अब भगवान को जातियों में बांट रहे लोकतंत्र के ठेकेदार

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दिल्ली। राजनीति जो न कराए वह कम ही है। यह कहावत इस समय पूरी तरह चरितार्थ हो रही है। हाल ही में पांच राज्यों में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में भगवान को जातियां में बांटने का जो सिलसिला शुरु हुआ है। वह अभी तक थमा नहीं है। उस पर तुर्रा यह है कि यह उलट-पुलट बयानबाजी स्वयं को धर्मप्रेमी कहने वाली पार्टी भाजपा के ही नेता कर रहे हैं। इस बयानबाजी पर धर्म के तथाकथित ठेकेदारों की चुप्पी भी साल रही है। यदि इस तरह के बयान किसी अन्य पार्टी के राजनेताओं ने की होती तो शायद अब तक भूचाल आ चुका होता।
छत्तीसगढ़, राजस्थान, मध्यप्रदेश, तेलंगाना और मिजोरम में हाल में चुनाव संपन्न हुए हैं। इनमें से तीन राज्यों में भाजपा की सरकार को हटाकर अब कांग्रेस ने कब्जा जमा लिया है। इन्हीं चुनावों में भाजपा नेताओं ने भगवान को जातियों में बांटना शुरु किया है। यह सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। सबसे पहले यूपी के मुख्यमंत्री और संत योगी आदित्यनाथ ने राजस्थान में चुनाव प्रचार के दौरान हनुमानजी को दलित बताया। ताकि दलित वोटों को लुभाया जा सके। इसके बाद केंद्रीय मंत्री सतपाल सिंह ने कहा कि हनुमानजी दलित नहीं वरन् आर्य थे क्योंकि उस युग में देश में कोई जाति व्यवस्था नहीं थी। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष नंद कुमार साय कहते हैं कि हनुमानजी न तो दलित थे न ही आर्य थे वह तो अनुसूचित जाति के आदिवासी थे। उनका तर्क है कि हनुमानजी को वानर माना जाता है और ओरांव आदिवासियों का एक गोत्र है टिग्गा, आदिवासियों द्वारा बोली जाने वाली कुरुख भाषा में टिग्गा का अर्थ वानर होता है। जबकि कंवार आदिवासियों में एक गोत्र ही है जिसे हनुमान कहा जाता है। अब उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री चौधरी लक्ष्मीनारायण कह रहे हैं कि हनुमानजी दलित, अनुसूचित जाति और आर्य नहीं थे वह तो जाट जाति से थे। वहीं भाजपा के अल्पसंख्यक समुदाय से आने वाले एमएलसी बुक्कल नवाब ने उन्हें मुस्लिम ही बना दिया है। उनका तर्क है कि मुस्लिमों में हनुमानजी से मिले जुले नाम रखे होते हैं जैसे रहमान, रमजान, फरमान, अरमान, कुर्बान आदि।
भाजपा नेताओं की इस बदजुबानी पर तथाकथित धर्म के ठेकेदार और संत समुदाय ने भी अपने मुंह में दही जमा ली है। कोई भी धर्मप्रेमी इस भगवान के जाति बंटवारे पर बोलने के लिए तैयार नहीं है। इन बयानों पर धर्मप्रेमियों की भृकुटि न तनना देश की जनता को अखर रहा है। यदि यही बयानबाजी समाजवादी, बसपा और कांग्रेस सहित अन्य पार्टियों के राजनेताओं ने की होतीं तो अब तक यह लोग देशद्रोही और गद्दार साबित हो चुके होते।