बिना जानकारी साझा किए हुआ है आनलाइन फ्राड, तो बैंक करेगी पैसा वापस

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नई दिल्ली। आपका एटीएम कार्ड आपकी जेब में रखा है। आपने इसका पिन नंबर भी किसी के साथ शेयर नहीं किया है। इसके बाद भी आपके बैंक खाते से रकम निकाल ली जाती है। तब आप सोचते होंगे कि यह कैसे संभव हुआ। जितनी तेजी से भारत में ऑनलाइन ट्रांजेक्शन बढ़ रहा है, उतनी ही तेजी के साथ तरह-तरह के ऑनलाइन फ्रॉड भी हो रहे हैं। इस तरह के घोटाले से बचने के लिए अलर्ट रहने की जरूरत है, आपका अलर्ट रहना ही बैंक से आपको आपकी रकम वापस दिला सकता है।


विष्णु चंदेल पेशे से एक सॉफ्टवेयर कंपनी में सेल्स हेड हैं। काम के दौरान अक्सर सफर पर रहते हैं तो अक्सर ऑनलाइन ट्रांजेक्शन ही करते हैं। मार्च में एक दिन विष्णु के बैंक खाते से दो बार में 48 हजार रुपये निकाल लिए गए। जबकि एटीएम कार्ड विष्णु के पास ही था और उन्होंने किसी भी व्यक्ति के साथ अपना पिन नंबर भी शेयर नहीं किया था। फ्रॉड होने के 2 घंटे बाद विष्णु को ये घटना पता चली। विष्णु ने तुरंत ही बैंक को इस बारे में सूचित किया। दूसरे दिन शहर वापस लौटने पर बैंक मैनेजर को एक प्रार्थना पत्र दिया। कुल मिलाकर 24 घंटे के भीतर ही विष्णु ने अपनी जिम्मेदारी पूरी कर ली। जबकि कोई और होता तो ये सोचकर हाथ पर हाथ धरे बैठा रहता कि अब जो होना था सो हो गया।


अब आगे की जांच बैंक को करनी थी। 5 दिन बाद विष्णु को मालूम हुआ कि बैंक के सॉफ्टवेयर की लापरवाही के चलते उनका खाता हैक हो गया था। अब चूंकि ये बैंक की लापरवाही थी। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की गाइड लाइन के अनुसार तीन दिन से पहले-पहले विष्णु ने बैंक को सूचित कर दिया था तो पैसा वापस मिल गया।
इस बारे में बैंक मैनेजर नवीन कुमार बताते हैं, “जिस फ्रॉड में ग्राहक की लापरवाही होती है। ग्राहक पिन नंबर या कार्ड के पीछे लिखे तीन अंक के सीवीवी नम्बर को किसी के साथ साझा कर लेता है या उसके कार्ड का क्लोन बन जाता है तो ये ग्राहक की गलती मानी जाती है।
कार्ड, पिन और सीवीवी नंबर के बिना जो फ्रॉड होता है तो ऐसे केस में बैंक की जिम्मेदारी होती है और वो ग्राहक को 10 दिन के भीतर रुपये वापस करेगा, लेकिन शर्त वही है कि आपको 3 दिन में शिकायत दर्ज करानी होगी। शिकायज दर्ज कराने में आप जितनी देर करेंगे। मुआवजे की रकम उतनी ही कम होती जाएगी। अगर आप 4 से 7 दिन में शिकायत दर्ज कराते हैं कि आपके दावे की रकम आधी रह जाएगी।