आखिर दिग्गज नेताओं ने इस बार मथुरा से क्यों किया किनारा…

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मथुरा। लोकसभा चुनाव 2019 में जनपद में प्रत्याशियों के पक्ष में सभा, रैली एवं रोड करने के लिए स्टार प्रचारकों का अभाव रहा। भाजपा, कांग्रेस, सपा और बसपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष सहित अन्य कई बड़े नेताओं को अपने पक्ष में प्रचार कराने की बाट जोह रहे प्रत्याशियों के अरमानों पर पानी फिर गया। गत करीब दो दशक में यह पहली बार है कि भाजपा, कांग्रेस और रालोद के साथ गठबंधन में शामिल सपा और बसपा के भी स्टार प्रचारकों ने मथुरा से दूरी बनाए रखी है। मथुरा लोकसभा सीट पर अधिकांशतः भाजपा का ही कब्जा रहा है। वहीं दूसरे नंबर पर कांग्रेस रही है। लेकिन दोनों ही पार्टियों के साथ क्षेत्रीय पार्टियांं ने भी मथुरा लोकसभा सीट पर अपना कब्जा बनाए रखने के लिए हरसंभव प्रयास किए हैं और स्टार प्रचारकों का जमावड़ा हमेशा से लगभग हर चुनावों में लगता रहा है। जबकि इस बार किसी भी पार्टी के प्रत्याशी के लिए स्टार प्रचारकों का प्रचार न करना यहां मतदाताओं के बीच भी चर्चा का विषय बना हुआ है। इस बार मथुरा के मतदाताओं को उड़नखटोला भी देखने को नहीं मिला है। जबकि पहले हर चुनाव में मथुरा में आए दिन स्टार प्रचारकों के हैलीकॉप्टर आसमान पर मंडराते हुए नजर आते थे। इससे भी इस बार कार्यकर्ता और मतदाता मायूस दिखाई दिए हैं।


गत चुनावों में भाजपा की ओर से भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी, केंद्रीय मंत्री उमा भारती, साक्षी महाराज, कल्याण सिंह, लालजी टंडन, कलराज मिश्र चुनाव प्रचार कर चुके हैं और यदि थोड़ा पीछे जाएं तो प्रधानमंत्री रहे स्व. अटलबिहारी वाजपेयी भी मथुरा में सभा संबोधित कर चुके हैं। यहां तक कि योग गुरु बाबा रामदेव भी मथुरा में भाजपा के लिए चुनाव प्रचार कर चुके हैं लेकिन इस बार सिर्फ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय राजनाथ सिंह का ही सहारा भाजपा प्रत्याशी हेमामालिनी को मिल सका है। संभवतः यही कारण रहा कि वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में दूरी बनाने वाले हेमामालिनी के पति धर्मेंद्र को इस बार चुनावी मैदान में आकर हेमामालिनी के पक्ष में चुनाव प्रचार करना पड़ा। बीजेपी की सिर्फ पांच सभाएं ही आयोजित हो सकी हैं। इनमें से तीन सभा बालीवुड हीरो और हेमामालिनी के पति धर्मेंद्र, एक केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह और एक सभा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की हुई है। मुख्य चुनाव अभिकर्ता एवं पूर्व जिलाध्यक्ष पद्मसिंह शर्मा का कहना है कि हेमामालिनी स्वयं ही एक सेलेब्रिटी हैं। हेमामालिनी की स्वयं की सभाओं में ही काफी भीड़ उमड़ रही है। मथुरा के मतदाता उन्हें हाथों हाथ ले रहे हैं। लोग पीएम मोदी के नाम और हेमामालिनी के काम को देखकर ही काफी प्रसन्न हैं। इनके लिए किसी बड़े स्टार द्वारा प्रचार करना कोई अधिक आवश्यक नहीं है।


कांग्रेस की ओर से वर्तमान में राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी, जितिन प्रसाद, ज्योतिरादित्य सिंधिया, हरियाणा के दीपेंद्र सिंह हुड्डा, शीला दीक्षित, रीता बहुगुणा, अशोक गहलोत, आरपीएन सिंह, सलमान खुर्शीद सहित अन्य कई बड़े नेता अपने प्रत्याशियों के पक्ष में मतदाताओं को लुभाने का प्रयास कर चुके हैं। वहीं पुराने समय में स्व. वीपी सिंह, स्व. माधवराव सिंधिया, स्व. इंदिरा गांधी, स्व. एनडी तिवारी, सोनिया गांधी सहित कई अन्य नेता भी चुनाव प्रचार कर चुके हैं। हालांकि ज्योतिरादित्य सिंधिया गत दिवस मथुरा में कांग्रेस प्रत्याशी के पक्ष में रोड शो कर चुके हैं।
बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष और स्टार प्रचारक मायावती, नसीमुद्दीन सिद्दीकी, रामवीर उपाध्याय, सतीश मिश्र सहित कई अन्य नेता प्रचार कर चुके हैं लेकिन इस बार गठबंधन धर्म निभाने के लिए बसपा नेताओं ने कोई जहमत नहीं उठाई है। जबकि स्थानीय नेता और गठबंधन प्रत्याशी कयास लगा रहे थे कि संभवतः मायावती उनके पक्ष में प्रचार करने के लिए आ सकती हैं लेकिन ऐसा संभव नहीं हो सका। पुराने समय को देखें तो बसपा के शुरुआती दौर में कांशीराम भी यहां चुनाव प्रचार में आ चुके हैं।
समाजवादी पार्टी को देखें तो यहां पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव, पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, शिवपाल यादव, रामगोपाल यादव, संजय लाठर, उदयवीर सिंह, आजम खां सहित कई अन्य नेताओं ने अपनी पार्टी को जिताने के लिए काफी प्रयास किए। खूब चुनाव प्रचार किया। हालांकि मथुरा की किसी भी विधानसभा से इस पार्टी का कोई विधायक नहीं रहा है।


हालांकि इस सब में राष्ट्रीय लोकदल के नेता मथुरा सीट जीतने के लिए काफी प्रयास कर रहे हैं। रालोद को गठबंधन के तहत तीन ही सीट मिली हैं। इनमें से एक सीट मथुरा भी शामिल है। तीन दलों के गठबंधन में शामिल रालोद का चुनाव प्रचार सिर्फ तीन नेताओं तक ही सीमित रह गया है। छोटे चौधरी अजित सिंह, जयंत चौधरी और चारु चौधरी। यहां से कुंवर नरेंद्र सिंह को रालोद ने प्रत्याशी बनाया है। रालोद के पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह ने तो मथुरा को भी अपनी कर्मभूमि माना था। वह मथुरा को मिनी बागपत मानते थे और यहां लोकसभा सीट पर जीतने के लिए काफी प्रयास भी किए लेकिन उनके सामने पूरा नहीं हो सका। हालांकि उनका यह सपना उनके पौत्र जयंत चौधरी ने वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव को जीतकर पूरा किया। रालोद के मुखिया छोटे चौधरी अजित सिंह, उनके पुत्र जयंत चौधरी और पुत्रवधू चारु चौधरी अपने गठबंधन प्रत्याशी कुंवर नरेंद्र सिंह को यहां से जिताने के लिए काफी प्रयास कर रहे हैं।