क्या हेमा और श्रीकांत के गिले-शिकवे हो पाएंगे दूर!

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मथुरा। लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा द्वारा प्रत्याशी घोषित होने के बाद भी सिटिंग सांसद हेमामालिनी और प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा के बीच मतभेद खत्म नहीं हो पाए हैं। हालांकि हाईकमान सहित भाजपा के स्थानीय दिग्गज नेता मतभेदों को दूर करने का हरसंभव प्रयास कर रहे हैं। इससे लोकसभा चुनाव में मथुरा लोकसभा सीट पर विजय पाने का भाजपा का सपना दूर की कौड़ी साबित हो रहा है।
सिने तारिका और मथुरा की वर्तमान सांसद हेमामालिनी और प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा के बीच काफी समय पूर्व ही मतभेद उभरने शुरु हो गए थे। मतभेद उभरने का कारण मथुरा की राजनीति के साथ प्रशासनिक अमले में अपनी हनक साबित करना बताया जा रहा है। जहां एक ओर प्रदेश के कद्दावर नेता के रुप में श्रीकांत शर्मा प्रशासन में अपना दबदबा कायम करने के प्रयास में जुटे थे। वहीं सांसद हेमामालिनी भी अपने कद और प्रतिष्ठा के अनुरुप सम्मान पाने की इच्छुक थीं। इसी दबदबे की जंग में दोनों के बीच मतभेद उभरने लगे। इनमें कुछ मामलों में तो यह मतभेद खुलकर सामने आए। एक मामले में विधायक पूरन प्रकाश द्वारा महावन थानाध्यक्ष पर कार्यकर्ताओं के उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए धरना देना और धरना देने के बाद भी पुलिस प्रशासन द्वारा उनकी सुनवाई न होने के पीछे भी उस समय ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा का ही हाथ माना गया था क्योंकि विधायक पूरन प्रकाश को सांसद हेमामालिनी के खेमे का माना जाता है। जब हेमामालिनी ने इस मामले में उच्चस्तरीय दबाव बनाया तो एसओ को महावन से हटाकर ईनाम के रुप में उससे बेहतर थाना दे दिया गया। दूसरे मामले में वृंदावन स्थित अक्षय पात्र मंे आयोजित एक कार्यक्रम में प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ आए थे। यहां सांसद हेमामालिनी को मंच पर बोलने नहीं दिया गया। जबकि स्वयं योगीजी ने उनसे संबोधित करने का आग्रह किया था। तीसरे मामले में मांट में नवनिर्मित बिजलीघर के उद्घाटन में ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा के दबाव के चलते सांसद हेमामालिनी नहीं पहुंची थीं। चैथे मामले में छाता के नंदवन स्थित मेगा फूड पार्क के उद्घाटन में भी दोनों के बीच तनातनी दिखी थी। 20 मार्च की रात्रि में होलीगेट स्थित होलीकोत्सव समिति द्वारा आयोजित होली मिलन समारोह में सांसद हेमामालिनी ने मंच पर मौजूद मंत्री लक्ष्मीनारायण, पूर्व मंत्री रविकांत गर्ग, प्रदीप गोस्वामी सहित अन्य नेताओं का नाम तो लिया लेकिन मंच पर ही मौजूद ऊर्जा मंत्री के नाम का संबोधन नहीं किया। इससे दोनों के बीच की तल्खी सतह पर दिखाई दी। 21 मार्च को डेंपियर नगर स्थित शहीद भगत सिंह पार्क में आयोजित होली मिलन समारोह में भी दोनों का आमना सामना हुआ लेकिन दोनों ने एक दूसरे से नजरें चुरा ली। जबकि गठबंधन प्रत्याशी कुंवर नरेंद्र सिंह और हेमामालिनी ने एक दूसरे को चुनाव प्रत्याशी घोषित होने पर शुभकामनाएं दी। वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की 25 मार्च को मथुरा में आयोजित सभा की तैयारियों के लिए गोविंदनगर स्थित सर्वेश्वरी सदन में आयोजित भाजपा इकाई की बैठक में लोकसभा चुनाव संयोजक और पूर्व जिलाध्यक्ष डाॅ. डीपी गोयल और वर्तमान जिलाध्यक्ष नगेंद्र सिकरवार के बीच जमकर तू तू मैं मैं हुई। जो जमकर गाली-गलौच के बाद दोनों के मध्य हालत हाथा-पाई तक पहुंच गये। जिसमें कुछ भाजपा नेताओं ने दोनों को जैसे-तैसे अलग-थलग कर मामले का शांत किया। भाजपा बैठक में उपस्थित वरिष्ठ भाजपा नेता की मानें तो बैठक में कई वरिष्ठ नेताओं ने हेमा मालिनी का जमकर विरोध किया। बताते हैं कि योगी की सभा में मंच पर बैठने वालों की सूची एवं व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी को लेकर टकराव हुआ जिसमें श्रीकान्त समर्थकों का पड़ला भारी नजर आ रहा था। जिसके चलते हेमा मालिनी समर्थकों को बैठक को अधूरी छोड़ कर वहां से चलते हुए बने। इनमें डाॅ. डीपी गोयल को सांसद हेमामालिनी और नगेंद्र सिकरवार को श्रीकांत शर्मा के खेमे का माना जाता है। हालांकि डाॅ डीपी गोयल ने ऐसी किसी भी घटना से इंकार किया। जबकि कई अन्य नेताओं ने नाम न खोलने की शर्त पर लड़ाई होने की बात स्वीकार की। अब 25 मार्च को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हेमामालिनी के समर्थन में जनसभा करने आ रहे हैं। तो यह देखना होगा कि ऊर्जा मंत्री जनसभा में मौजूद रहेंगे अथवा नहीं और योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी दोनों के बीच की दूरियां कम कर पाएगी अथवा नहीं।