पंचायती राज विभाग में समायोजन के नाम पर हो रहा स्थानांतरण का खेल

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– बीते तीन माह में लगभग डेढ़ सौ से अधिक सफाई कर्मियों का किया गया मनचाहा स्थानांतरण
– स्थानांतरण को दिया जा रहा समायोजन का नाम, खूब हो रही वसूली

मथुरा। इन दिनों जिला पंचायती राज अधिकारी कार्यालय में बिना नीति के ही स्थानांतरण किए जाने का मामला सामने आ रहा है। बीते तीन माह में ही लगभग डेढ़ सैकड़ा से अधिक सफाई कर्मियों को उनकी मनचाही ग्राम पंचायत में स्थानांतरित किया गया है। स्वयं को बचाने के लिए इन स्थानांतरण को समायोजन का नाम दिया जा रहा है। ट्रांसफर के इस खेल में लाखों की वसूली की चर्चा हो रही है।
वर्ष 2008 में समूचे उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायतों में सफाई कर्मचारियों की नियुक्तियां हुई थीं। इसके तहत जनपद में करीब 850 सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति हुई। इन्हीं कर्मचारियों को अब मनचाहे गांवों में तैनाती दिए जाने का खेल खेला जा रहा है। इस खेल में अधिकारियों की भी मिलीभगत का आरोप है। अक्टूबर से लेकर दिसंबर माह तक ही करीब डेढ़ सैकड़ा से अधिक सफाई कर्मचारियों को मनचाही ग्राम पंचायत में स्थानांतरित किया गया है। आए दिन ट्रांसफर लिस्ट जारी की जा रही है। इस लिस्ट में कभी चार तो कभी पांच तो कभी इससे भी अधिक सफाई कर्मियों के नाम शामिल होते हैं। कई कर्मी तो ऐसे भी हैं जिन्हें बार नई तैनाती दी जा रही है। स्थानांतरण के इस खेल को किसी भी जांच से बचाने के लिए समायोजन का नाम दिया जा रहा है। जबकि समायोजन के नाम पर खुले तौर पर ट्रांसफर हो रहे हैं। बताया जाता है कि जिला पंचायती राज विभाग कार्यालय में बैठने वाले एक सहायक विकास अधिकारी पंचायत इस खेल में अहम भूमिका निभा रहे हैं। यही अधिकारी उच्च अधिकारियों के वरदहस्त के चलते अपनी मनमानी करते हुए आए दिन स्थानांतरित सूची जारी कर रहे हैं। जबकि उक्त अधिकारी की जिला कार्यालय की जगह किसी विकास खंड पर तैनाती होनी चाहिए। उप्र पंचायती राज ग्रामीण सफाई कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष राकेश कुमार और जिला मंत्री धर्मेंद्र सिंह का कहना है कि समायोजन के नाम पर स्थानांतरण के खेल की पूर्व में भी अधिकारियों से शिकायत की गई है लेकिन अभी तक इस पर कोई कार्यवाही नहीं की गई है। इससे अधिकारियों की मंशा पर भी सवाल उठ रहे हैं।
जब जिला पंचायती राज अधिकारी डॉ. प्रीतम सिंह से विषबाण ने बात की तो उन्होंने कहा कि विभाग में स्थानांतरण नहीं हो रहे हैं वरन् समायोजन किए जा रहे हैं। क्लस्टर के माध्यम से सफाई कर्मचारियों को इधर-उधर किया जा रहा है। जब उनसे पूछा गया कि ऐसी कौन सी समायोजन प्रक्रिया है कि बीते तीन माह में ही करीब डेढ़ सैकड़ा से अधिक सफाई कर्मचारियों को इधर-उधर किया जा रहा है। साथ ही ऐसे भी कुछ कर्मी है जिन्हें बार-बार समायोजित किया जा रहा है तो अधिकारी उखड़ गए और बोले कि आप कौन होते हैं मुझसे यह सवाल करने वाले। मुझसे सिर्फ डीएम ही पूछ सकते हैं।