सपा-बसपा के गठबंधन ने रालोद को दिया झटका

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चंद्रशेखर गौड़

मथुरा। उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपना खासा प्रभाव रखने वाले दो दल समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने शनिवार को लखनऊ में पत्रकार वार्ता के दौरान लोकसभा चुनाव के लिए अपने गठबंधन की विधिवत् घोषणा कर दी। दोनों ही पार्टी ने गठबंधन में प्रदेश की 80 सीटों में से 38-38 सीटें आपस में बांटी हैं। वहीं रायबरेली और अमेठी में वह अपने उम्मीदवार नहीं उतार रहे हैं। इस तरह उन्होंने अन्य दलों से गठबंधन होने की सूरत में मात्र दो ही सीटें छोड़ी हैं। सपा-कांग्रेस के इस झटके के बाद रालोद के समक्ष अपना वजूद कायम रखने की चुनौती सामने आ गई है। हालांकि अब रालोद कांग्रेस और भाजपा दोनों की ही ओर आस भरी नजरों से देख रही है।
कुछ दिनों पूर्व दिल्ली में मायावती और अखिलेश यादव की मुलाकात के बाद रालोद के युवराज जयंत चौधरी ने लखनऊ में सपा मुखिया अखिलेश यादव से मुलाकात कर गठबंधन में शामिल होकर सीटों के बंटवारे पर चर्चा की थी। सूत्रों के अनुसार, सपा रालोद को गठबंधन में शामिल अधिक सीटें देने पर भी राजी थी लेकिन इसमें बसपा सुप्रीमो मायावती ने अड़ंगा लगा दिया। वह रालोद को छह सीटें देने के लिए राजी नहीं हुईं। बाद में अखिलेश यादव भी बसपा मुखिया से अलग राय नहीं बना सके और रालोद को झटका देते हुए शनिवार को गठबंधन की घोषणा कर दी। साथ ही पत्रकार वार्ता में उन्होंने आपस में 38-38 सीटों पर बंटवारा कर लिया। प्रदेश की 80 सीट में 76 सीटों पर दोनों अपना अधिकार जता चुके हैं। इसके अनुसार अब सिर्फ चार सीटें शेष रहीं। इनमें उम्मीद जताई जा रही है कि इन चार सीटों में से दो सीटें रायबरेली और अमेठी भी शामिल हैं। इन सीटों को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और उनकी मां सोनिया गांधी के लिए छोड़ी गई हैं। अन्य दो सीटें अन्य संभावित सहयोगी दलों के लिए हैं। हालांकि यह दो सीटें रालोद के लिए छोड़ी गई मानी जा रही हैं। जो कि बागपत और मुजफ्फरनगर समझी रही हैं। इन दोनों सीटों में से बागपत से रालोद युवराज जयंत चौधरी और मुजफ्फनगर सीट से रालोद मुखिया अजीत सिंह के चुनाव लड़ना तय माना जा रहा है। हालांकि रालोद मात्र दो सीटों के लिए गठबंधन में शामिल होने के लिए तैयार नहीं है। सूत्रों के अनुसार रालोद गठबंधन में अपने लिए छह सीटें चाहती थीं। इनमें बागपत, मुजफ्फरनगर, मथुरा, हाथरस, अमरोहा और कैराना शामिल हैं। इनमें से कैराना सीट पर फिलहाल रालोद का ही कब्जा है।
रालोद के राष्ट्रीय सचिव महेंद्र सिंह ने विषबाण को बताया कि लोकसभा चुनाव को लेकर गठबंधन पर पार्टी हाईकमान ही तय करेगा। सपा-बसपा गठबंधन पर कुछ भी कहने से इंकार कर दिया। अभी अन्य दलों से बातें चल रही हैं। इंतजार करिए कुछ अच्छा ही होगा।
रालोद के पश्चिमी उत्तर प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अनिल चौधरी ने विषबाण से वार्ता के दौरान बताया कि सपा-बसपा ने अपने हिसाब से गठबंधन किया है। वह रालोद को सम्मानजनक सीटें देने के लिए तैयार नहीं थे। उन्होंने भाजपा के साथ गठबंधन अथवा विलय से स्पष्ट मना कर दिया। हालांकि कांग्रेस के साथ गठबंधन के सवाल को टाल गए।

दावेदारों के उतरे चेहरे
सपा-बसपा पार्टी द्वारा आपस में गठबंधन करते हुए सीटों के बंटवारे की घोषणा के बाद से ही रालोद के लोकसभा चुनाव के संभावित उम्मीदवारों के चेहरे उतर गए हैं। इनमें प्रमुख रुप से पूर्व जिलाध्यक्ष कुंवर नरेंद्र सिंह , लोकसभा प्रभारी हाथरस डॉ. अशोक अग्रवाल, पूर्व जिलाध्यक्ष राजेंद्र सिंह सिकरवार, योगेश नौहवार सहित आधा दर्जन से अधिक उम्मीदवार शामिल हैं। वह यही चाह रहे हैं कि अब रालोद सपा और बसपा के साथ गठबंधन न करे। क्योंकि ऐसी स्थिति में रालोद को सिर्फ दो ही सीटें मिलेंगी। जिन पर अजीत सिंह और जयंत चौधरी ही चुनाव लड़ेंगे। हालांकि मथुरा महानगर अध्यक्ष दिलीप चौधरी ने विषबाण को बताया कि अभी सीटों के बंटवारे में पुनर्विचार होगा और गठबंधन प्रत्याशी के रुप में रालोद का ही उम्मीदवार चुनाव लड़ेगा और मथुरा से सांसद बनेगा।