आखिर सीडी पर कुंडली मारे क्यों बैठे हैं अफसर?

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मथुरा। बेसिक शिक्षा विभाग के विद्यालयों में डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा के वर्ष 2004-2005 के बीएड के शैक्षिक प्रमाणपत्रों के आधार पर प्रदेश भर में नौकरी कर रहे करीब 4700 फर्जी शिक्षक एसआईटी की जांच में सामने आए थे। एसआईटी ने ऐसे शिक्षकों की एक सीडी जारी की थी। मथुरा बेसिक शिक्षा विभाग को दी गई सीडी में दर्ज फर्जी शिक्षकों पर विभागीय सचिव रुबी सिंह के निर्देशानुसार कार्यवाही करने की अंतिम तिथि 30 जनवरी थी। तारीख निकलने के बाद भी विभाग सीडी में दफन राज खोलने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। ऐसे में विभागीय अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।
एसआईटी ने गत वर्ष मथुरा बेसिक शिक्षा विभाग को वर्ष 2004-2005 के बीएड के फर्जी अथवा कूटरचित टेंपर्ड प्रमाण पत्रों के जरिए जनपद में नौकरी कर रहे फर्जी शिक्षकों का डाटा सौंपा था। उस समय तत्कालीन पटल सहायक और शिक्षक भर्ती घोटाले के प्रमुख आरोपी महेश शर्मा ने सीडी के आधार पर 54 फर्जी शिक्षकों की सूची तैयार कर जारी की थी। जबकि विभागीय सूत्रों की मानें तो इस सीडी में करीब 100 से अधिक शिक्षकों के नाम थे। जिनमें से सौदेबाजी कर सिर्फ 54 शिक्षकों के ही नाम जारी किए गए। उस समय कोर्ट के आदेश को आड़ बनाकर उक्त शिक्षकों पर कार्यवाही रोक दी गई। इसके बाद एसआईटी ने एक बार फिर गत माह में संशोधित नई सीडी तैयार कर बीएसए कार्यालय मथुरा को भेजी। इसमें भी कमोबेश उन्हीं फर्जी शिक्षकों की सूची है जो पिछली सीडी में शामिल थे। सचिव बेसिक शिक्षा ने ऐसे सभी फर्जी शिक्षकों की सूची 15 जनवरी तक तलब की थी। साथ ही 30 जनवरी तक ऐसे शिक्षकों पर कार्यवाही कर सचिव को अवगत कराना था लेकिन मथुरा के शिक्षा अधिकारी कार्यवाही के प्रति लापरवाह नजर आ रहे हैं। मथुरा बीएसए चंद्रशेखर ने अभी तक सीडी को खोला ही नहीं है। ऐसे में बीएसए का लापरवाह रवैया फर्जी शिक्षकों के लिए वरदान साबित हो रहा है और विभाग में मिलीभगत की चर्चाएं तैर रही हैं।