अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों पर भारी पड़ रही शिक्षाधिकारियों की लापरवाह कार्यशैली

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मथुरा। जनपद के बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारी किस तरह शासन के आदेशों और उनकी मंशा की धज्जियां उड़ा रहे हैं। इसका जीता जागता उदाहरण वर्तमान में विभाग द्वारा चयनित अंग्रेजी माध्यम के विद्यालय बने हुए हैं। वर्तमान शैक्षिक सत्र में जहां मथुरा में अभी तक स्कूलों का ही चयन नहीं हो सका है। वहीं गत शैक्षिक सत्र में चयनित किए गए विद्यालयों में विभागीय अधिकारी अभी तक मानकों के अनुरुप शिक्षकों की पूर्ति नहीं कर सके हैं। जबकि अब तो सत्र भी बीत चुका है। ऐसे में अधिकारियों की लापरवाह कार्यशैली चर्चा का विषय बनी हुई है।


शासन ने कॉन्वेंट एवं पब्लिक स्कूलों को टक्कर देने के लिए अपने कुछ बेहतर परिषदीय स्कूलों को अंग्रेजी माध्यम के विद्यालयों में परिवर्तित कर उनमें अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई कराने का आदेश जारी किया था। इसके तहत गत शैक्षिक सत्र 2018-19 में मथुरा में 55 विद्यालयों को इंग्लिश मीडियम की शिक्षा देने के लिए चयन किया गया था। इन स्कूलों में आरटीई के मानकानुरुप 275 अंग्रेजी माध्यम के शिक्षकों का चयन किया जाना था। लेकिन 275 शिक्षकों के सापेक्ष मात्र लगभग 67 अध्यापकों की ही नियुक्ति की गई। विभाग द्वारा रिक्त 188 पदों पर अभी तक अंग्रेजी अध्यापकों की नवीन नियुक्ति नहीं हो सकी है और न ही अंग्रेजी माध्यम के विद्यालयों में तैनात हिंदी के अध्यापकों को अन्य हिंदी माध्यम स्कूलों में पदस्थापित किया गया है। इससे शासन एवं विभाग की छवि भी खराब हो रही है। यह काफी सोचनीय है कि शिक्षा अधिकारी पूरे शैक्षिक सत्र 2018-19 में इंग्लिश मीडियम के स्कूलों में निर्धारित संख्या के अनुरुप शिक्षकों की नियुक्ति नहीं कर सके। जबकि शासन इन अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों को कान्वेंट स्कूलों से टक्कर देने के लिए तैयार कर रहे हैं। ऐसे में जब उक्त विद्यालयों में निर्धारित शिक्षक ही मौजूद नहीं है तो पब्लिक स्कूलों को टक्कर देना तो दूर की बात है, पहले तो विभाग के सामने अंग्रेजी माध्यम के विद्यालयों में आरटीई मानकानुसार शिक्षकों की नियुक्ति सहित अन्य आवश्यक सुविधाएं मुहैया कराना ही चुनौती बना हुआ है।


इंग्लिश मीडियम स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए बनी चयन समिति के अध्यक्ष डायट प्राचार्य डॉ. मुकेश अग्रवाल ने बताया कि शिक्षकों के चयन के लिए बीएसए को कई बार निर्देशित किया गया है। हाल ही में अपै्रल माह में भी पत्रावलियों सहित तलब करते हुए उचित कार्यवाही के लिए पत्र लिखा था लेकिन बीएसए द्वारा आचार संहिता का हवाला दे दिया गया है। हालांकि डायट प्राचार्य ने स्वीकार किया कि आचार संहिता के दौरान भी शिक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया जारी रह सकती है। हां, परिणाम जारी करने के लिए आचार संहिता के खत्म होने का इंतजार किया जा सकता है।
देखना होगा कि बेसिक शिक्षा विभाग अपनी लापरवाह कार्यशैली में कब तक सुधार ला पाता है और अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों को सुचारु रुप से संचालित करने में सफल हो पाता है अथवा इंग्लिश मीडियम के स्कूलों में इसी तरह की लापरवाही होती रहेगी।