लोकसभा चुनावः दांव पर रालोद की प्रतिष्ठा

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मथुरा। कभी मथुरा की राजनीति में अपना दखल रखने वाली राष्ट्रीय लोकदल अब यहां अपनी जमीन तलाश रही है। किसी न किसी विधानसभा सीट पर अपना कब्जा रखने वाली रालोद का जिला पंचायत की राजनीति में भी दबदबा रहा है। वर्ष 2009 में एक बार मथुरा में रालोद से सांसद रहा। लेकिन वर्तमान में मथुरा में एक भी विधायक नहीं है। अब लोकसभा चुनाव में पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की मिनी बागपत ‘मथुरा’ में एक बार फिर रालोद की प्रतिष्ठा दांव पर है।


लोकसभा चुनाव 2019 के चुनाव में उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय लोकदल ने समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के साथ गठबंधन किया है। गठबंधन के तहत रालोद को प्रदेश में 3 सीटें मिली हैं। इनमें से बागपत से जयंत चौधरी, मुजफ्फरनगर से अजित सिंह चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं मथुरा सीट भी रालोद के खाते में आई है। यहां से ठा. कुंवर नरेंद्र सिंह को लोकसभा प्रत्याशी बनाया गया है। बीते कई दशकों में जाटलैंड मथुरा की राजनीति में रालोद का दबदबा रहा है। यहां गोवर्धन विधानसभा से 2007 में रालोद से पूरन प्रकाश विधायक रहे। उन्होंने बसपा से चुनाव लड़े अजय पोईया को हराया था। वर्ष 2012 में रालोद से चुनाव लड़े ठाकुर मेघश्याम सिंह दूसरे नंबर पर रहे। वहीं 2017 में कुंवर नरेंद्र सिंह तीसरे नंबर पर रहे।
छाता विधानसभा में ठाकुर तेजपाल सिंह वर्ष 2012 में रालोद से विधायक रहे। उन्होंने बसपा के लक्ष्मीनारायन चौधरी को हराया। वर्ष 2002 में भी ठाकुर तेजपाल सिंह ने बसपा के ही चौधरी लक्ष्मीनारायन को हराया और विधायक बने। वर्ष 1993 में तेजपाल सिंह जनता दल से विधायक रहे। वर्ष 85 में चौधरी लक्ष्मीनारायन लोकदल से विधायक बने थे। वर्ष 2007 के विधानसभा चुनाव में रालोद से तेजपाल सिंह दूसरे नंबर पर रहे।


बलदेव विधानसभा से वर्ष 2012 में पूरन प्रकाश रालोद के विधायक बने। वर्ष 2007 में रालोद के नवाब सिंह बसपा के राजकुमार रावत से चुनाव हार गए लेकिन वर्ष 2002 में रालोद के प्रेम सिंह दरोगा ने राजकुमार रावत को हराकर चुनाव जीता। 1991 में जनता दल से नवाब सिंह विधायक बने। वर्ष 1989 में सरदार सिंह ने कांग्रेस के आदित्य को चुनाव हराया और विधायक बने। लोकदल से वर्ष 1985 में सरदार सिंह चुनाव जीतकर विधायक बने।
इसी तरह मथुरा की जिला पंचायत की राजनीति में भी राष्ट्रीय लोकदल का दबदबा रहा है। कभी अकेले तो कभी गठबंधन से जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर रालोद का कब्जा काफी समय तक रहा है। तो कभी गठबंधन धर्म निभाते हुए दूसरी पार्टी के नेता को भी अध्यक्ष की कुर्सी सौंपी है। रालोद से अनूप चौधरी, चेतन मलिक भी जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुके हैं। वर्ष 2015 में हुए चुनाव में ही मथुरा जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर भाजपा के उम्मीदवार सुधा चौधरी को बिठाया। यह पहली बार था कि भाजपा पार्टी का पहली बार जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर परचम लहराया। पर वर्तमान में रालोद मथुरा की जमीन पर सिसकती नजर आ रही है। वर्तमान में न तो मथुरा की किसी विधानसभा सीट पर रालोद का कोई विधायक है और न ही जिला पंचायत अध्यक्ष कुर्सी पर उसका नेता है। देखना होगा कि क्या रालोद से चुनाव लड़ रहे कुंवर नरेंद्र सिंह के माध्यम से सपा और बसपा के मतदाताओं के सहारे रालोद की इस बार नैया पार हो सकी अथवा नहीं।