फर्जी शिक्षकों पर कार्यवाही में देरी से बीएसए पर उठे रहे सवाल

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मथुरा। लोकसभा चुनाव 2019 की मतगणना हो चुकी है। इसकी आदर्श चुनाव आचार संहिता भी हटाई जा चुकी है लेकिन चुनाव की आड़ लेकर फर्जी शिक्षकों पर कार्यवाही करने से बच रहे बीएसए से अभी तक चुनाव की खुमारी नहीं उतरी है। ऐसा लगता है कि बीएसए फर्जी शिक्षकों को बचाना चाहते हैं। संभवतः यही कारण है कि 30 जनवरी तक होने वाली कार्यवाही मई माह बीतने के बाद भी पूरी नहीं हो सकी है। इससे बीएसए की मंशा पर सवाल उठ रहे हैं।

प्रदेश में वर्ष 2004-2005 शैक्षिक सत्र के फर्जी बीएड प्रमाण पत्र लगाकर नौकरी करने की शिकायत के बाद एसआईटी ने मामले की जांच की थी। जांच में एसआईटी को प्रत्येक जनपद में फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी कर रहे शिक्षकों की जानकारी मिली। जांच पूरी होने के बाद ऐसे शिक्षकों की जनपदवार सूची तैयार कर सीडी के माध्यम से सभी बेसिक शिक्षा अधिकारियों को यह सूची मुहैया कराते हुए कार्यवाही की अपेक्षा की गई। सूत्रों के अनुसार मथुरा में बीएसए कार्यालय कर्मियों ने इस सूची में खेल करते हुए कुछ शिक्षकों के नाम सूची में से निकाल दिए और मात्र 54 शिक्षकों के नाम ही दिखाए गए। इनके खिलाफ नोटिस जारी किया गया और वेतन रोक दिया गया। आरोपी शिक्षक कोर्ट चले गए और वहां से वेतन जारी करने के आदेश करा लिए। कोर्ट ने वेतन जारी करने के साथ ही विभाग को कार्यवाही जारी रखने के भी आदेश दिए। इसी आदेश की आड़ में विभाग ने वेतन तो जारी कर दिया लेकिन विभागीय कार्यवाही को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। इसके बाद गत वर्ष 2018 के अंत में एक बार फिर बेसिक शिक्षा विभाग ने एसआईटी की नई सीडी मथुरा बेसिक शिक्षा अधिकारी को सौंपी। साथ ही 30 जनवरी तक कार्यवाही कर विभाग को आख्या सौंपने के आदेश दिए। इसके बाद भी बीएसए ने हीलाहवाली करते हुए प्रत्येक एबीएसए को सीडी ही फरवरी माह में उपलब्ध कराई। सीडी एबीएसए को देने के बाद मामले को लटकाया गया। फिर चुनाव आचार संहिता लागू हो गई तो चुनाव की आड़ में कार्यवाही रोकी गई। अब 30 जनवरी तो छोड़िए अब तो मई माह भी बीत चला लेकिन अभी तक बीएसए के पास प्रत्येक विकास खंड में कार्य कर रहे ऐसे शिक्षकों की सूची ही नहीं आ पाई है। बीएसए के अनुसार मथुरा के सिर्फ तीन ब्लॉक से ही शिक्षकों के नाम उनके पास तक आ पाए हैं। जबकि मथुरा में नगर क्षेत्र को मिलाकर 11 विकासखंड हैं।

आदर्श आचार संहिता हटने के बाद भी फर्जी शिक्षकों पर कार्यवाही करने से बच रहे बीएसए की मंशा पर अब सवाल उठने लगे हैं। सूत्रों की मानें तो विभाग के कुछ कर्मचारियों ने गुपचुप तरीकों से फर्जी शिक्षकों के नामों की जानकारी कर ली है और वह शिक्षकों से सेटिंग-गेटिंग कर उनका नाम सूची से निकलवाने अथवा उन पर कार्यवाही न होने की एवज में अवैध वसूली कर रहे हैं। इससे पहले से ही फर्जी शिक्षक घोटाले का कलंक झेल रहा बीएसए कार्यालय एक बार फिर विवादों में घिरता नजर आ रहा है। इस संबंध में बीएसए चंद्रशेखर से उनका पक्ष जानने के लिए फोन किया गया लेकिन उन्होंने फोन अटेंड नहीं किया। साथ ही उन्हें व्हाट्सएप पर भी मैसेज किया गया लेकिन समाचार लिखे जाने तक उनका कोई जवाब नहीं आ सका था।