बीएसए की कार्यप्रणाली फिर विवादों में, एक ही विद्यालय में बनाए दो प्रधानाध्यापक

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मथुरा। अक्सर विवादों में धिरे रहने के बाद भी बेसिक शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली सुधरने का नाम नहीं ले रही है। ऐसा ही एक नया मामला एक बार फिर सामने आया है। इसमें बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा एक ही प्राथमिक विद्यालय में दो शिक्षकों को प्रधानाध्यापक का चार्ज दे दिया है। इससे जहां दोनों ही शिक्षकों में विवाद उत्पन्न हो गया है। वहीं बेसिक शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्न चिन्ह लग गया है।
उपरोक्त मामला राया विकासखंड के प्राथमिक विद्यालय तैयापुर गांव का है। यहां तैनात प्रधानाध्यापिका मीना सागर को कुछ माह पूर्व गबन एवं अन्य अनियमितताओं का दोषी पाते हुए बीएसए द्वारा निलंबित कर दिया गया था। निलंबन के बाद प्राथमिक विद्यालय का समस्त चार्ज पूर्व माध्यमिक विद्यालय तैयापुर के प्रधानाध्यापक को दे दिया गया। राजनीतिक दबाव के चलते मार्च माह में 8 तारीख को मीना सागर को इसी विद्यालय में बहाल करते हुए प्रशासनिक चार्ज देने और वित्तीय चार्ज न देने के आदेश कर दिए गए। जबकि नियमानुसार इसी विद्यालय में बहाल नहीं किया जाना चाहिए था क्योंकि इस विद्यालय में रहकर वह जांच को प्रभावित करने के लिए साक्ष्यों से छेड़छाड़ भी कर सकती हैं। लेकिन फिर भी 8 मार्च को उन्हें बहाल तो किया ही गया साथ ही प्रशासनिक चार्ज देने के आदेश भी दिए गए।

वहीं दूसरी ओर इसी विद्यालय के एक जूनियर शिक्षक भानु रावत ने 6 मार्च को बीएसए कार्यालय में स्वयं को प्रधानाध्यापक का चार्ज देने के लिए आवेदन पत्र दिया। इस पत्र को बीएसए द्वारा राया विकासखंड के एबीएसए को अग्रसारित कर दिया गया। इसके बाद 14 मार्च को इसी शिक्षक को प्रधानाध्यापक पद का प्रशासनिक चार्ज दिए जाने के आदेश भी कर दिए गए। जबकि इससे पूर्व 8 मार्च को ही मीना सागर को भी हेडमास्टर का चार्ज लेने के आदेश किए गए थे। सूत्रों की मानें तो भानु रावत वर्ष 2004-05 फर्जी बीएड प्रकरण में सामने आए 54 शिक्षकों में से एक शिक्षक है। तो ऐसे में भानु रावत को वैसे भी चार्ज दिया जाना नैतिकता के दायरे में नहीं आता। ऐसे में बीएसए की कार्यप्रणाली को देखकर सभी सकते में हैं कि एक ही विद्यालय में बीएसए द्वारा मात्र 8 दिन के अंदर दो शिक्षकों को कैसे प्रधानाध्यापक का चार्ज दे दिया है। जबकि दोनों ही शिक्षकों पर विभिन्न गंभीर आरोप हैं।

बीएसए चंद्रशेखर से विषबाण ने इस संबंध में वार्ता की तो उन्होंने बताया कि इस संबंध में उन्हें जानकारी नहीं है कि एक ही विद्यालय के लिए दो शिक्षकों का प्रधानाध्यापक पद के लिए आदेश कैसे जारी हुआ है। यदि ऐसा है तो इस मामले को दिखवाया जाएगा और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की जाएगी। लेकिन यहां यह बात देखने वाली है कि दोनों ही आदेश पत्र स्वयं बीएसए के हस्ताक्षर के बाद ही जारी हुए हैं। ऐसे में बीएसए पर ही सवाल उठ रहे हैं। यहां गौर करने वाली बात यह भी है कि सूत्रों के अनुसार मीना सागर को जारी आदेश पत्र चुनावी आचार संहिता में जारी किया गया है लेकिन इसे बैक डेट में जारी कर दिया गया। इससे चुनावी आचार संहिता की कोई बाधा नहीं रही। देखने वाली बात होगी कि बीएसए स्वयं पर ही अथवा अन्य जिम्मेदारियों पर किस प्रकार की कार्यवाही करते हैं।