चालक ने महंत बनने की चाहत में की थी महंत बालमुकुंद की हत्या, पुलिस ने किया खुलासा

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मथुरा। वृंदावन के महंत बालमुकुंद शरण शास्त्री की हत्या का पुलिस ने रविवार को खुलासा कर दिया। महंत की हत्या उनके ड्राईवर ने ही अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर की थी। महंत की हत्या कर्ज द्यचुकाने, आश्रम को हड़प कर स्वयं ही महंत बनने के लिए की गई थी। पुलिस ने सास-बहू सहित 3 लोगों को गिरफ्तार किया था। मास्टरमाइंड चालक उमेश पाठक सहित 3 आरोपी अभी पुलिस की पकड़ से दूर हैं।
वृंदावन के अटल्ला चुंगी स्थित निम्बार्क पीठ गोपाल आश्रम के महंत बालमुकुंद शरण शास्त्री 12 जून को अपने चालक उमेश पाठक के साथ आश्रम से निकले थे। इसके बाद चालक और महंत दोनों ही लापता हो गए थे। उनकी तलाश लगातार की जा रही थी। जब उनका कहीं पता नहीं लगा तो 28 जून को वृंदावन कोतवाली में गुमशुदगी दर्ज कराई गई। इस बारे में विषबाण ने अपने पोर्टल पर महंत के फोटो के साथ समाचार प्रकाशित किया था। खबर के साथ लगे फोटो को देखकर मांट के एक व्यक्ति ने फोटो से मिलते जुलते हुलिए के व्यक्ति का शव मांट में मिलने की जानकारी दी थी। इसके बाद महंत के परिजनों को बुलाकर जब मांट की खादरों में मिले जले हुए शव की शिनाख्त कराई गई तो बालमुकुंद शरण शास्त्री के रुप में शव की शिनाख्त हो गई। पुलिस मामले का खुलासा करने में जुटी हुई थी। रविवार को मांट एवं वृंदावन पुलिस ने संयुक्त रुप से मामले का पटाक्षेप कर दिया। पुलिस लाइन में आयोजित पत्रकार वार्ता में एसपी सिटी अशोक मीणा ने बताया कि महंत की हत्या उनके ही चालक उमेश पाठक पुत्र खचेड़मल निवासी जयपुर राजस्थान ने की थी। उमेश पाठक के ऊपर काफी कर्जा हो गया था और वह आश्रम पर कब्जा कर महंत बनने के ख्वाब देख रहा था। इसके चलते उसने अपने साथियों के साथ मिलकर उन्हें पैसे देने का लालच देते हुए योजना बनाई। आश्रम के नजदीक ही चाय की दुकान करने वाले जितेंद्र पुत्र छोटेलाल निवासी गौधूलिपुरम् अटल्ला चुंगी वृंदावन और उसके परिजनों को भी उमेश पाठक ने अपने साथ मिला लिया। इसके बाद 12 जून को महंत बालमुकुंद शरण शास्त्री को योजनानुसार जितेंद्र के घर ले जाया गया। यहां जितेंद्र की मां मीरा देवी ने लस्सी बनाई। जितेंद्र की पत्नी प्रीती ने नींद की गोलियां पीस कर लस्सी में मिला दी और महंत को पिला दी। बाबा के नशे की हालत में महत्वपूर्ण कागजों और दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए गए। इसके बाद बाबा के गले में रस्सी डालकर मार दिया। इस दौरान जितेंद्र सहित अन्य लोगों ने बाबा के हाथ-पैर पकड़ लिए ताकि महंत विरोध न कर सकें। इसके बाद शव की पहचान छिपाने के लिए मांट थाना क्षेत्र में राधारानी मंदिर से आगे यमुना की खादरों में महंत के शरीर एवं चेहरे पर पेट्रोल डालकर आग लगाकर शव फेंक दिया और फिर सभी फरार हो गए। उमेश पाठक एवं ललित पुत्र छोटेलाल निवासी गौधूलिपुरम् अटल्ला चुंगी वृंदावन बाबा की गाड़ी लेकर चले गए। उमेश ने बाबा के खाते से 2.5 लाख रुपए अपने खाते में ट्रांसफर कर लिए और फिर सभी ने अपने फोन बंद कर लिए। पुलिस मामले की जांच सघनता से कर रही थी। सर्विलांस टीम भी इसमें काफी प्रयास कर रही थी। रविवार की सुबह थाना मांट, कोतवाली वृंदावन, स्वाट टीम एवं सर्विलांस टीम ने जितेंद्र , उसकी मां मीरा देवी पत्नी छोटेलाल और पत्नी प्रीती को गिरफ्तार कर लिया। वहीं चालक उमेश पाठक, ललित कुमार एवं तीसरा अभियुक्त भुवनेश कुमार पुत्र आसाराम निवासी होलीवाली गली होलीगेट कोतवाली मथुरा फरार चल रहे हैं। पुलिस अभी आरोपियों से महंत की डस्टर कार, गायब बंदूक और 2.5 लाख बरामद नहीं कर सकी है। एसपी सिटी अशोक मीणा ने बताया कि पुलिस फरार आरोपियों की तलाश में दबिशें दे रही हैं। जल्द ही फरार आरोपियों पर ईनाम भी घोषित किया जाएगा। कार, बंदूक और रुपए उमेश पाठक के पास होने की संभावना है। उसके पकड़े जाने के बाद पैसा और अन्य वस्तुएं बरामद हो सकेंगी।
वहीं दूसरी ओर वृंदावन के संत-महंत पुलिस के इस खुलासे का विरोध कर रहे हैं। संत समाज ने एकत्रित होकर जनपद में संतों के साथ हो रही घटनाओं को लेकर रविवार को मथुरा आए डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य से मुलाकात कर अपनी व्यथा सुनाई। कचहरी स्थित डाक बंगला में डिप्टी सीएम ने डीएम और एसएसपी की इस मामले में क्लास ले ली। सूत्रों के अनुसार, डिप्टी सीएम ने स्पष्ट शब्दों में नाराजगी व्यक्त करते हुए दोनों अधिकारियों को जिले की कानून व्यवस्था सुदृढ़ करने और संत समाज के साथ हो रही घटनाआें को रोकने के निर्देश दिए हैं। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य से मिलने वाले संत प्रतिनिधिमंडल में महामंडलेश्वर नवलगिरी महाराज, कार्ष्णि नगेंद्र महाराज, भास्करानंद महाराज, चित्प्रकाशानंद महाराज, आदित्यानंद महाराज, मोहनशरण महाराज, विपिन बापू, अशोक व्यास, बागीशनंदन, मुकुंद शर्मा, अंशुल शर्मा आदि मौजूद रहे।
महामंडलेश्वर नवल गिरी महाराज ने विषबाण को फोन पर बताया कि स्थानीय संत महंत पुलिस द्वारा महंत बालमुकुंद शरण शास्त्री की हत्या के खुलासे से संतुष्ट नहीं है। पुलिस ने सिर्फ मोहरों को पकड़कर खुलासा कर दिया है। जबकि इस घटना में कई सफेदपोश-नकाबपोशों के नाम चर्चाओं में आ रहे थे। पुलिस जब तक बड़े नकाबपोशों को बचाने का प्रयास कर रही है। जब तक उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जाएगा, तब तक संत समाज चैन से नहीं बैठेगा। यदि पुलिस ने सही खुलासा करने हुए बडे़ चेहरों को जेल नहीं भेजा तो संत आंदोलन करेंगे।