डीआईओएसः जांच में फर्जी मिली शिक्षिका को दे दिए सेवानिवृत्ति लाभ

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मथुरा। जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय की कार्यशैली बीते काफी समय से लगातार विवादों में घिरी हुई है। एक ताजा मामले में पहले तो जांच में एक शिक्षिका की नियुक्ति फर्जी बताई गई। इसके बाद अब अधिकारी इस शिक्षिका को सेवानिवृत्ति के बाद के लाभ देने की तैयारी कर रहे हैं। फंड, पेंशन आदि की पत्रावली तैयार कर ली गई है। जांच में शिक्षिका की नियुक्ति अवैध करार दिए जाने के बाद फिर शिक्षिका को उसके सेवानिवृत्ति लाभ देने की बात किसी के गले नहीं उतर रही है। वरन् यह कार्यशैली चर्चा का विषय बनी हुई है।
जानकी बाई गर्ल्स इंटर कालेज में कार्यरत शिक्षिका सीता शर्मा की नियुक्ति को कालेज की ही प्रवक्ता डॉ. सीमा सिंह ने चुनौती देते हुए डीआईओएस कार्यालय में शिकायत की थी। इसके बाद डीआईओएस ने शिकायत की जांच के लिए राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. रन सिंह को जांच अधिकारी नियुक्त किया। जांच अधिकारी ने फरवरी माह के अंत में रिपोर्ट दी कि शिक्षिका सीता शर्मा की नियुक्ति अमान्य एवं कालातीत प्रबंध समिति द्वारा नियमों के खिलाफ की गई है। अतः यह नियुक्ति/चयन अवैध होने के साथ-साथ शून्य की स्थिति में है। जांच रिपोर्ट के आधार पर सीता शर्मा का वेतन भुगतान रोकने की कार्यवाही करने का आदेश 29 मार्च 2019 को डीआईओएस केपी सिंह ने जारी किए। जबकि 30 मार्च को शिक्षिका सीता शर्मा सेवानिवृत्त हो रही थीं। पूरी नौकरी करने के बाद बिलकुल अंत समय में नियुक्ति अवैध घोषित होने से सीता शर्मा के रिटायर्ड उपरांत मिलने वाले लाभ रोक दिए गए। इसके बाद फिर सेटिंग-गेटिंग और दबाव बनाने का खेल शुरु हुआ। यह खेल काम कर गया। अब डीआईओएस ऑफिस ने शिक्षिका को सेवानिवृत्ति उपरांत मिलने वाले लाभ देने की तैयारी कर ली। सीता शर्मा के जीपीएफ एवं पेंशन की पत्रावली कालेज द्वारा डीआईओएस ऑफिस में भेजी गई। ऑफिस के लिपिक द्वारा भी इस पत्रावली को पूरी तरह तैयार कर लिया गया। अब सीता शर्मा को रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले समस्त लाभ दे दिए गए हैं। फंड भी रिलीज कर दिया गया है। सूत्रों की मानें तो इस खेल में शिक्षिका को लाभ देने की एवज में दलाल के माध्यम से लगभग 5 लाख में सौदा तय किया गया था। इसके बाद सीता शर्मा को उनके लाभ दे दिए गए। डीआईओएस केपी सिंह ने भी विषबाण से फोन पर हुई वार्ता में स्वीकार किया कि सहायक अध्यापिका सीता शर्मा को लाभ दे दिए गए हैं। फंड रिलीज कर दिया गया है। जब उनसे पूछा गया कि सीता शर्मा की नियुक्ति जांच में अवैध पाई गई थी तो फंड आदि कैसे जारी कर दिए गए तो वह इसका जवाब देने की जगह टालमटोल करते दिखे।