हेमा की सभा में सपना के ठुमके

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मथुरा से भाजपा की सांसद हेमा मालिनी एक बार फिर चुनाव मैदान में है जोकि अपना चुनाव प्रचार बड़ी तेज गति से शुरु कर चुकी हैं। भारतीय जनता पार्टी भले ही संस्कार और सभ्यता की बात करती हो मगर वो खुद कितनी संस्कारवादी है और कितना संस्कारों पर उसके नेता और कार्यकर्ता चलते हैं उसकी एक तस्वीर मथुरा में आज देखने को मिली जहाँ सांस्कृतिक कार्यक्रमों में राधा बनने वाली मथुरा की सांसद हेमा मालिनी के लिए आयोजित की गई चुनावी जनसभा में जब भीड़ नहीं आई तो सभा के आयोजकों ने भीड़ जुटाने के लिए अश्लील डांस का सहारा लिया जोकि आप बखूबी नीचे दिये गये वीडियो में देख सकते हैं। मंच पर हेमा मालिनी का पोस्टर लगा हुआ है और वहीं ये अश्लील डांस जिसमें डांसर ठुमके लगा रही हैं।

यहां ये भी जानिये की ये जगह छोटे-छोटे बच्चों का माध्यमिक स्कूल हैं जहाँ पर अश्लील डांस के जरिये भीड़ जुटाने की जानसभा आयोजित की गई है।मथुरा की सांसद और भाजपा प्रत्याशी हेमामालिनी आज चैमुहां इलाके में जनसभा कर लोगों को सम्बोधित करने वाली थीं। मगर भाजपा के स्थानीय लोगों ने हेमा की ये जनसभा रख दी पूर्व माध्यमिक विद्यालय आझई खुर्द स्कूल में जहाँ पर स्कूल से कोई परमिशन लेना भी उचित नहीं समझा और जहाँ एक तरफ स्कूल में बच्चे पढ़ रहे थे वहीं बाहर हेमा की जनसभा के लिए भीड़ जुटाने के लिए अश्लील डांस कराया जा रहा था, वो भी ऐसे गानों पर कि स्कूल की शिक्षिका भी शर्म के मारे बच्चों को पढ़ाने में खुद असहाय समझने लगी और बच्चे भी अपनी पढ़ाई करने में काफी परेशानी महसूस कर रहे थे।

जिसके बाद जब स्कूल की शिक्षका ने बाहर जाकर आयोजकों से ऐसे डांस और गाने का विरोध किया तब कहीं जाकर संस्कृति का ढ़ोल पीटने वाले भाजपा के नेताओं ने इसे रोका। इस दौरान प्रत्याशी हेमामालिनी ने लोगों से मोदी के हाथ मजबूत करने के लिए भाजपा को वोट देने की अपील की। उन्होंने कहा कि पिछली पंचवर्षीय में क्षेत्र में काफी विकास कार्य कराएं है। आज क्षेत्र सड़क, बिजली, पानी जैसी मूलभूत समस्याओं से मुक्त हो चुका है । कहा कि मुझे अभी ब्रज क्षेत्र की और सेवा करनी है। आझई ग्रामपंचायत की तरफ से सांसद हेमामालिनी को वहाँ की प्रधान श्रीदेवी और भाजपा नेता ठाकुर थान सिंह ने 31 हजार रुपये और चाँदी का मुकुट पहनाकर स्वागत किया। यहां उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री लक्ष्मीनारायण चैधरी के साथ भाजपा के कार्यकर्ता मौजूद रहे। मगर बात यही है की आखिर सरकार और सभ्यता की बात करने वालों के लिए ये सब कितना उचित है।