमीन को ब्रज तीर्थ विकास परिषद् को दिए जाने का प्रस्ताव पारित किया गया। साथ ही यह शर्त भी रखी गई कि वन में पक्का एवं स्थायी निर्माण नहीं होगा और इसका स्वामित्व ग्राम समाज के पास ही रहेगा। वहीं प्रशासन पट्टा निरस्त होने के बाद भी इस पूरी जमीन पर कब्जा नहीं ले सका है। हालांकि इस वर्ष कम बरसात होने के कारण किसानों ने कुछ जमीन पर फसल नहीं की। इसके चलते प्रशासन ने करीब 40 से 50 एकड़ जमीन पर कब्जा ले लिया है। इसके विरोध में कब्जाधारी किसान प्रशासन के सामने आ गए हैं। ग्रामीण गिरीश कुमार गौतम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिकायत करते हुए बताया है कि ब्रज विकास तीर्थ परिषद् द्वारा खादर की किसानों की जमीन पर अवैध कब्जा किया जा रहा है। जबकि इस भूमि पर वर्ष 1954 पर किसानों द्वारा खेती की जा रही है और यह खेती ही एकमात्र जीवन यापन का साधन है। इस पर प्रशासन द्वारा जबरन बेरीकेडिंग कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन ने जबरन किए जा रहे कब्जे को नहीं रोका तो 200 से अधिक परिवार जिला मुख्यालय पर धरना प्रदर्शन कर आंदोलन करेंगे। किसी भी कीमत पर प्रशासन को जमीन पर कब्जा नहीं करने दिया जाएगा। इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी। गिरीश गौतम का कहना है कि भूमाफिया और प्रशासन के गठजोड़ से किसानों की बेशकीमती जमीन पर कब्जा करने की साजिश रची जा रही है। जो कि कभी भी वीभत्स खून खराबा करा सकती है। उनकी मानें तो उक्त खादर की जमीन की कीमत वर्तमान में दस लाख रुपए प्रति एकड़ है। इस तरह जमीन की कुल कीमत लगभग 40 करोड़ से अधिक है।