चुनावी सभा में कार्यकर्ताओं की भीड़ दिखाकर लाखों-करोड़ों कमाते हैं ठेकेदार

0
70

मथुरा। यदि आप किसी राजनैतिक पार्टी के कर्मठ और निष्ठावान कार्यकर्ता हैं। अपने प्रिय नेता का भाषण सुनने के लिए सभा और चुनावी रैली में जा रहे हैं। तो उससे पहले एक बार फिर से सोच लें। इस खबर को पढ़ें। आप भले ही पार्टी के प्रति कितनी भी निष्ठा और कर्मठता हों लेकिन आपकी उपस्थिति दिखाने के लिए ठेकेदार द्वारा आपके नाम पर वसूली कर ली जाती है। जी हां, यह बात एकदम सच है। सभा-चुनावी रैलियां को सफल बनाने के लिए ठेकेदार कार्यकर्ताओं और लेबर की व्यवस्था करने के लिए मोटी राशि वसूलकर ठेका ले रहे हैं।
दिल्ली जैसे बडे़ शहरों में नेताओं की रैलियों और सभाओं को सफल बनाने के लिए ठेके पर भीड़ जुटाने का कल्चर अब दिल्ली के ही नजदीक अपने मथुरा जनपद में भी आ चुका है। हालांकि यह खेल थोड़ा पुराना हो चुका है लेकिन जब भी किसी भी पार्टी के बडे़ नेता की रैली अथवा सभा होती है तो यह मुद्दा ताजा होकर सामने आ जाता है। राजनेताओं की सभाओं में हजारों की संख्या में जुटने वाली कार्यकर्ताओं की भीड़ ठेके पर जुटाई जाती है। इससे नेताओं की रैलियां असफल नजर आती हैं और ठेकेदारों को दिए गए पैसे वापस लेने की जद्दोजहद भी होती है। किसी भी पार्टी के नेताओं की चुनावी रैलियां और सभाओं आदि में तब तक कार्यकर्ताओं की हजारों की भीड़ नजर नहीं आती है। जब तक कि ठेकेदार उस सभा को सफल बनाने के लिए कार्यकर्ताओं को लाने का ठेका नहीं लेता। ठेका भी पैकेज के माफिक तैयार किए जाते हैं। इस पैकेज में प्रति व्यक्ति निर्धारित रकम, खाने की राशि और आने जाने का किराया शामिल रहता है। यदि कार्यकर्ता अपने दोपहिया अथवा चौपहिया वाहन से सभा में जा रहा है तो उसके लिए ईंधन की भी व्यवस्था की जाती है। इसकी जानकारी मिलने पर कर्मठ कार्यकर्ता सभाओं और रैलियों में जाने पर असहज नजर आता है। आगरा में आयोजित पीएम मोदी की रैली में भी इस बात की काफी चर्चा रही कि ठेकेदारों ने प्रति कार्यकर्ता 200 रुपए की राशि वसूली हुई है। इसकी पुष्टि भाजपा के ही एक वरिष्ठ कार्यकर्ता ने भी की। मांट के ठाकुर कुंदन सिंह जो कि तमाम हिंदूवादी संगठनों से जुड़े हुए हैं उनसे जब विषबाण की टीम ने बात की तो उन्होंने बताया कि नौ दिसबंर को दिल्ली में राम मंदिर निर्माण के लिए आयोजित हुए धरना प्रदर्शन में भी क्षेत्र से भीड़ ले जाने का ठेका तय हुआ था। इसकी जानकारी मिलने पर काफी विरोध भी हुआ था। मांट क्षेत्र से बसें तो गई थीं लेकिन उनमें निष्ठावान कार्यकर्ताओं की संख्या कम थी। नौ जनवरी को आगरा में आयोजित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली में भी ठा. कुंदन सिंह नहीं गए। वह कहते हैं कि उनके नाम पर ठेकेदार वसूली कर रहे हैं। ऐसे में निष्ठावान कार्यकर्ता चुनावी सभाओं में जाने पर असहज महसूस करते हैं।

सभा सफल बनाने के लिए की जाती है मजदूरों की भी व्यवस्था
कार्यकर्ता न मिलने पर विभिन्न स्थानों से लेबर बुलाकर नेताओं के भाषण पर तालियां बजाने के लिए लेबर की व्यवस्था की जाती है। जब लेबर नहीं मिलती तो भीड़ जुटाने के ठेकेदारों के समक्ष परेशानी खड़ी हो जाती है। गत वर्ष संपन्न हुए नगर निगम के चुनाव से पहले डेंपियर नगर स्थित जुबली पार्क में आयोजित योगी आदित्यनाथ की सभा में जब कार्यकर्ताओं की भीड़ कम दिखाई दी थी तो ठेकेदारों ने होलीगेट, धौलीप्याऊ तिराहा, जीआईसी तिराहा, लक्ष्मीनगर चौराहा आदि से लेबर की व्यवस्था कर सभा में भीड़ जुटाई थी। सभा के लिए लाई गई लेबर से दिहाड़ी की राशि तय हुई थी लेकिन जब सभा समाप्त हुई तो ठेकेदार गायब हो गए और लेबर ठेकेदार को ढूंढती रही। इसे लेकर जुबली पार्क में लेबर की भीड़ ने काफी हंगामा भी किया था। जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में इस तरह की बातें सामने आती रही हैं।