लोकसभा चुनावः ब्राह्मण प्रत्याशी पर नहीं दिखाया मतदाताओं ने भरोसा

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मथुरा। योगेश्वर श्रीकृष्ण की जन्मभूमि धार्मिक दृष्टि की वजह से काफी महत्वपूर्ण है। यही कारण है कि सभी राजनैतिक पार्टियों के लिए मथुरा की सीट हर मायने से काफी मायने रखती है। लगभग सभी पार्टियां चाहती हैं कि मथुरा सीट पर उनके प्रत्याशियों का कब्जा हो। मथुरा सीट पर ब्राह्मण और वैश्य की जुगलबंदी का झुकाव लगभग हर पार्टियां चाहती हैं। मथुरा सीट जाट बाहुल्य मानी जाती है लेकिन यहां ब्राह्मण और वैश्य मतदाताओं की संख्या भी काफी अधिक है। इसके बाद भी अभी तक मथुरा लोकसभा सीट से ब्राह्मण प्रत्याशी सांसद नहीं चुना जा सका है। इसकी टीस मथुरा के स्थानीय ब्राह्मणों को सालती रही है।
मथुरा को तीन लोक से न्यारी यूं ही नहीं कहा जाता है। इस सीट पर बडे़-बड़े धुरंधरों को मात मिल चुकी है। जनपद में अपनी संख्या के लिए प्रसिद्ध ब्राह्मण यहां से कभी सांसद नहीं चुने जा सके हैं। जबकि लोकसभा सीट पर भाजपा और बसपा जैसी राष्ट्रीय पार्टियों से भी ब्राह्मण लोकसभा प्रत्याशी के रुप में चुनावी मैदान में अपनी ताकत आजमा चुके हैं। इनमें बहुजन समाज पार्टी से वर्ष 1999 में कमलकांत उपमन्यु, वर्ष 2009 में मांट सीट से आठ बार के विधायक पं. श्यामसुंदर शर्मा और वर्ष 2014 में पं. योगेश द्विवेदी प्रमुख हैं। वहीं भाजपा से वरिष्ठ राजनेता और प्रधानमंत्री रहे अटलबिहारी वाजपेयी भी चुनाव लड़ चुके हैं। इसके बाद भी अटलबिहारी वाजपेयी यहां से अपनी जमानत तक नहीं बचा सके थे। हालांकि बसपा से प्रत्याशी रहे पं. श्यामसुंदर शर्मा वर्ष 2009 में 2,10,257 वोट लेकर दूसरे नंबर पर रहे थे लेकिन यह मत नाकाफी रहे कि उन्हें जिताने में कामयाब रहते। इस चुनाव में राष्ट्रीय लोकदल के जयंत चौधरी 3,79,870 वोट पाकर सांसद बने थे। वर्ष 1999 में कमलकांत उपमन्यु को 1,18,720 वोट मिले थे और वह तीसरे नंबर पर रहे थे। जबकि इस चुनाव में भाजपा के चौ. तेजवीर सिंह 2,10,212 मत पाकर विजयी रहे। वर्ष 2014 में पं. योगेश द्विवेदी भी लोकसभा चुनाव में तीसरे नंबर पर रहे। उन्हें 1,73,572 वोट मिले। इस चुनाव में सिने तारिका ड्रीम गर्ल हेमामालिनी भाजपा से सांसद चुनी गई थीं। उन्हें 5,74,633 वोट मिले थे। अब वर्ष 2019 में प्रदेश सरकार में ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा लोकसभा चुनाव में ताल ठोकते नजर आ रहे हैं। हालांकि वर्तमान सांसद हेमामालिनी भी भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के लगातार संपर्क में हैं। वह खुद भी मथुरा सीट से लड़ना चाहती हैं और मुंबई के बाद अब मथुरा को अपनी कर्मभूमि बनाना चाहती हैं। अब देखने वाली बात होगी कि क्या भाजपा से ब्राह्मण प्रत्याशी के रुप में श्रीकांत शर्मा चुनाव लड़ेंगे। और मथुरा को पहली बार ब्राह्मण के रुप में सांसद मिल सकेगा अथवा नहीं। क्या वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में यह तिलिस्म टूट सकेगा।