गैंगस्टर एक्ट में गिरफ्तार हुए फर्जी शिक्षक घोटाले के मुख्य आरोपी

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मथुरा। बेसिक शिक्षा विभाग के फर्जी शिक्षक घोटाले का जिन्न एक बार फिर गुरुवार को बाहर आ गया। पुलिस ने रात्रि में ताबड़तोड़ छापे मारते हुए घोटाले के मुख्य आरोपियां को गिरफ्तार कर लिया। पांच आरोपियों की गिरफ्तारी होते ही बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों एवं शिक्षकों में हड़कंप मच गया। दिन भर पुलिस की इस कार्यवाही की चर्चा होती रही। साथ ही शिक्षकों के साथ अन्य भी यह जानने के लिए उत्सुक रहे कि पुलिस ने किन-किन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
वर्ष 2018 में शिकायतकर्ता की शिकायत पर हुई जांच के बाद मथुरा बेसिक शिक्षा विभाग में एक बड़ा फर्जी शिक्षक घोटाला सामने आया था। इस प्रकरण में एसटीएफ ने कार्यवाही करते हुए मास्टरमाइंड सहित अन्य कई आरोपियों को गिरफ्तार भी किया था। इसके बाद कुछ आरोपी हाल ही में जमानत पर बाहर आए थे। इसके बाद एक मास्टरमाइंड ने विभाग पर अपनी बहाली का दबाव बनाते हुए शिकायतें भी शुरु कर दी थीं। जबकि अन्य आरोपी भी अपनी बहाली के प्रयास में जुटे थे। तभी अचानक बुधवार को देर रात्रि में पुलिस ने जमानत पर बाहर आए सभी आरोपियों के घरों पर दबिश दी। इनमें से 5 आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार भी कर लिया। जबकि दो मुख्य आरोपी घर पर नहीं मिले तो उन पर दबाव बनाने के लिए उनके परिजनों को पकड़ लिया गया। गिरफ्तार आरोपियों में राजवीर गुर्जर, भूपेंद्र कुमार, मनोज कुमार, मोहित भारद्वाज और राधाकृष्ण शामिल हैं। वहीं पुलिस सूत्रों की मानें तो आलोक उपाध्याय और श्यामवीर के परिजन अभी हिरासत में हैं। ताकि उक्त दोनों आरोपियों पर दबाव बनाकर उन्हें भी गिरफ्तार किया जा सके। पुलिस कार्यवाही से विभाग में खलबली मच गई है। एक बार फिर फर्जी शिक्षक घोटाले की चर्चा लोगों की जुबां पर आ गई है। थाना प्रभारी कोतवाली केके तिवारी ने बताया कि पुलिस ने यह कार्यवाही गैंगस्टर एक्ट में की है। ताकि इनके अपराधों पर अंकुश रखा जा सके। लोकसभा चुनाव को शांतिपूर्ण संपन्न कराने के लिए अपराधियों को पकड़ने के अभियान के तहत ही उक्त कार्यवाही की गई है।

फर्जी शिक्षकों को बचाने में जुटे शिक्षा अधिकारी
मथुरा। जहां एक ओर एसटीएफ और पुलिस द्वारा 29 हजार और 12460 शिक्षक भर्ती में हुए फर्जी शिक्षक घोटाले में लगातार कार्यवाही की जा रही है। इसके मास्टरमाइंड सहित अन्य कई आरोपी जेल में हैं। वहीं वर्ष 2004-2005 बीएड प्रकरण में फर्जी पाए गए शिक्षकों को शिक्षा अधिकारी अधीनस्थों की मिलीभगत से ऐसे फर्जी शिक्षकों को बचाने की जुगत में लगे हैं। एसआईटी द्वारा इस मामले में फिर से जांच करने के लिए फर्जी शिक्षकों की सूची तैयार कर एक सीडी में मथुरा बीएसए को दी गई थी। ताकि इस सूची के आधार पर प्रत्येक विकास खंड में कार्यरत शिक्षकों की सूची का मिलान कर फर्जी शिक्षकों को छांटा जा सके और उन पर उचित कार्यवाही हो सके। ऐसे शिक्षकों की सूची तैयार कर उन पर की गई कार्यवाही की आख्या बीएसए को 30 जनवरी तक शासन को उपलब्ध करानी थी, लेकिन बीएसए द्वारा इस मामले में कोई कदम नहीं उठाया गया। जब स्थानीय मीडिया द्वारा दबाव बनाया गया तो सीडी की कई कॉपी कर खंड शिक्षा अधिकारियां को सीडी उपलब्ध करा दी गईं लेकिन इस सीडी का क्या करना है, किस तरह सूची का मिलान करना है, सूची तैयार कर बीएसए ऑफिस को देनी है अथवा कार्यवाही करनी है, जैसे कोई आदेश किसी भी खंड शिक्षा अधिकारी को लिखित में नहीं दिए गए। इससे एबीएसए भी उन सीडी को अपने पास रखकर चुप बैठ गए। अपै्रल का आधा माह बीत जाने के बाद भी इस मामले में कोई कार्यवाही न होना फर्जी शिक्षकों और शिक्षा अधिकारियों की मिलीभगत का स्पष्ट इशारा कर रहा है। बीएसए चंद्रशेखर ने बताया कि इस मामले की जांच चल रही है। 3 एबीएसए द्वारा फर्जी शिक्षकों की सूची भी कार्यालय को सौंपी गई है। वहीं उन्होंने यह भी कहा कि अभी तक डॉ. बीआर अंबेडकर विश्वविद्यालय द्वारा भी ऐसे शिक्षकों का सत्यापन कर उन्हें फर्जी नहीं बताया गया है।

सबूत नष्ट करने को लगाई बीआरसी पर आग!
छाता बीआरसी पर 3 अपै्रल को खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय के एक कक्ष में दिन में ही करीब 12 बजे आग लग गई थी। इस आग पर करीब ढाई घंटे बाद काबू पाया जा सका। आग लगने का कारण स्पष्ट नहीं हो सका जबकि कक्ष में न तो कोई विद्युत फिटिंग थी और न ही कोई अन्य ज्वलनशील पदार्थ। सवाल यह भी उठता है कि जब दिन में आग लगी और कार्यालय में कर्मचारी भी मौजूद थे तो आग के विकराल रुप लेने से पहले उन्हें आग लगने का पता क्यों नहीं लगा। सूत्रों की मानें तो इस कक्ष में वर्ष 2004-2005 बीएड शिक्षक भर्ती की पत्रावलियां सहित शिक्षकों के एरियर की पत्रावलियां भी रखी हुई थीं। यदि उक्त फर्जी बीएड प्रमाण पत्र घोटाले की जांच सही तरीके से आगे बढ़ती तो कई शिक्षकों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ता। सूत्रों के अनुसार, यही कारण है कि एक शिक्षा अधिकारी की शह पर इस कक्ष में जानबूझ कर आग लगाई गई। हालांकि इस मामले में बीएसए के आदेश पर रिपोर्ट दर्ज कराई जा चुकी है। इस बारे में ‘विषबाण’ से बातचीत के दौरान बीएसए चंद्रशेखर ने बताया कि मामले में रिपोर्ट कराई जा चुकी है। साथ ही एक तीन सदस्यीय कमेटी का गठन भी किया जा चुका है। जबकि दूसरी ओर कमेटी के एक सदस्य ने ऐसी किसी भी कमेटी के गठन की जानकारी होने से ही इंकार किया।