बिल न भरने पर निकाल ली मृतक की किडनी, आरोप पर मुकदमा दर्ज

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नई दिल्ली। आंध्र प्रदेश के नेल्लोर जिले में एक अस्पताल पर अंग दान के आरोप लगे हैं। प्रथमदृष्टया जांच में यह स्पष्ट भी हो गया है कि अस्पताल प्रबंधन ने अंगदान संबंधी नियमों का उल्लंघन किया है। आरोप लगाने वाले पीड़ित परिवार के अनुसार जब वह अस्पताल का बिल चुकाने में असमर्थ रहे तो उन्हें मृतक के अंगदान करने के लिए मजबूर किया गया। नेल्लोर जिले के उप्पिदीगुंटा गांव निवासी मजदूर इकोल्लु श्रीनिवास एक हादसे में घायल हो गए थे। उन्हें 18 अपै्रल की रात में करीब डेढ़ बजे सिम्हापुरी अस्पताल में भर्ती कराया गया। उन्हें दिमाग में गहरी चोट लगी थी।

अस्पताल का कहना है कि जब उन्हें भर्ती कराया गया तो वह ब्रेन डेड थे और उनके परिजनों ने अंगदान कर दिए। नियमों के तहत अंगदान की वजह आर्थिक नहीं होनी चाहिए। अंगों को न तो खरीदा जा सकता है और न ही बेचा जा सकता है। मृतक की पत्नी का आरोप है कि अस्पताल का बिल न चुका पाने के चलते उन्हें अंगदान के लिए सहमत होना पड़ा। परिवार का कहना है कि अस्पताल ने उन्हें 1 लाख 28 हजार रुपए का बिल थमा दिया था। जिसे चुकाने में वह असमर्थ थे। श्रीनिवास की पत्नी अरुणा के अनुसार जब उसने बिल चुकाने में असमर्थता जाहिर की तो अस्पताल ने उनसे अंगदान करने के लिए कहा। अरुणा का दावा है कि उन्होंने दिए गए सभी दस्तावेजों पर अस्पताल के कहने पर हस्ताक्षर कर दिए। बताया कि शुक्रवार की सुबह 18 अपै्रल को वह अस्पताल गई थी। वहां उनसे लगभग 1.28 लाख का बिल चुकाने के लिए कहा गया। जब उन्होंने कहा कि उनके पास इतने पैसे नहीं तो अस्पताल वालों ने कहा कि यदि बिल नहीं चुकाया तो हम मृतक की आंखे और किडनी रख लेंगे।

साथ ही कुछ कागज दे दिए और हस्ताक्षर करने के लिए कहा। उन्होंने मेरे पति को ले जाने से पहले एक बार उनका चेहरा मुझे दिखा। उनका मुंह खुला हुआ था और वह सांस ले रहे थे। पाइप लगे हुए थे। मैंने कोई पट्टी नहीं देखी थी। मैंने पूछा कि मैं उनसे बात कर सकती हूं तो अस्पताल वालों ने मना कर दिया और उन्हें ले गए। जब भर्ती कराया था तब हम लोग साथ नहीं थे अन्यथा ऐसा नहीं होता। हम दोनों ईंट भट्टा पर काम करते हैं। हमारे तीन बच्चे हैं अब मैं उन्हें कैसे पालूंगी।
शिकायत के बाद एक समिति का गठन किया गया है। समिति ने अपनी जांच में पाया है कि अस्पताल ने तय नियमों का पालन नहीं किया है। वहीं अस्पताल के मेडिकल निदेशक पवन कुमार रेड्डी ने आंध्र प्रदेश के प्रमुख सचिव के नाम एक पत्र लिखते हुए दोबारा समिति का गठन करके जांच करने की मांग की है। समिति में न्यूरोलॉजिस्ट, न्यूरो सर्जन, नेफा्रेलॉजिस्ट और जीवनदान ट्रस्ट के समन्वयक को रखने की मांग की गई है। जीवनदान एक सरकारी एजेंसी है जो कि आंध्र प्रदेश में अंगदान के मामले देखती है।
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि पहले जांच करने वाली समिति में अंगदान विशेषज्ञ नहीं थे। उनका यह भी कहना है कि श्रीनिवास का बिल मानवीय आधार पर माफ कर दिया गया था।
जिलाधिकारी के आदेश पर अस्पताल के खिलाफ पुलिस ने धोखाधड़ी की धारा 420 के अलावा धारा 384 के तहत मामला दर्ज कर लिया है। नेल्लोर के जिला स्वास्थ्य अधिकारी ने अस्पताल को नोटिस दिया है। वहीं अस्पताल प्रशासन ने जिला प्रशासन के नोटिस को हाईकोर्ट में चुनौती दी है।