ससुराल पहुंची उत्तराखंड की राज्यपाल, स्वागत को उमड़े ग्रामीण

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ससुराल का पुश्तैनी मकान

ससुराल की कृषि योग्य भूमि का निरीक्षण करती हुई उत्तराखंड की राज्यपाल बेबीरानी मौर्य

ससुर मगनदास मौर्य की समाधिस्थल पर पुष्पांजलि अर्पित करती हुई उत्तराखंड की राज्यपाल बेबीरानी मौर्य

मथुरा। कहावत है कि कोई भी व्यक्ति अपने जीवन में भले ही कितनी भी ऊंचाईयों को छू ले, उसे अपनी जड़ों को नहीं भूलना चाहिए। उसका व्यवहार सदैव सौम्य होना चाहिए। इस कहावत को उत्तराखंड की राज्यपाल बेबीरानी मौर्य चरितार्थ कर रही हैं। वह गत दिनों नौहझील के बाजना व्यापार मंडल द्वारा आयोजित समारोह में प्रतिभाग करने आई थीं। यहां से फिर वह अपने पति के पैतृक गांव ;ससुरालद्ध में आयोजित पारिवारिक भतीजों की सगाई लगुन समारोह में आशीर्वाद देने के लिए पहुंची। यहां उन्होंने अपनी कृषि योग्य भूमि देखी तो साथ ही ससुर की समाधिस्थल पर पुष्पांजलि अर्पित की। इससे पूरा गांव भावुक हो उठा।
जनपद के नौहझील स्थित बाजना से दो किमी दूर गांव आजनौंठ गत दिनों अचानक ही उस समय एक बार फिर चर्चाआ में आ गया। जब उत्तराखंड की राज्यपाल बेबीरानी मौर्य गांव में आयोजित एक सगाई समारोह में आईं। इससे पहले उन्होंने बाजना व्यापार मंडल के पदाधिकारियों द्वारा आयोजित समारोह में प्रतिभाग कर स्थानीय व्यापारियों और लोगों का दिल जीता। यहां व्यापारी नेता मुकेश वार्ष्णेय सहित अन्य व्यापारियों द्वारा क्षेत्र से पहली बार किसी ग्रामीण महिला के राज्यपाल बनने पर उन्हें चांदी का मुकुट पहनाकर सम्मानित किया गया। यहां से फिर बेबीरानी मौर्य गांव आजनौंठ में अपने ही ससुराल पक्ष के दो भतीजों अजीत और अर्जुन की लगुन-सगाई में आशीर्वाद देने के लिए गांव पहुंची। गांव के लोग अपने गांव की पुत्रवधु को उत्तराखंड की राज्यपाल के रुप देखकर अभिभूत थे। राज्यपाल बेबीरानी मौर्य के भतीजे चमन कुमार ने बताया कि चाची जी आरंभ से ही सौम्य स्वभाव की रही हैं। उनका व्यवहार काफी सरल रहा है। गांव में उनकी कृषि योग्य भूमि भी है। शादी के बाद से ही वह वर्ष में कम से कम दो बार गांव में आती रही हैं। वह आगरा की मेयर रहते हुए भी कई बार गांव आती रही। वह मेयर के बाद से तो लगातार राजनीति में आगे बढ़ती रहीं लेकिन इसके बाद भी उनका अपनी ससुराल पक्ष के पारिवारिक सदस्यों से भावनात्मक जुड़ाव बना रहा। गांव के लोगों ने आगरा जाकर किसी भी समस्या पर उनसे बात की तो उन्होंने आगे बढ़कर उसकी समस्या का समाधान किया। हाल ही में जब चाचीजी राज्यपाल के रुप में गांव आई थीं तो भी उनमें वही पुराने सरल और सौम्य व्यवहार की झलक दिख रही थी। उनमें अपने पद को जरा भी गुमान नहीं है। वह गांव के हर ग्रामीण की सरल पहुंच में हैं। उनके देवर राजेश कुमार फिलहाल नागपुर में रहते हैं और भारतीय स्टेट बैंक में प्रबंधक पद पर कार्यरत हैं। जबकि बेबीरानी मौर्य की तीन ननद पूनम, चित्रा और ममता हैं। इनमें पूनम दिल्ली, चित्रा नोएडा और ममता विदेश में रहती हैं। बताया कि राज्यपाल बेबीरानी मौर्य के दो बच्चे हैं इनमें एक बेटा और एक बेटी हैं। दोनों ही इन दिनों में अमेरिका में इंजीनियर पद पर कार्यरत हैं।

राजनीतिक सफर
उत्तराखंड की सातवीं राज्यपाल के रूप में शपथ लेने वाली बेबीरानी मौर्या का जन्म उत्तर प्रदेश के आगरा में 15 अगस्त 1956 में हुआ। गैर राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखने वाली बेबीरानी मौर्य का विवाह प्रदीप कुमार मौर्य से वर्ष 16 मार्च 1983 में हुआ था। पति प्रदीप कुमार मौर्य पंजाब नेशनल बैंक में निदेशक के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं और इस समय बैंक की एडवाइजरी कमेटी के मेंबर हैं। जबकि उनके ससुर मगनदास मौर्य आईपीएस अधिकारी रहे थे। ससुर की इजाजत के बाद गैर राजनीतिक पृष्ठभूमि होने के बाद भी उन्होंने 1990 के दशक में राजनीति में कदम रखा और भाजपा की सदस्य के रुप में अपने सक्रिय राजनीतिक जीवन की शुरुआत की। वह कला से परास्नातक और बीएड हैं। वर्ष 1995 में भाजपा ने उन्हें आगरा नगर निगम का चुनाव लड़ाया। इसमें जीत हासिल कर वह आगरा की महापौर चुनी गई। वह आगरा की पहली महिला महापौर थीं। वर्ष 2000 तक वह महापौर के पद पर रहीं। बेबी रानी मौर्या 1997 में राष्ट्रीय अनुसूचित मोर्चा की कोषाध्यक्ष रहीं हैं। वर्तमान में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद उस समय राष्ट्रीय अनुसूचित मोर्चा के अध्यक्ष थे। आगरा की मेयर के बाद वर्ष 2001 में प्रदेश सामाजिक कल्याण बोर्ड की सदस्य बनीं और एक साल बाद ही राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य बन गईं। पहले चुनाव में ही मेयर बनने के बाद मौर्या ने एत्मादपुर से 2007 में विधानसभा चुनाव में हाथ आजमाया था लेकिन बसपा के नारायण सिंह सुमन से हार गईं। साल 2013 से 2015 तक उन्होंने बीजेपी प्रदेश मंत्री का दायित्व संभाला। जुलाई 2018 में उन्हें बाल अधिकार संरक्षण के राज्य आयोग की सदस्य चुना गया। 21 अगस्त 2018 को केंद्र सरकार ने उन्हें उत्तराखंड का राज्यपाल नियुक्त किया और 26 अगस्त 2018 को उन्होंने नैनीताल में राज्यपाल के रुप में शपथ ग्रहण की। अनुसूचित जाति से ताल्लुक रखने वाली मौर्या को पार्टी के प्रति उनकी निष्ठा को देखते हुए राज्यपाल का पद दिया गया।

सम्मान
वर्ष 1996 में उन्हें सामाजिक कार्यां के लिए समाज रत्न का सम्मान दिया गया। वर्ष 1997 में उत्तर प्रदेश रत्न दिया गया। वहीं 1998 में नारी रत्न सम्मान से सम्मानित किया गया।