विनीत नारायण होंगे गठबंधन प्रत्याशी, रालोद में विद्रोह….. देंगे सामूहिक इस्तीफे!

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मथुरा। मथुरा लोकसभा सीट से नेताओं और मतदाताओं को चांैकाते हुए रालोद से गठबंधन प्रत्याशी के रुप में पत्रकार विनीत नारायण को चुनावी मैदान में उतारने का लगभग अंतिम निर्णय कर लिया है। जिससे रालोद नेताओं ने विद्रोह का बिगुल फूंकते हुए सामूहिक इस्तीफे का ऐलान कर स्थानीय होटल में आपातकालीन बैठक बुलाई है।
लोकसभा चुनाव के लिए उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल के बीच गठबंधन हो चुका है। चुनाव में अधिक से अधिक सीटें जीतने के लिए सभी पार्टियां जिताऊ उम्मीदवारों को तलाश रही हैं। इसी तलाश के चलते कई सीटें ऐसी भी हैं जहां अभी तक उम्मीदवारों की घोषणा नहीं हो सकी है। इसमें ही मथुरा सीट भी शामिल है। मथुरा सीट पर अपना विजय परचम लहराने के लिए सभी राजनैतिक पार्टियां लालायित रहती हैं। 10 मार्च को आचार संहिता लगने के बाद भी अभी तक किसी भी पार्टी का प्रत्याशी घोषित नहीं किया गया है। सभी पार्टियां जीतने वाले उम्मीदवार की तलाश कर रहे हैं। सपा, रालोद और बसपा के गठबंधन में मथुरा सीट रालोद के खाते में गई है। रालोद के युवराज जयंत चौधरी मथुरा सीट से लड़ने के इच्छुक नहीं है। ऐसे में मथुरा सीट पर रालोद की बेहतर प्रत्याशी की तलाश पत्रकार विनीत नारायण पर आकर समाप्त होती दिख रही है। हवाला कांड का खुलासा कर देश भर में चर्चा में आए पत्रकार विनीत नारायण की ऊंची पहुंच के चलते गठबंधन उम्मीदवार बनने की संभावनाएं तलाश रहे कई बडे़ नेता चारों खाने चित हो चुके हैं। विश्वस्त सूत्रों के अनुसार रालोद से विनीत नारायण की टिकट लगभग फाइनल हो चुकी है। सिर्फ घोषणा होना ही बाकी है। इस बात की भनक लगने के साथ ही रालोद के स्थानीय नेताओं में खलबली मच गई है। वह इसके विरोध में उतर आए हैं। स्थानीय नेताओं ने इस संबंध में सौंख अड्डा स्थित स्थानीय होटल में शाम चार बजे से एक बैठक भी आहूत की है। इसमें आगे की रणनीति बनाई जाएगी। वहीं रालोद के पश्चिमी उत्तर प्रदेश अध्यक्ष डाॅ. अनिल चौधरी भी अपना त्यागपत्र दे चुके हैं। पत्रकार विनीत नारायण ने विषबाण से वार्ता के दौरान बताया कि अभी पार्टी हाईकमान से अधिकृत रुप से जानकारी नहीं मिली है। हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि वह टिकट की कतार में शामिल हैं।

हवाला कांड का खुलासा कर देश भर में चर्चित हुए थे विनीत नारायण

पत्रकार विनीत नारायण का नाम स्थानीय मतदाताओं को चौंका रहा है क्योंकि इनका नाम आम मतदाताओं ने इनका नाम अभी तक सुना नहीं है। हालांकि इनका नाम राजनेताओं, ब्यूरोके्रट्स, पत्रकारों के बीच काफी फेमस रहा है। विनीत नारायण पहली बार जैन हवाला कांड का खुलासा कर देश भर में चर्चा में आए थे। मथुरा के कस्बा राया के मूल निवासी अग्रवाल समाज के विनीत नारायण वृंदावन में रहते हैं। पत्रकारिता के बाद उन्होंने बृज के प्राचीन मंदिर, कुंडों का सौंदर्यीकरण करने का बीड़ा उठाया। द बृज फाउंडेशन संस्था के तहत उन्होंने बृज के कई कुंड और मंदिरों का सौंदर्यीकरण कराया। इनके उद्घाटन समारोह पर वह बडे़-बड़े राजनेताओं को बुलाकर अपनी पहुंच दिखा चुके हैं। देश के बड़े राजनेताओं के साथ उनके मधुर संबंध हैं फिर चाहे वह किसी भी पार्टी के नेता हों। यही मधुर संबंध रालोद से उनकी टिकट फाइनल कराने में काम आ रहे हैं। हालांकि राजनीतिक पृष्ठभूमि न होने के चलते कई राजनेता और मतदाता उन्हें कमजोर प्रत्याशी मानकर चल रहे हैं लेकिन चर्चा है कि उनके चुनाव प्रचार में रालोद मुखिया के चौ. अजित सिंह, जयंत चौधरी के साथ मायावती, अखिलेश से लेकर अन्य पार्टियों के दिग्गज नेता भी चुनावी सभाओं को संबोधित करने आ सकते हैं। साथ ही उनके विरोध में कई नेता चुनावी सभाएं करने से पीछे भी हट सकते हैं। यह भी चर्चा है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के नजदीकी संबंध के चलते कांग्रेस उनके समक्ष अपना उम्मीदवार न उतारे और विनीत नारायण को ही समर्थन दे सकती है। जबकि यह भी चर्चा है कि उन्हें टिकट दिलाने में पर्दे के पीछे से भाजपा नेताओं का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। जो उन्हें तन, मन, धन से सहयोग का वादा कर रहे हैं।