फांसी के फंदे पर झूली मथुरा के जीएलए यूनिवर्सिटी की छात्रा

0
3764

– परिजनों ने लगाया विश्वविद्यालय प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप

मथुरा/चौमुहां। मथुरा जनपद के चौमुहां कस्बा स्थित जीएलए विश्वविद्यालय में मंगलवार की सुबह एक छात्रा ने फांसी से लटककर आत्महत्या कर ली। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को फंदे से उतरवा कर पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया। पोस्टमार्टम गृह पर पहुंचे मृतका के परिजनों ने विश्वविद्यालय प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाया है।
आगरा के सैनिक कालोनी, देवरी रोड निवासी तेजवीर की 23 वर्षीय पुत्री आरती जीएलए विश्वविद्यालय में एमबीए द्वितीय वर्ष की छात्रा थी। मंगलवार की सुबह करीब 8.30 बजे उसने विश्वविद्यालय के गोदावरी हॉस्टल के अपने कमरे में लगे पंखे से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। काफी देर बाद जब इसकी जानकारी कालेज प्रबंधन को लगी तो उसने पुलिस को सूचित किया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को उतारा और उसे पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया। मृतका आरती के पिता तेजवीर ने बताया कि अभी कुछ दिन पहले ही उनकी बेटी घर होकर आई थी। उस समय बिल्कुल नहीं लग रहा था कि वह ऐसा कोई कदम उठाएगी। साथ ही घटना से पहले भी उसकी पिता से बात हुई थी। तेजवीर का आरोप है कि उसकी कक्षा का समय करीब 8.30 बजे से शुरु होता है। जब वह काफी देर तक अपनी क्लास में नहीं पहुंची तो भी कालेज प्रशासन ने हॉस्टल में जाकर पता करने का प्रयास नहीं किया कि आरती कक्षा से क्यों अनुपस्थित है। पिता तेजवीर कालेज प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं। वह कहते हैं कि इस मामले में वह विश्वविद्यालय के खिलाफ कार्यवाही के लिए शिकायत करेंगे। वहीं कालेज प्रशासन का कहना है कि मृतका आरती के आगरा के ही रहने वाले एक लड़के के साथ संबंध थे। उससे लड़के से आरती की सुबह वीडियो कॉल पर बात हुई थीं। बातों के दौरान ही किसी बात को लेकर दोनों के बीच बहस हो गई थी। इसके बाद ही आरती ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मौके से सुसाइड नोट भी मिला है जिस पर मम्मी-पापा, आई एम सॉरी, मैं जा रही हूं। लिखा हुआ है। जैंत चौकी प्रभारी अवधेश जादौन ने बताया कि छात्रा का शव पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया गया है। अभी इस मामले में कोई लिखित कार्यवाही नहीं हुई है।
जीएलए यूनिवर्सिटी में इस तरह की घटनाएं पूर्व में भी सामने आती रहीं हैं। विवि की छात्राएं सहपाठी छात्रों के साथ लापता हो चुकी हैं। इनमें से कुछ छात्राओं ने शादी रचा ली तो कुछ बाद में वापस घर आ गईं। लेकिन इस तरह की घटनाएं कालेज प्रशासन द्वारा अपने राजनीतिक रसूख से दबाई जाती रहीं हैं।