नकली घी, पनीर निर्माण का केंद्र बना कस्बा बाजना

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मथुरा। सावधान! यदि आप बाजार में खुलेआम बिक रहे दूध, खोआ, पनीर और देशी घी खरीद कर खा रहे हैं तो सतर्क हो जाइए। बाजार में बिकने वाले दूध से बने खाद्य पदार्थ केमिकल सहित अन्य जहरीली वस्तुओं से बनाए जा रहे हैं। इससे आम जनता गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रही है। डेयरी माफिया खाद्य विभाग के अधिकारियों एवं पुलिस प्रशासन के संरक्षण में नकली एवं सिथेंटिक दूध, मावा, देशी घी, पनीर और दही की धड़ल्ले से बिक्री कर रहे हैं। जनपद में बाजना के साथ अन्य कस्बों में भी यह कारोबार खुलेआम चल रहा है।

बाजना क्षेत्र में कढ़ाई में पाउडर मिलाकर मावा तैयार करता माफिया (फाइल फोटो विषबाण)

कहा जाता है कि कान्हा की नगरी बृज में कभी दूध-दही की नदियां बहती थीं। वहीं अब डेयरी माफिया नकली मिलावटी दूध और इससे बने खाद्य पदार्थां की खुलेआम बिक्री कर रहे हैं। मथुरा जनपद में कस्बा बाजना पनीर की मंडी माना जाता है। यहां बड़ी-छोटी कुल मिलाकर करीब 40 डेयरियां हैं। डेयरी की आड़ में धड़ल्ले से नकली खाद्य पदार्थां का निर्माण कर अन्य जनपदों की बड़ी मंडियों में भेजकर लाखों-करोड़ों के वारे न्यारे किए जा रहे हैं। गर्मियां आते ही नकली दूध और खाद्य पदार्थां का कारोबार बुलंदियों पर पहुंच जाता है। क्योंकि गर्मियों में दूध और इससे बने खाद्य पदार्थां की डिमांट काफी बढ़ जाती है। ‘विषबाण‘ टीम द्वारा कई दिनों तक इस कारोबार की जांच की गई। पड़ताल में जानकारी मिली कि मिलावटखोर माफिया खाद्य अधिकारियों की मिलीभगत से बेखौफ कारोबार कर रहे हैं। बाजना, नौहझील एवं आसपास के क्षेत्र में संचालित हो रही डेयरियों पर पनीर बनाने के लिए दूध के स्थान पर केमिकल और पाउडर आदि का प्रयोग कर रहे हैं। दिन छिपते ही यह पनीर बंद गाड़ियों में भरकर दिल्ली-नोएडा की मंडियों में भेज दिया जाता है। इसके साथ ही अन्य छोटे डेयरी संचालक मथुरा, हाथरस, अलीगढ़ सहित अन्य जनपदों की मंडियों में भी इस पनीर की सप्लाई करते हैं।

बाजना क्षेत्र में पाउडर में पानी मिलाकर पनीर का घोल तैयार करता माफिया (फाइल फोटो विषबाण)

सूत्रों के अनुसार नकली दूध बनाने के लिए यूरिया, सतरीठा, रिफाइंड और कास्टिक सोडा का उपयोग किया जाता है। इसी मिलावटी जहरीले दूध की दूधियों द्वारा सप्लाई बाजार में दुकानों और घर-घर जाकर की जाती है। विषबाण की टीम की जांच में पता लगा कि नकली दूध और मावा की बड़ी मंडी राया क्षेत्र में है। गांव कारब, हवेली, खिरारी, मदैम, जैसवां आदि गांव में मिलावटी खाद्य वस्तुओं का निर्माण बडे़ पैमाने पर किया जा रहा है। नकली मावा बनाने का काम कर रहे एक व्यक्ति ने बताया कि मावा बनाने के लिए अलग-अलग कंपनियां के पाउडर दिल्ली आदि जनपदों से आते हैं। इनमें माधव, धौलपुर फ्रेश एवं अंजनि ब्रांड का पाउडर प्रमुख तौर पर प्रयोग किए जाते हैं। इनकी 25 किग्रा पैकेट की कीमत करीब 6000 रुपए आती है। इसमें एक किग्रा पाउडर से दो किग्रा नकली मावा तैयार कर लिया जाता है। इसमें चिकनाई लाने के लिए 5 किग्रा मावा में 1 लीटर रिफाइंड तेल का उपयोग किया जाता है। इसमें 1 किग्रा मावा की कीमत लगभग 125-130 रुपए आती है। इसकी बिक्री 160-180 रुपए प्रति किग्रा की दर से बाजार में हो जाती है।

