गणतंत्र दिवस पर पढ़ाया ईमानदारी का पाठ, भ्रष्ट अफसर पर निकली 300 करोड़ की संपत्ति

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जयपुर। नारकोटिक्स विभाग के उपायुक्त डॉ. सहीराम मीणा को एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) की टीम ने एक लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों दबोच लिया। करीब छह माह बाद इसी वर्ष रिटायर होने वाले अफसर लोकसभा चुनाव लड़ने की फिराक में थे। वहीं पकड़े जाने से पूर्व वह 26 जनवरी को तिरंगा फहराने के बाद अधीनस्थ कर्मचारियों को ईमानदारी का पाठ पढ़ा रहे थे। इसके करीब दो घंटे बाद ही उन्होंने एक दलाल से एक लाख रुपए की रिश्वत ली। एसीबी की टीम ने अधिकारी मीणा को रंगे हाथां पकड़ लिया। जांच के दौरान उनकी संपत्ति देखकर एसीबी टीम भी हैरान है। उसके जयपुर आवास से लगभग 300 करोड़ की संपत्ति के कागजात मिले हैं। प्रारंभिक जांच में उनके परिवार के नाम पर 106 प्लाट, 25 दुकानें, मैरिज गार्डन, कृषि भूमि व मुंबई-दिल्ली में भी फ्लैट, पेट्रोल पंप आदि के कागजात मिले हैं।
राजस्थान में नारकोटिक्स विभाग के सबसे बड़े अधिकारी डीएनसी कोटा सहीराम मीना पर एसीबी की कार्रवाई से चित्तौड़गढ़ के साथ समूचे राजस्थान के जिला अफीम अधिकारी कार्यालयों में भी खलबली है। नारकोटिक्स कमिश्नर ग्वालियर ने भी कोटा के अधिकारियों से पूरे मामले की रिपोर्ट मांग ली है। रिपोर्ट के बाद विभाग भी जांच व कार्रवाई करेगा। आईआरएस डॉ. मीणा की मंथली सैलेरी 1.50 लाख रुपए है। वो 1989 बैच में सरकारी सेवा में आया था। जुलाईई 2019 में रिटायरमेंट है। छठवें और सातवें वेतन आयोग लगने के बाद इसकी सैलेरी बढ़ी थी, इसके पहले यह सैलेरी ज्यादा नहींथी। ऐसे में इसके पास मिली संपत्ति को लेकर एसीबी अधिकारी हैरान हैं। वे इस गणना में भी लगे हुए है कि मीणा ने नौकरी पर लगने के बाद अब तक सरकार से कितनी सैलेरी ली। इसलिए जांच के दायरे को बढ़ाया जाएगा। आय से अधिक संपत्ति का मुकदमा भी दर्ज होगा। इस मामले को प्रवर्तन निदेशालय और आयकर विभाग को भी सूचित किया गया है। मीणा 26 जनवरी की सुबह गणतंत्र दिवस का झंडा फहराने के बाद सुबह 10 बजे घर पहुंच गया था। इसके बाद दलाल कमलेश वहां आया और उसने मीणा को 1 लाख रुपए दिए। पैसे लेने के बाद मीणा जयपुर जाने के लिए तैयार था, तभी एसीबी पहुंच गई। पूछताछ में मीणा ने कहा कि यह मेरे पैसे हैं और इन रुपयों का कमलेश से कोई लेना-देना नहीं है।

लोकसभा चुनाव लड़ना चाहता था सहीराम मीणा
सहीराम मीणा ग्राम जीबली, थाना वजीरपुर, जिला सवाईईमाधोपुर का रहने वाला है। वह लोकसभा चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहा था। उसने कांग्रेस और भाजपा दोनों पार्टियों से दावेदारी करने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। इसके लिए मीणा सेवा से जल्द रिटायरमेंट लेने की तैयारी में था। एसीबी कार्रवाई के दौरान कुछ दस्तावेज ऐसे मिले हैं, जो मीणा के चुनाव लड़ने की तैयारी की पुष्टि करते हैं। सूत्रों के अनुसार मीणा का भाजपा की राजनीति में दखल है। विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा में शामिल हुए एक दिग्गज नेता से भी सहीराम मीणा के करीबी संबंध बताए जा रहे हैं। मीणा का परिवार प्रशासनिक और राजनैतिक रसूख रखता है। सहीराम मीणा की बेटी उत्तराखंड के एक जिले में कलेक्टर हैं। रिश्तेदार रामविलास ने लालसोट से भाजपा टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ा।

एसीबी को जांच में मिले कागजात के आधार पर सहीराम की गलत कमाई का गणित

212 करोड़ : 106 भूखंड (प्रत्येक औसत 2 करोड़ का)
25 करोड़ : 25 दुकानें (प्रत्येक औसत 1 करोड़ का)
05 करोड़ः पेट्रोल पंप की औसत कीमत।
10 करोड़ः मैरिज गार्डन की औसत कीमत।
10 करोड़ः सांगानेर में 1.2 हैक्टेयर यानी करीब 5 बीघाकृकृषि भूमि (प्रत्येक बीघा की औसत कीमत 2 करोड़)
15 करोड़ : जयपुर स्थित जगतपुरा की कोठी की औसत कीमत।
15 करोड़ : मुंबई के एक पॉश इलाके में स्थित फ्लैट की औसत कीमत।
2.38 करोड़ : जयपुर एवं कोटा स्थित आवासों से बरामद नकदी एवं जेवरात की कीमत।

यह संपत्ति सहीराम मीणा, उनकी पत्नी, उनके बेटे, बहू सहित अन्य पारिवारिक सदस्यों के नाम पर दर्ज हैं। इसमें दिल्ली में 2 फ्लैट और एक टायर की बड़ी एजेंसी भी शामिल है। यह आंकड़ा प्रारंभिक जांच में निकल कर आया है। पूरी जांच के बाद इसमें कुछ उलटफेर भी सकता है। विषबाण इस डिटेल की पुष्टि नहीं करता है।