गंगा में डुबकी लगाने और स्नान करते समय इन मंत्रों का करें उच्चारण

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मथुरा। आदिकाल में ब्रह्माजी ने सृष्टि की ’मूलप्रकृति’ से निवेदन किया कि हे पराशक्ति! आप संपूर्ण लोकों का आदि कारण बनें, मैं तुमसे ही संसार की सृष्टि आरंभ करूंगा। ब्रह्मा जी के निवेदन पर मूलप्रकृति- गायत्री, सरस्वती, लक्ष्मी, ब्रह्मविद्या उमा, शक्तिबीजा, तपस्विनी और धर्मद्रवा इन सात रूपों में अभिव्यक्त हुईं। इनमें सातवीं ’पराप्रकृति ’धर्मद्रवा’ को सभी धर्मों में प्रतिष्ठित देखकर ब्रह्मा जी ने उन्हें अपने कमंडल में धारण कर लिया।

इस तरह शिव की जटाओं में पहुंची गंगा
वामन अवतार में बलि के यज्ञ के समय जब भगवान श्रीविष्णु का एक चरण आकाश एवं ब्रह्माण्ड को भेदकर ब्रह्माजी के सामने स्थित हुआ। तब ब्रह्माजी ने अपने कमण्डल के जल से श्रीविष्णु के चरणों की पूजा की। पांव धुलते समय उस चरण का जल हेमकूट पर्वत पर गिरा। वहां से भगवान शंकर के पास पहुंचकर, वह जल गंगा के रूप मे उनकी जटा में स्थित हो गया।

पुरखों को तारने के लिए किया कठिन तप
सातवीं प्रकृति गंगा बहुत काल तक भगवान शंकर की जटा में ही भ्रमण करती रहीं। इसके बाद सूर्यवंशी राजा दिलीप के पुत्र भागीरथ ने अपने पूर्वज राजा सगर की दूसरी पत्नी सुमति के साठ हज़ार पुत्रों का विष्णु के अंशावतार कपिल मुनि के श्राप से उद्धार करने के लिए शंकर की घोर तपस्या की। तपस्या से प्रसन्न होकर शंकर ने गंगा को पृथ्वी पर उतारा।

’ज्येष्ठ मासे सिते पक्षे दशमी हस्तसंयुता। हरते दश पापानि तस्माद् दसहरा स्मृता।।

अर्थात् – ज्येष्ठ मास शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि बुधवार, हस्त नक्षत्र में दस प्रकार के पापों का नाश करने वाली गंगा का पृथ्वी पर आगमन हुआ। उस समय गंगा तीन धाराओं में प्रकट होकर तीनों लोकों में गयीं और संसार में त्रिसोता के नाम से विख्यात हुईं।

जानें कब गंगा लौट जाएंगी स्वर्ग लोक
शिव, ब्रह्मा और विष्णु के संयोग से पवित्र होकर त्रिभुवन को पावन करती हुई, समस्त पापों-दुखों और शोकों से मुक्त करती हुई गंगा वर्तमान 28वें चतुर्युगीय में कलियुग के प्रथम चरण के आरंभ होते ही कुछ सहस्त्र वर्षों बाद जब मां पृथ्वी के पाप का बोझ उठाना कठिन हो जाएगा। तब गंगा पृथ्वी लोक त्यागकर अपने लोक चली जाएंगी। पं. अजय कुमार तैलंग ने बताया कि दशहरा पर गंगा स्नान करना व्यक्ति को 10 पापों से मुक्ति दिलाता है। गंगा ध्यान एवं स्नान से प्राणी दस प्रकार के दोषों- काम, क्रोध, लोभ, मोह, मत्सर, ईर्ष्या, ब्रह्महत्या, छल, कपट, परनिंदा जैसे पापों से मुक्त हो जाता है। इतना ही नहीं अवैध संबंध, अकारण जीवों को कष्ट पहुंचाने, असत्य बोलने व धोखा देने से जो पाप लगता है, वह पाप भी गंगा ’दशहरा’ के दिन गंगा स्नान से धुल जाता है।

गंगा स्नान का महामंत्र
गंगा दशहरा के महापर्व पर भक्तों को स्नान करते समय मां गंगा का इस मंत्र के द्वारा ध्यान करना चाहिए।
’विष्णु पादार्घ्य सम्भूते गंगे त्रिपथगामिनी! धर्मद्रवीति विख्याते पापं मे हर जाह्नवी।’

गंगा में डुबकी लगाने का मंत्र
गंगा में डुबकी लगाते समय श्रीहरि द्वारा बताए गए इस सर्व पापहारी मंत्र को जपने से व्यक्ति को तत्क्षण लाभ मिलता है।
’ऊं नमो गंगायै विश्वरूपिण्यै नारायण्यै नमो नमः।