चंद्रयान मिशन-2 के अंतरिक्ष में छोड़े जाने का साक्षी बनेगा मथुरा का परिवार

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चेन्नई/दिल्ली/मथुरा। भारत सरकार का भारतीय अंतरिक्ष अनुंसधान केंद्र 22 जुलाई को अपना चंद्रयान मिशन-2 अंतरिक्ष में चंद्रमा पर भेजने के लिए अब पूर्ण रूप से तैयार है। इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में इसरो, नासा सहित देश विदेश के जाने माने वैज्ञानिक एवं हस्तियां भाग लेंगी। हमारे बृज क्षेत्र के लिए यह अत्यंत गर्व का विषय है कि इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिये मथुरा निवासी एवं प्रमुख समाज सेवी अनुज गर्ग एवं उनके परिवार को भी आमंत्रित किया गया है। इस आशय का एक निमंत्रण ‘लांच विटनेस पास’ उन्हें गत रात्रि ही प्राप्त हुआ। इसके मिलते ही परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई है। उन्हें यह निमंत्रण उनके पुत्र आयुष गर्ग द्वारा रक्षा और विज्ञान विषय पर लगातार की जा रही सफल रिसर्च के लिए भेजा गया है।
चन्द्रयान मिशन-2 मोदी सरकार एवं भारतीय अंतरिक्ष अनुंसधान केंद्र इसरो की बहुत ही महत्वकांक्षी योजना है। जिस पर लगभग 14 मिलियन अमेरिकी डॉलर का खर्च आएगा। इसके सफल होने पर मंगल ग्रह पर बसने का रास्ता साफ हो सकता है साथ ही भारत की गिनती अमेरिका, रूस एवं चीन सहित ऐसे देशों में हो जाएगी जिन्हें मंगल ग्रह पर सफलतापूर्वक पहुंचने का गौरव प्राप्त है। पहले चन्द्रयान-2 को अंतरिक्ष मे छोड़ने का कार्यक्रम 14 जुलाई को था परंतु कुछ तकनीकी कमियों के कारण उसे रोक दिया गया। इसरो के वैज्ञानिकों के अनुसार अब वह सभी तकनीकी कमियां दूर कर ली गयी है और अब चंद्रयान मिशन-2 अंतरिक्ष में चंद्रमा पर जाने को पूर्णतया तैयार है। अब इसे 22 जुलाई को भारतीय समय 2ः43 मिनट दोपहर को उत्तरी चेन्नई से लगभग 80 किमी दूर श्री हरिकोटा आयरलेंड स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से भारत में ही निर्मित जीएसएलवी मार्क एंड एमआई रॉकेट द्वारा अंतरिक्ष में छोड़ा जाएगा। इससे पूर्व सन् 2008 में चंद्रयान मिशन-1 भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा चंद्रमा पर भेजा गया था। जो सिंगल स्पेस क्राफ्ट था। जिससे चंद्रमा पर पानी होने के प्रमाण मिले थे। अब 11 साल बाद इस चंद्रयान मिशन-2 में 3 स्पेस क्राफ्ट होंगे। जिनमें एक ऑपरेटर, एक लेंडर और एक रोवर होगा। लेंडर और रोवर को विक्रम और प्रज्ञान नाम दिया गया है। अगर भारत का चंद्रयान मिशन-2 कामयाब हो जाता है तो भारत चंद्रमा के दक्षिण पोल पर उतरने वाला प्रथम राष्ट्र होगा साथ ही चन्द्रमा पर पहुंचने वाला चौथा राष्ट्र।
भारतीय वैज्ञानिकों के अनुसार चंद्रयान मिशन-2 धीरे-धीरे चंद्रमा पर कुछ दिन घूमकर पहले अपना रास्ता बनाएगा। फिर 6 सितम्बर तक चंद्रमा के दक्षिणी पोल पर सौर ऊर्जा से संचालित अपना विक्रम स्पेस क्राफ्ट उसके बाद प्रज्ञान स्पेस क्राफ्ट उतारेगा। वहां ये क्राफ्ट लगभग 1 लुनार दिन यानि पृथ्वी के 14 दिन तक चंद्रमा की सतह पर परिक्रमा कर चंद्रमा की गहन जानकारी हासिल करेंगे। इस तरह सबकुछ ठीक रहा तो वो दिन दूर नहीं कि कुछ वर्षों के पश्चात् चंद्रमा पर रहने का रास्ता साफ हो जाएगा।