‘ड्रीमगर्ल’ हेमा मालिनी को मिली है मथुरा सीट पर सबसे बड़ी जीत

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चंद्रशेखर गौड़
मथुरा। जनपद की लोकसभा सीट पर विगत 68 वर्षां के इतिहास में अब तक सबसे बड़ी जीत बॉलीवुड सिने तारिका ‘ड्रीमगर्ल’ हेमामालिनी को नसीब हुई है। उन्होंने वर्ष 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में रालोद के युवराज जयंत चौधरी को हराकर चुनाव जीता था। जबकि वर्ष 2014 में हुए चुनाव में रालोद के साथ कांग्रेस का हाथ भी था। जबकि मथुरा सीट पर लोकसभा चुनाव में अब तक सबसे कम मतों से जीत मनीराम बागड़ी की हुई है।
देश में वर्ष 1951 में सबसे पहले लोकसभा चुनाव हुए थे। इसमें मथुरा लोकसभा सीट पर कांग्रेस के कृष्णचंद्र ने निर्दलीय महेंद्र प्रताप सिंह को हराकर चुनाव जीता था। कृष्णचंद्र को उस चुनाव में 71235 मत मिले थे जबकि महेंद्र प्रताप सिंह को 52974 वोट मिले थे। कृष्णचंद्र ने यह चुनाव 18261 मतों से अपने पक्ष में किया था। वर्ष 1957 में हुए चुनाव में निर्दलीय महेंद्र प्रताप सिंह ने कांग्रेस से अपनी हार का बदला लेते हुए दिगंबर सिंह चौधरी को 25993 वोटों से हराकर चुनाव जीता था। महेंद्र प्रताप सिंह को 95202 वोट मिले थे। वर्ष 1967 में निर्दलीय गिरिराज शरण सिंह ने 172785 वोट लेकर कांग्रेस के ही दिगंबर सिंह चौधरी को 84431 वोटों से हराया और सांसद बने। वर्ष 1970 में आखिरकार दो बार से हार रहे दिगंबर सिंह चौधरी को जीत मिली, उन्होंने 55036 मत पाकर मनीराम बागड़ी को 25756 वोटों से हराया। वर्ष 1971 में कांग्रेस के चकलेश्वर सिंह ने दिगंबर सिंह चौधरी को हराया। 21439 वोटों से जीतने वाले चकलेश्वर सिंह को 111864 वोट मिले थे। जबकि दिगंबर सिंह चौधरी को 90425 मत मिले थे। वर्ष 1977 में मनीराम बागड़ी ने रामहेत सिंह को 2 लाख 15 हजार 625 वोटों से हराकर तब तक की सबसे बड़ी जीत हासिल की थी। मनीराम बागड़ी को 295518 वोट मिले थे वहीं रामहेत सिंह को सिर्फ 81253 वोट ही मिल सके। इसके बाद मथुरा सीट को सबसे बड़ी जीत देखने के लिए वर्ष 2014 के लोकसभा चुनावों तक इंतजार करना पड़ा। हालांकि उसकी बात थोड़ी देर में करते हैं। उससे पहले वर्ष 1977 के बाद के चुनावों का परिणाम जानते हैं। वर्ष 1980 में चौ. दिगंबर सिंह 167774 मत लेकर एक बार फिर सांसद बने। उन्होंने कांग्रेस के आचार्य लक्ष्मीनारायन को 82663 वोटों से हराया।
वर्ष 1984 में कांग्रेस से कुंवर मानवेंद्र सिंह चुनाव मैदान में उतरे। उन्होंने किसानों के मसीहा के रुप में प्रसि( लोकदल के चौधरी चरण सिंह की पत्नी गायत्री देवी को 103400 वोटों से हराकर चुनाव जीता था। मानवेंद्र सिंह को 263248 वोट मिले थे। वर्ष 1989 में एक बार फिर कुंवर मानवेंद्र चुनाव लड़े लेकिन इस बार वह कांग्रेस के नहीं वरन् जनता दल के टिकट पर सांसद बने। मानवेंद्र सिंह को 233318 वोट मिले और उन्होंने कांग्रेस के कद्दावर नेता नटवर सिंह को 37713 वोटों से हराया। वर्ष 1991 में भाजपा के स्वामी साक्षीजी महाराज 156523 वोट लेकर सांसद बने। उन्होंने जनता दल के चौधरी लक्ष्मीनारायन सिंह को मात्र 15512 वोटों से हराया था। यह मथुरा सीट पर लोकसभा चुनाव में किसी भी प्रत्याशी की अब तक की सबसे कम वोटों से हार है। लक्ष्मीनारायन सिंह को 141011 वोट मिले थे। वर्ष 1996 में भाजपा के तेजवीर सिंह ने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े चौधरी लक्ष्मीनारायन सिंह को 64572 वोटों से हराया। तेजवीर सिंह को 167369 वोट मिले थे। जबकि लक्ष्मीनारायन सिंह को 102797 वोट मिले थे। वर्ष 1998 में तेजवीर सिंह फिर से भाजपा से चुनाव लडे़ और 303831 वोट लेकर बसपा के पूरन प्रकाश को 190030 वोटों से हराया। वर्ष 1999 के आम चुनाव में एक बार फिर तेजवीर सिंह 210212 वोट लेकर विजयी रहे और सांसद बने। उन्होंने रालोद के रामेश्वर सिंह को 41727 वोटों से हराया। वर्ष 2004 में कुंवर मानवेंद्र सिंह कांग्रेस के टिकट पर चुनाव मैदान में थे उन्होंने बसपा के चौधरी लक्ष्मीनारायन सिंह को 38132 वोटों से हराकर चुनाव जीता। वर्ष 2009 में राष्ट्रीय लोकदल के युवराज जयंत चौधरी ने भाजपा के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ा और बसपा के दिग्गज नेता पं. श्यामसुंदर शर्मा को 169613 वोटों से हराया। जयंत चौधरी को 379870 मत मिले थे जबकि श्यामसुंदर शर्मा को 210257 वोट मिले थे। वर्ष 2014 में मथुरा लोकसभा के मतदाताओं ने मथुरा सीट पर सबसे बड़ी जीत देखी। भाजपा ने यहां सबसे बाद में अपना प्रत्याशी घोषित किया था लेकिन उस प्रत्याशी के नाम की घोषणा के साथ ही उसकी जीत पक्की हो गई थी क्योंकि भाजपा ने यहां से मशहूर बॉलीवुड अभिनेत्री ड्रीमगर्ल हेमामालिनी को टिकट दिया था। इससे मथुरा की सीट जाटलैंड होने के बाद भी रालोद के युवराज जयंत चौधरी को मथुरा सीट पर सबसे बड़ी हार का दंश झेलना पड़ा। हेमामालिनी को 574633 वोट मिले थे और जयंत चौधरी को मात्र 243890 वोट ही मिल सके। जबकि उस चुनाव में रालोद के साथ में कांग्रेस का गठबंधन भी था। इसके बाद भी जयंत चौधरी बुरी तरह हार गए थे। इस तरह अब तक की सबसे कम मतों से जीत मनीराम बागड़ी और सबसे बड़ी जीत का सेहरा बॉलीवुड सिनेतारिका हेमामालिनी के सिर बंधा है। अब वर्ष 2019 के लोक चुनाव में देखना होगा कि यदि हेमामालिनी पुनः भाजपा प्रत्याशी के रुप में उतरती है तो क्या वह अपनी पिछली जीत के रिकार्ड को तोड़ पाती हैं अथवा नहीं।