क्या मथुरा-वृंदावन के चौराहों पर लटक सकेंगे भूमाफियाओं के फोटो

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मथुरा। उप्र के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में विधानसभा में बयान दिया था कि भूमाफियाओं के बड़े-बड़े फोटो शहर के प्रमुख चौराहों पर लगाए जाएं। ताकि उनके बारे में शहर की जनता जान सके। उनसे सजग हो सके। साथ ही चौराहे पर फोटो लगने से भूमाफियाओं को शर्म महसूस होगी और वह अपने में सुधार लाने का प्रयास करेंगे। लेकिन उनकी इस मंशा को अधिकारियों द्वारा हकीकत में बदलने के लिए कितने सतत् प्रयास किए जाएंगे। यह देखने वाली बात होगी क्योंकि मथुरा के वृंदावन एवं गोवर्धन में करोड़ों श्रद्धालुओं के मथुरा आने के कारण यहां सरकारी जमीनों पर माफियाओं द्वारा जमकर अवैध कब्जे किए गए। सरकारी जमीनों पर कब्जा करने में संत-महंत भी भूमाफियाओं और दबंगों से पीछे नहीं रहे। उन्होंने भी जमीनों पर कब्जे कर अपने आश्रम बनाए। कार्यवाही की बात आई तो सरकार में अपनी ऊंची पहुंच और रसूख के चलते कार्यवाही से भी बच गए। वहीं कुछ अधिकारियों ने भी दबंगों द्वारा जमीन कब्जाने के मामलों की जानकारी होने और कनिष्ठ अधिकारियों द्वारा ऐसे दबंगों एवं उद्योगपतियों को भूमाफिया घोषित करने की संस्तुतियों को फाइलों के ढेर में दबा दिया। इससे दबंग भूमाफियाओं के हौसले बुलंद होते चले गए। विषबाण द्वारा ऐसे ही कुछ भूमाफिया संत-महंत, उद्योगपति एवं दबंगों की जानकारी अपने सुधि पाठकों के साथ अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर साझा की जा रही है।
भले ही सीएम योगी अब भूमाफियाओं पर इस तरह की कार्यवाही का बयान दे रहे हैं। लेकिन करीब डेढ़ वर्ष पूर्व ही सीएम योगी ने प्रमुख संत विजय कौशल महाराज द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम मेंआरएसएस प्रमुख मोहन भागवत एवं योग गुरु रामदेव के साथ प्रतिभाग किया था। जबकि उससे कुछ दिन पूर्व ही स्थानीय अधिकारियों ने विजय कौशल महाराज पर आश्रम के लिए यमुना खादर की जमीन को कब्जाए जाने की रिपोर्ट तैयार की थी। यह जमीन भी सैकड़ों एकड़ में है लेकिन जब प्रदेश के मुखिया स्वयं आश्रम के कार्यक्रम में हिस्सा लेने आए तो अधिकारियों की कार्यवाही कुंद हो गई।
पूर्व सदर तहसीलदार उमेश कुमार द्वारा भूमाफियाओं के संबंध में दी गई रिपोर्ट में ऐसे कई संत-महंत, उद्योगपतियों के नाम शामिल हैं। जिन्होंने सरकारी जमीनों पर कब्जे कर आश्रम बनाए। होटल बनाए। इमारतें खड़ी कर लीं। कालोनियां विकसित कर दीं। रिपोर्ट के अनुसार, द्वारिका पीठ के जगद्गुरू शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती ने उड़िया बाबा आश्रम के नाम पर वृन्दावन में खसरा नम्बर 421 ख की 0.547 हेक्टेयर बंजर जमीन पर कब्जा कर रखा है। इसमें जेके टायर कानपुर वालों की कोठी भी निर्मित है। इसी तरह देश-विदेश में आकर्षण का केन्द्र बने प्रेम मन्दिर के नाम पर श्यामा-श्याम धाम कृपालु महाराज निवासी रमणरेती वृन्दावन ने