लोकसभा चुनाव में दांव पर ’चाणक्य‘ की प्रतिष्ठा!

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मथुरा। जिले की राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले मांट विधायक पं. श्यामसुंदर शर्मा की प्रतिष्ठा लोकसभा चुनाव में दांव पर लगी है। गठबंधन प्रत्याशी को मांट विधानसभा से बढ़त दिलाने के प्रयासों में वह कितने सफल हो सके हैं यह तो 23 मई को मतगणना वाले दिन ही पता लग सकेगा लेकिन फिलहाल मतदाताओं के रुझान की मानें तो इस बार उनके क्षेत्र के मतदाताओं ने गठबंधन प्रत्याशी को वोट देने की उनकी अपील को नकार दिया है।
मांट विधानसभा से वर्ष 1989 से वर्ष 2017 तक सोलहवें विधानसभा चुनाव तक पं. श्यामसुंदर शर्मा लगातार विधायक रहे हैं। हालांकि इस दौरान उन्हें सिर्फ एक बार वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में रालोद के उपाध्यक्ष जयंत चौधरी ने हराया था लेकिन जयंत चौधरी ने सांसद होने के चलते सीट छोड़ दी और उपचुनाव में पं. श्यामसुंदर शर्मा रालोद के योगेश नौहवार को हराकर फिर से विधायक बने।

वर्ष 2017 में मोदी लहर में भी वह अपनी मांट सीट बचाने में कामयाब रहे और भाजपा प्रत्याशी यहां से तीसरे नंबर पर रहा था। हालांकि वर्ष 2017 के चुनाव में उन्हें रालोद से नजदीकी टक्कर मिली थी जब वह बमुश्किल 432 वोटों से ही जीत हासिल कर पाए थे। इसके अलावा वर्ष 1989 के विधानसभा चुनाव के बाद से मांट विधानसभा में कोई भी प्रतिद्वंदी उनके सामने टिक नहीं सका है। यहां तक कि राम मंदिर आंदोलन लहर के दौरान वर्ष 1991 में भाजपा प्रत्याशी रुप सिंह को 20921 और वर्ष 1993 में भाजपा प्रत्याशी पद्मसिंह शर्मा को 16942 वोट ही मिल सके और पं. श्यामसुंदर शर्मा दोनों ही चुनावों को बड़े अंतर से जीतकर विधायक बने। वर्ष 1989 में विधायक बनने के बाद उन्होंने जनपद की राजनीति में धीरे-धीरे अपना दबदबा बनाना आरंभ किया और जनपद की लगभग सभी विधानसभाओं में उन्होंने अपनी जमीन मजबूत करते हुए समर्थक बनाए। इसी पकड़ के चलते एक बार जो जनपद में जिला पंचायत, सहकारी बैंक और डीसीएफ के चुनावों में उनकी तूती बोलने का सिलसिला शुरु रहा। वह लंबे समय तक चला। जिला पंचायत अध्यक्ष, कॉपरेटिव चेयरमैन और डीसीएफ अध्यक्ष पदों पर उनके ही समर्थकों का कब्जा रहा है। यही कारण है कि वर्तमान लोकसभा चुनाव 2019 में गठबंधन प्रत्याशी मांट विधानसभा से अपने को जीता हुआ मानकर चल रहे हैं। क्योंकि उन्हें लग रहा है कि मांट विधानसभा के मतदाताओं ने विधायक श्यामसुंदर शर्मा का समर्थन किया है।

वहीं मतदाताओं के रुझान की मानें तो यह समर्थन काफी कम मिला है। मांट विधानसभा से भाजपा प्रत्याशी हेमामालिनी के ही आगे रहने के कयास लगाए जा रहे हैं। इस स्थिति में यदि यह कयास चुनाव परिणाम वाले दिन सटीक बैठते हैं तो पं. श्यामसुंदर शर्मा का राजनीतिक कैरियर भी खतरे में पड़ सकता है। इसका कारण है कि वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में जहां उन्हें रालोद के प्रत्याशी योगेश नौहवार से बमुश्किल जीत मिली। वहीं जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में भी उन्हें भाजपा और रालोद की जुगलबंदी के सामने हार माननी पड़ी। यह देखना होगा कि लोकसभा चुनाव 2019 में मांट विधानसभा से पं. श्यामसुंदर का राजनीतिक चातुर्य कितना रंग लाएगा।


प. श्यामसुंदर शर्मा ने विषबाण को वार्ता के दौरान बताया कि मांट विधानसभा से गठबंधन प्रत्याशी कुंवर नरेंद्र सिंह को जीत मिलेगी। ब्राहमण समाज के साथ साथ अन्य जातियों के उनके समर्थकों ने गठबंधन को खुलकर वोट किया है। टैंटीगांव, रान्हेरा, नौहझील, बाजना, शेरगढ़, पब्बीपुर, चिंडौली, ईखू, बसंतगढ़ी, अहमदपुर, सकतपुर आदि ब्राहमण बाहुल्य गांवों में मुझे कम वोट मिला था लेकिन इस बार ब्राहमण समाज ने गठबंधन को अच्छी संख्या में वोट दिया है। मांट विधानसभा से गठबंधन प्रत्याशी अच्छे मतों से चुनाव जीत रहे हैं। उन्होंने कहा कि गठबंधन प्रत्याशी मांट विधानसभा के साथ-साथ बलदेव और गोवर्धन विधानसभा में भाजपा प्रत्याशी से काफी आगे हैं। मथुरा और छाता विधानसभा क्षेत्र में भी भाजपा प्रत्याशी को कड़ी टक्कर मिल रही है। हालांकि वह यह भी स्वीकारते हैं कि रालोद की तरफ ब्राहमण समाज को मोड़ने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा है।