इसी तरह नकली घी बनाने के लिए रिफाइंड तेल, एसेंस सहित अन्य कई प्रकार की जहरीली वस्तुओं का उपयोग किया जाता है। इसकी लागत करीब 125-150 रुपए प्रति किग्रा आती है जबकि बाजार में 300 से 350 रुपए प्रति किग्रा आसानी से बिक जाता है। नकली मावा और घी की सप्लाई मथुरा के बाजार के साथ-साथ दिल्ली, आगरा, नोएडा, गाजियाबाद, भरतपुर, वृंदावन, अलीगढ़, हाथरस के बाजार में की जाती है। इसका प्रयोग अधिकांशत मिठाई बनाने के लिए किया जाता है। त्यौहारों पर बडे़ पैमाने पर मिठाई का निर्माण किया जाता है क्यों कि इस दौरान मिठाई की मांग काफी बढ़ जाती है। ऐसे में आसानी से नकली मावा, घी, पनीर और दूध खपा दिया जाता है। मथुरा में ही रक्षाबंधन पर सैकड़ों टन मावा का उपयोग घेवर बनाने में किया जाता है। वहीं दिवाली पर भी मिठाई बनाने के लिए मिलावटी दूध, मावा, घी, पनीर का उपयोग धड़ल्ले से किया जाता है। गोवर्धन में तो दुकानों पर खुलेआम सिथेंटिक दूध की बिक्री की जाती है। यही दूध भक्तों को बेचा जाता है और फिर यही दूध श्री गिरिराज महाराज पर चढ़ाया जाता है। जनपद के फरह, नंदगांव, छाता, गोवर्धन, बलदेव आदि कस्बों में भी नकली दूध और इससे बनने वाले खाद्य पदार्थां का निर्माण बेखौफ किया जाता है। जांच में यह भी सामने आया कि डेयरी संचालक बेखौफ होकर इसलिए अपना कारोबार संचालित करते हैं क्यों कि पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों के साथ-साथ उनकी मिलीभगत खाद्य अधिकारियों के साथ भी रहती है।विषबाण की टीम ने इस संबंध में पहले भी खबर प्रकाशित की थी। इसके बाद हरकत में आई खाद्य विभाग की टीम ने मांट क्षेत्र में कार्यवाही करते हुए सैंपलिंग की थी। सैंपलिंग में चार सैंपल फेल भी आए हैं। इससे पुष्टि होती है कि क्षेत्र में नकली घी, मावा, पनीर का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है।  मुख्य अभिहीत अधिकारी चंदन पांडेय से विषबाण ने बात करने का प्रयास किया लेकिन उनका फोन अटेंड नहीं हो सका।
मांट क्षेत्र के खाद्य सुरक्षा अधिकारी मुकेश सिंह ने ‘विषबाण’ को बताया कि समय समय पर डेयरी संचालकों पर कार्यवाही होती रहती है। नकली और मिलावटी खाद्य पदार्थां की बिक्री रोकने के लिए विभाग द्वारा सैंपलिंग की जाती है। मार्च माह में ही विभाग द्वारा क्षेत्र में चार सैंपल लिए गए थे। जो कि फेल आए हैं। अब इन पर न्यायालय द्वारा कार्यवाही की जाएगी। जब उनसे सैंपल फेल वाली डेयरियों के नाम पूछने का प्रयास किया गया तो उन्होंने गोपनीयता का हवाला देते हुए नाम बताने से इंकार कर दिया।

करोड़ों की संपत्तियों के मालिक बने नकली दूध का कारोबार करने वाले
कस्बा बाजना में ही कई ऐसे डेयरी संचालक हैं जो कि देखते-देखते ही नकली पनीर का कारोबार करोड़ों की संपत्तियों के मालिक बन गए हैं। जबकि एक समय इनके पास कुछ भी नहीं था। मथुरा के साथ नोएडा, अलीगढ़, दिल्ली, गाजियाबाद, फरीदाबाद सहित अन्य जनपदों में भी इनकी करोड़ों की कोठियां हैं तो इनके पास महंगी लग्जरी कारें भी हैं। इनकी दबंगई भी क्षेत्र में जगजाहिर है। इनके कारोबार में बाधा बनने वाले व्यक्तियों को यह हर तरीके से शांत करने का प्रयास करते हैं। इसके लिए साम, दाम, दंड, भेद का प्रयोग किया जाता है। यह पुलिस कार्यवाही के दौरान पुलिस पर भी हमला करने से नहीं चूकते हैं। बताया जाता है कि कुछ समय पूर्व क्षेत्राधिकारी मांट द्वारा वाहन चेकिंग की जा रही थी। इसी दौरान एक गाड़ी को चेकिंग के लिए रुकवाया। इसमें नकली पनीर भरा हुआ था। जब उन्होंने अधिक पूछताछ की तो दबंग डेयरी संचालकों ने उनके साथ अभद्रता कर दी थी और चेतावनी देते हुए उनकी पिस्टल लेकर अपने साथ ले गए थे। बाद में राजनीतिक दबाव में मामला सुलझाया गया और दबंग डेयरी संचालकों पर कोई कार्यवाही नहीं हुई। इससे इनके हौसले और बुलंद हो गए हैं। बताते हैं कि पनीर की गाड़ियां जब रात में दिल्ली सहित अन्य जनपदों की मंडियों के लिए निकलती हैं तो इस गाड़ी के पीछे एक-दो गाड़ियां भी इसकी सुरक्षा के लिए साथ जाती हैं। इन गाड़ियों में हथियारबंद युवक रहते हैं।