खसरा संख्या 63 की 0.607 हैक्टेयर भूमि पर सत्संग भवन एवं मन्दिर का निर्माण कर कब्जा किया हुआ है। जबकि श्री कृष्णानन्द स्वर्ग आश्रम ने खसरा न. 836 ग की 0.162 हेक्टेयर जमीन पर मकान, गौशाला, गीता आश्रम ने 439 ड की 0.340 हैक्टेयर जमीन पर आश्रम, बाउंड्रीवॉल, किशोरी कृपा आश्रम ने खसरा संख्या 101 व 103 पर आश्रम, मकान, पार्क, खसरा संख्या 406 की 0.876 हैक्टेयर जमीन पर देवकी नन्दन पुत्र गोपालदास व बृजलता, घनश्याम दास चेला गिरधर दास व सियाराम बाबा गोवर्धन ने जमीन का बैनामा कराकर हनुमान मन्दिर, कमरा, बरामद, बगीची के रूप में कब्जा लिया गया है। जबकि खसरा संख्या 188 ग की 0.251 हैक्टेयर जमीन पर मां संतोषी आश्रम, फ्लैट्स का निर्माण कर कब्जा किया गया है।
धानुका आश्रम, धानुका विद्यालय, धानुका कोठी, श्यामाबाई का आश्रम, डण्डी आश्रम, होटल बांके बिहारी, इस्कॉन मन्दिर, एमबीटी गैस्ट हाउस, रसियन रेजिडैंसी आदि ने सरकारी जमीन पर कब्जा कर 7 मंजिला भव्य भवन का निर्माण करा डाला। इस लूट में तथा कथित समाज सेवी, माफिया, राजनैतिक नेता भी पीछे नहीं हैं। जिसमें दिलीप गौतम निवासी मनीपाड़ा वृन्दावन ने खसरा संख्या 63 की 0.458 हैक्टेयर जमीन पर कॉलोनी विकसित कर बेच दिया। जबकि खसरा संख्या 30 की 0.360 हैक्टेयर जमीन पर पीतम सैनी पुत्र होशियार सैनी, निरंजन सैनी, भोला पुत्र रामफल निवासी मदन मोहन घेरा वृन्दावन ने नलकूप, कमरा बनाकर कब्जा कर लिया। जबकि खसरा संख्या 418 की 0.364 हैक्टेयर भूमि पर सेठ नरोत्तम शेख सरिया अम्बुजा सीमेंट वालों ने कोठी बनाकर कब्जा कर लिया। जबकि 0.121 हैक्टेयर पर नगर पालिका द्वारा सुलभ शौचालय, पार्किंग का निर्माण करा दिया गया।
सदर तहसीलदार उमेश कुमार द्वारा शासन-प्रशासन को दी गई रिपोर्ट के खुलासे के बाद धर्म के ठेकेदारों सहित भूमाफियाओं में हड़कम्प मच गया था लेकिन उच्च अधिकारियों द्वारा रिपोर्ट को दबा दिया गया। इससे एक बार फिर राजनैतिक और प्रशासनिक संरक्षण में जमीन कब्जाने का खेल बड़े पैमाने पर खेला शुरु हो गया। इसका खुलासा वृन्दावन के राजपुर बांगर स्थित चैतन्य बिहार फेस-2 की खसरा नं. 73 व 78 की भूमि में सामने आया। जिसे वर्ष 1992 में पूर्व जिलाधिकारी ने गजट नोटिफिकेशन संख्या 2529/9 आ-1-92-5 एल-ए/91 द्वारा 30.03.1994 को अधिग्रहित कर मथुरा-वृन्दावन विकास प्राधिकरण को तहसील के माध्यम से कब्जा करा दिया गया। जिसे प्राधिकरण ने पट्टों के रूप में आवंटियों को आवंटित कर दिया। लेकिन इस जमीन पर राजनैतिक संरक्षण में धर्मेंन्द्र कुमार पुत्र राजन सिंह निवासी ग्राम मगदा पोस्ट बाठौन मथुरा ने बाउंड्रीवॉल कराकर कब्जा कर लिया। जिसकी शिकायत आवंटियों द्वारा शासन-प्रशासन से की गई। जिसमें प्रशासन की कार्यवाही से करोड़ों की जमीन से बेदखल होते देख उप्र के एक कद्दावर मंत्री के परिजनों को हिस्सेदार बनाकर जांच का रूख ही बदलवा दिया गया। जिसमें जमीन की जांच मथुरा-वृन्दावन के किसी अधिकारी की जगह मांट तहसीलदार को दे दी गई। जिसमें कब्जाधारक के पक्ष में रिपोर्ट लगाना बताया जा रहा है। जिस पर प्रश्न चिन्ह लगाते हुए पीड़ितों ने न्याय की गुहार लगाई है।


