यह उपाय अपनाएं तो किसानों की हो सकती है दोगुनी

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मथुरा। डेयरी एनीमल वेलफेयर गाइड लाइन्स के क्रियान्वयन व दुधारू पशुओं की स्थिति में सुधार लाने हेतु प्रगतिशील कृषकों, दुग्ध समितियों तथा पशु चिकित्सा संस्थानों के साथ एक कार्यशाला वेटनरी कॉलेज के सभागार में आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कुलपति दुवासु डा. जीके सिंह ने कहा कि हमारे देश में स्वदेशी गौवंशों का उत्पादन लगभग एक हजार लीटर प्रति व्यक्ति है। अतः स्वदेशी गायों में दुध की उत्पादकता बढ़ाने की अपार संभावना है। कहा कि पशुपालन और मत्स्यपालन अपनाकर किसानों की आय दोगुनी हो सकती है।
दुवासु के अधिष्ठाता डा. एसके गर्ग ने कहा कि केवल कृषि पर निर्भर रहकर किसान भाइयों की आय को दुगुना नहीं किया जा सकता है, इसलिए हमें पशुपालन की ओर कदम बढ़ाने होंगे। कृषि वैज्ञानिक डा. एसके मिश्रा ने बताया कि नैपीयर ग्रास एवं मल्टीकट चरी को हरे चारे के रूप में उपयोग किया जाय। डा. एके सिन्हा द्वारा लिंग वर्गीकृत वीर्य द्वारा कृत्रिम गर्भाधान पर प्रकाश डाला। फेडरेशन ऑफ इंडियन एनीमल प्रोटेम्सन आर्गेनाइजेशन के प्रतिनिधि शरद झा ने बताया कि उप्र सरकार द्वारा हजारों गौशालाओं की स्थापना एवं प्रबंधन के लिए मार्ग निर्देशिका जारी करने का स्वागत किया गया। उन्होंने डेयरी सेक्टर को नियमित करने के लिए नई नियमावली के क्रियान्वयन की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि दुधारू पशुओं का कल्याण हो सके। माताजी, हासानन्द तथा श्रीपाद गौशाला के प्रतिनिधियों द्वारा बताया कि दुध उत्पादन के साथ-साथ अन्य उत्पादों के द्वारा जैसे गोबर, गौमूत्र से किसानों की आय बढायी जा सकती है। विभिन्न विकास खण्डों से आये प्रगतिशील किसानों ने ग्रामीण क्षेत्र में पशुपालन से होने वाली आय तथा कठिनाइयों के संबंध में अवगत कराया।
आगरा मंडल के अपर निदेशक डा. एसके मलिक ने कहा कि पशुपालन एवं मत्स्य पालन अपना कर ही वर्ष 2022 तक किसानों की आय को दुगुना किया जा सकता है। संयुक्त निदेशक उत्तराखंड डा. आशुतोष जोशी के अनुसार निराश्रित पशुओं के संरक्षण हेतु विभिन्न विभागों जैसे नगर निगम, नगर पंचायत, जिला पंचायत, ग्राम पंचायत, वन विभाग एवं प्रशासनिक विभागों के संयुक्त प्रयासों के द्वारा ही समस्या का समाधान संभव है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. भूदेव सिंह ने पशुपालन निदेशालय द्वारा जारी गाइड लाइंस पर विस्तृत चर्चा करते हुए बताया कि जनपद में एसपीसीए पशु क्रुरता निवारण समिति का गठन होने से गाइड लाइन्स का अनुपालन हो सकेगा। उन्होंने बताया कि इस कार्यशाला का उद्देश्य पशुपालक एवं गौशालाओं के लिए राज्य स्तरीय दिशा निर्देशों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए किया गया है। कार्यशाला में 100 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिसमें दो दर्जन ग्राम प्रधान तथा प्रगतिशील किसान, अधिशासी अधिकारी फरह, गोवर्धन, गोकुल, छाता एवं बरसाना, नगर पालिका, नगर पंचायत, पशु चिकित्साधिकारी, पशुधन प्रसार अधिकारी उपस्थित रहे।