मथुरा: शिक्षक भर्ती घोटाले का मास्टरमाइंड आलोक उपाध्याय गिरफ्तार

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मथुरा। प्रदेश के चर्चित शिक्षक भर्ती घोटाले के मास्टर माइण्ड एवं अखिल भारतीय यूटा के राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक उपाध्याय को करीब 6 माह बाद एसटीएफ की टीम ने गिरफ्तार कर पुलिस के हवाले किया है।
मथुरा जनपद के चर्चित शिक्षक भर्ती घोटाले के प्रमुख आरोपी एवं यूटाईटेड टीर्चर्स एशोसियेशन (अखिल भारतीय यूटा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक उपाध्याय एवं उनके सहपाठी एवं जिलाध्यक्ष वेगराज चैधरी सहित अन्य के खिलाफ 18 जून 2018 को शिक्षक भर्ती घोटाले में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। जिसमें दोनों आरोपी राजनैतिक संरक्षण में खुलेआम घूम रहे थे। लेकिन शासन द्वारा सख्त रूख अपनाये जाने पर वह फरार हो गये। जिनकी तलाश में एसटीएफ/पुलिस जुटी हुई थी। बताते हैं कि मुखबिर की सूचना पर एसटीएफ टीम द्वारा रात्रि को आलोक उपाध्याय को गिरफ्तार कर लिया गया जिसे मथुरा कोतवाली में लाया गया है।
‘‘विषबाण’’ टीम द्वारा कोतवाली जाकर एसटीएफ अधिकारी एवं कोतवाल विकास तोमर से सम्पर्क करने पर कहा कि इसकी जानकारी बाद में दी जायेगी। गिरफ्तारी की सूचना पर आलोक उपाध्याय के परिजन-रिश्तेदार भी कोतवाली पहुंचना शुरू हो गये थे। शिक्षक भर्ती घोटाले के मास्टरमाइण्ड आलोक उपाध्याय की गिरफ्तारी के बाद उसका एक और प्रमुख सहयोगी एवं यूटा का जिलाध्यक्ष वेगराज चाहर अभी तक फरार है जबकि अन्य सहपाठी मेरठ जेल में बंद हैं। जबकि घोटाले में शामिल मथुरा जेल में बंद कई आरोपी जमानत कराकर जेल से बाहर आ चुके हैं।

यूटाः जिसने शिक्षा विभाग को जमकर लूटा

यूनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन या अखिल भारतीय यूटा। इसके पदाधिकारी आलोक उपाध्याय, पुष्पेन्द्र सिंह, वेगराज सिंह जो विजिलेंस में अपनी पकड़ के दम पर न केवल अपने अनर्गल कार्य कराते थे, बल्कि अब तक विजिलेंस के साथ मिलकर कई कर्मचारियों को भी फंसा चुके हैं। यूटा के एक पदाधिकारी कारब निवासी पुष्पेंद्र सिंह को एसटीएफ अपनी गिरफ्त में ले चुकी है और आलोक उपाध्याय व वेगराज चौधरी के खिलाफ भर्ती घोटाले में एफआईआर कराई गई है ये लोग फरार चल रहे थे। जिसके बाद वह फरार हो गये थे। जिसमें से आज आलोक उपाध्याय को गिरफ्तार कर लिया गया है।
सूत्रों की माने तो यूटा का काम विजिलेंस को मैनेज करने के साथ विजिलेंस के नाम पर उन अधिकारियों को ब्लैकमेल करना था जो इनका कार्य नहीं करते थे। जिस खंड शिक्षा अधिकारी ने शिक्षक भर्ती घोटाले में उनका साथ नहीं दिया उन्हें विजिलेंस के नाम पर धमकाया गया। जिन प्रधान अध्यापकों ने अपने विद्यालयों में फर्जी शिक्षकों की नियुक्ति होने में रोड़ा अटकाया उन्हें भी विजिलेंस के नाम पर डरा धमका कर वहां फर्जी शिक्षकों की तैनाती दिला दी गई। इसके बदले में यूटा के पदाधिकारी अपने लोगों को फर्जी शिक्षक के तौर पर नियुक्ति दिलाते रहे हैं।
इनके साथ ही राजवीर गुर्जर नामक शिक्षक की भूमिका पूरे घोटाले में बेहद महत्वपूर्ण रही है किसी भी अधिकारी के फर्जी हस्ताक्षर करने में माहिर इस शिक्षक के फर्जी हस्ताक्षर के आधार पर ही गणित विज्ञान शिक्षक भर्ती में बैक डेट में सौ से अधिक फर्जी नियुक्तियां दिलाई गईं थीं। जिसे एसटीएफ ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया जबकि यूटा के राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक उपाध्याय को आज एसटीएफ ने गिरफ्तार कर कानून के हवाले कर दिया। जबकि यूटा के जिलाध्यक्ष वेगराज चाहर अभी फरार हैं। जिसकी तलाश एसटीएफ जोर-शोर से कर रही है।

जानें क्या है पूरा मामला…

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