इसी तरह का मामला मथुरा के गोवर्धन चौराहा कृष्णा नगर पुलिस चौकी के सामने का है जहां नजूल एवं निजी भूमि पर शहर के प्रमुख व्यवसाई विनोद गर्ग ने मुकन्द रिसोर्ट मैरिज होम खड़ा कर दिया। जिसकी शिकायतों पर उद्योगपति विनोद गर्ग पर भूमाफिया एक्ट में कार्यवाही एवं उन पर एफआईआर दर्ज कराने के लिए मार्च 2018 में तत्कालीन एसडीएम क्रांति शेखर सिंह ने नगर निगम के नगर आयुक्त को पत्र लिखा था लेकिन यह कार्यवाही अभी तक लंबित है। इससे ही माफियाओं की ऊंची पहुंच का अंदाजा लगाया जा सकता है।
जनपद में भू-माफियाओं के बुलन्द हौसलों का अन्दाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मथुरा के कृष्णापुरी चौराहा स्थित ब्लैक स्टोन कॉलेज की 7000 वर्गगज से अधिक की जमीन का भू-माफियाओं ने मायावती सरकार में फर्जी बैनामा कराकर योगी सरकार में भू-माफियाओं ने जमीन की पैरवी करने वाले क्रिस्चियन सोसायटी के अध्यक्ष को एक कथित हत्या के आरोप में जेल भिजवाकर बाउण्ड्रीबाल का निर्माण करा कर 100 करोड़ से अधिक की जमीन पर कब्जा कर लिया गया। इसी तरह महावन क्षेत्र में विद्यालय गेट के बाहर माफियाओं ने एक ही रात में बाउण्ड्रीकर जमीन पर कब्जा कर लिया गया। जिसे विद्यालय प्रबंधतंत्र ने जैसे तैसे ध्वस्त कराया। लेकिन दोषियां के खिलाफ तहरीर देने के बाद भी मुकद्मा दर्ज नहीं हो सका।
इसी तरह गोवर्धन के प्रमुख संत सियाराम बाबा ने वृन्दावन में सरकारी भूमि का बैनामा कराकर आश्रम खड़ा कर दिया है। उनके आश्रम पर पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के भाई शिवपाल यादव का सपा सरकार के दौरान आये दिन अवागमन बना रहा। जबकि अनेक प्रमुख संतों के आश्रमों पर भी सभी राजनैतिक पार्टियों, नेताओं, जजों, अफसरों का आना-जाना लगा रहता है। जिससे जमीन कब्जाने का सिलसिला बदस्तूर जारी रहता है और प्रशासन सरकारी जमीन पर कब्जा होते देख मूक दर्शक बना होकर तमाशा बीन बना रहता है। एक बार फिर सरकारी जमीनों पर कब्जे का मामला सामने आने पर नोटिस भेजने का खेल शुरू हो गया है। जिसमें कार्यवाही होने की उम्मीद करना बेमानी ही नजर आ रहा है।
वृंदावन स्थित तराश मंदिर की जमीन को कब्जाने का प्रयास भी भूमाफियाओं द्वारा किया गया। इसका विरोध करने पर मंदिर के संचालक उदयन शर्मा को माफियाओं ने पुलिस से मिलीभगत कर जेल भिजवा दिया। इसकी शिकायत वह लगातार शासन प्रशासन से करते आ रहे हैं। बताते हैं कि उक्त माफियाओं की हाल ही में हुई महंत बालमुकुंद शरण की हत्या में भूमिका है। वहीं एक अन्य महंत के साथ भी इस तरह की घटनाओं को अंजाम देने की फिराक में है। वर्तमान में इस संत के साथ भूमाफिया का फोटो भी वायरल हो रहा है। बताते हैं कि उक्त भूमाफिया एवं उसके परिजनों के खिलाफ वृंदावन कोतवाली में एक दर्जन से अधिक मुकदमा दर्ज हैं। इसके बाद भी पुलिस प्रशासन कोई कार्यवाही नहीं कर रहा है।