शिक्षा विभाग में फल-फूल रहा ‘एमएसटी’ का खेल

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मथुरा। बेसिक शिक्षा परिषद् के स्कूलों के हालात सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं। न ही शिक्षा अधिकारियों की कार्यप्रणाली में कोई सुधार आ रहा है। जबकि मथुरा में शिक्षक भर्ती घोटाला खुलने के बाद आला अधिकारियों की नजरें बेसिक शिक्षा विभाग पर जमी रहती हैं। इसके बाद भी जिले के कुछ ब्लाक में परिषदीय स्कूलों में शिक्षकों के न आने पर अभी भी रोक नहीं लग सकी है। शिक्षा अधिकारियों को मंथली सर्विस टैक्स (एमएसटी) दिया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर छाता बीआरसी केंद्र पर लगी आग ने भी नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।


मथुरा में वर्ष 2018 में प्रदेश का सबसे बड़ा शिक्षक भर्ती घोटाला सामने आया था। इसमें एसटीएफ ने कार्यवाही करते हुए मास्टरमाइंड सहित कई शिक्षकों को भी गिरफ्तार किया था। इसके बाद कुछ समय तो बेसिक शिक्षा विभाग में सब कुछ सही नजर आया लेकिन फिर से विभागीय अधिकारी पुराने ढर्रे पर आ गए। स्कूलों में शिक्षकों के न आने की शिकायतें फिर से मिलनी शुरु हो गई हैं। इसमें शिक्षा अधिकारियों की मिलीभगत भी सामने आ रही है। विकासखंड छाता और नंदगांव में तो शिक्षक-शिक्षिकाओं के बीच में स्कूल न आने की एवज में दिया जाने वाला सुविधा शुल्क एमएसटी (मंथली सर्विस टैक्स) के नाम से प्रचलन में आ गया है। यह सुविधा शुल्क भी 5 से 10 हजार तक वसूला जा रहा है। एमएसटी वसूलने के लिए बकायदा कुछ शिक्षक ही दलाली का काम कर रहे हैं।

इस विकासखंड के खंड शिक्षा अधिकारी पर बीआरसी नंदगांव के खाता संख्या ‘85282200052501’ में से बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति के ही लाखों रुपया निकालकर उपभोग कर लेना भी चर्चा का विषय बना हुआ है। इसकी शिकायत भी ब्लॉक के ही शिक्षकों ने मिलकर बेसिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव से की है। हालांकि अभी तक मामले में कोई जांच अथवा कार्यवाही नहीं हुई है। इस संबंध में जब विषबाण ने बीएसए चंद्रशेखर से बात की तो उन्हांने बताया कि जब से वह जनपद में आए हैं। सभी शिक्षक विद्यालय समय से पहुंच रहे हैं। ऐसा कोई शिक्षक नहीं है जो कि घर बैठे वेतन ले रहा है। यदि छाता-नंदगांव विकासखंड में ऐसा हो रहा है तो इसकी जानकारी करा ली जाएगी। चुनाव के बाद इसकी जांच कराई जाएगी।

छाता बीआरसी पर आग लगने के बाद कक्ष से निकलता धुंआ

बीआरसी पर लगी आग के मामले में होगी एफआईआर
3 अपै्रल को छाता बीआरसी पर लगी आग भी शिक्षा विभाग में चर्चा का विषय बन गई है। जिस कक्ष में आग लगी है, उस कक्ष में विद्युत फिटिंग भी नहीं थी। सूत्रों की मानें तो कमरे में आग लगाई गई है क्योंकि इसी कक्ष में शिक्षक भर्ती घोटाले, एरियर अनियमितता और स्कूल मान्यता संबंधित कुछ पत्रावलियां भी रखी हुई थीं। चर्चा है कि कक्ष में महत्वपूर्ण पत्रावलियों के होने के चलते ही जानबूझ कर आग लगाई गई है। इसके चलते बीएसए चंद्रशेखर ने इस मामले में एफआईआर कराने के आदेश दिए हैं। हालांकि बीएसए का यह भी कहना है कि कक्ष में दस्तावेज नहीं जले हैं वरन् यहां स्कूली बच्चों के जूते रखे हुए थे। इनमें ही आग लगी है।