पुलिस के तांडव को देख कांप उठी जनता

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मथुरा/बाजना। ‘‘ना भ्रष्टाचार, ना गुण्डाराज’’ का नारा उ.प्र. पुलिस किस तरह साकार कर रही है इसका नजारा दूसरी बार बाजना पुलिस चौकी के कारनामे के रूप में सामने आया है। जिसमें कार में गांजा होने की सूचना के नाम पर अलीगढ़ के दम्पत्ति से मारपीट कर दो लाख की वसूली करने के बाद छोड़ा गया। जिसकी शिकायत पर मांट सीओ को जांच के आदेश दिये हैं।
उ.प्र. के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बेहतर कानून के दावों की खाकी वर्दी ही किस तरह धज्जियां उड़ा रही है इसका नजारा जनपद के नौहझील थाना क्षेत्र के कस्बा बाजना पुलिस चौकी में दूसरी बार देखने को मिला जिसमें 25 अक्टूबर 2018 को अलीगढ़ जनपद के थाना टप्पल, जिला अलीगढ़ के गांव खेड़िया खुर्द निवासी रवि अपनी पत्नी प्रियंका, दोस्त नवरत्न के साथ अपनी बहिन से मिलने के लिये कार से आ रहे थे। जिन्हें कस्बा बाजना चौकी प्रभारी धीरज गौतम, दरोगा मुनेन्द्र सहित 5 पुलिस कर्मी खानपुर रोड़ पर चैकिंग के बहाने रोककर चौकी ले आये, जहां पुलिस चौकी पर पूछताछ के नाम पर रवि एवं उसके दोस्त नवरत्न के साथ जमकर मारपीट की बल्कि पत्नि के साथ छेड़छाड़ की गई। मारपीट के दौरान चीख-पुकार की आवाज पर ग्रामीणों के एकत्रित हो जाने के बाद पुलिस तीनों को हसनपुर पुलिस चौकी ले गई। जहां करन्ट लगाकर एवं लाठी-डण्डों से मारपीट के बाद चौकी पर कार्यरत सिपाही पवन भाटी ने रवि के घरवालों को फोन कर छोड़ने के बदले दो लाख की मांग की। जिस पर परिजनों ने पुलिस को 2 लाख देकर तीनों को पुलिस के चंगुल से छुड़ाया और अलीगढ़ ले जाकर डॉक्टरी परीक्षण कराया।
सोमवार को ग्रामीणों के साथ पीड़ित एसएसपी बबलू कुमार से मिलने पहुंचे जहां उनके ना मिलने पर अपर पुलिस
अधीक्षक देहात आदित्य कुमार शुक्ला से मुलाकात कर पूरे घटनाक्रम से अवगत कराते हुए दोषी पुलिस कर्मियों के विरू( कार्यवाही की मांग की। जिसपर सीओ मांट को जांच दे दी गई। बाजना पुलिस कार में गांजा होने की सूचना बता रही है तो कभी साल्वर गैंग होना बता रही है। इससे पूर्व भी मां-बेटे के मध्य जमीनी विवाद में छत्तीसगढ़ में एसटीएफ में कार्यरत जवान जितेन्द्र उर्फ जीतू को कथित चोरी की बाइक के आरोप में पकड़ने का विरोध करने पर उस पर ताबड़तोड़ थप्पड़ बरसाये। जिसका ग्रामीणों द्वारा विरोध करने पर पुलिस ने ग्रामीणों पर लाठियां बरसाइंर्। इस घटना का वीडियो ‘‘विषबाण’’ द्वारा वायरल किया गया। जिसमें एसएसपी बबलू कुमार द्वारा सीओ मांट को जांच सौंपी गई। लेकिन दोषियों के खिलाफ आजतक कोई कार्यवाही नहीं होने से दोषी पुलिस कर्मियों ने दूसरी घटना को अंजाम देकर अपने बुलन्द हौसलों का परिचय दे दिया। जिससे पुलिस अफसरों की कार्य प्रणाली पर भी प्रश्न चिन्ह लगता जा रहा है।

कथित पत्रकारों ने फिर डाला घटना पर पर्दा

मथुरा/ बाजना। ‘‘रस्सी को सांप, सांप को रस्सी’’ बनाने में पुलिस भले ही माहिर मानी जाती हो। लेकिन उससे भी चार कदम आगे कथित पत्रकार पुलिस से कदम ताल करते हुए घटना का रूप बदलने में गिरगिट को भी मात देते नजर आ रहे हैं।
पुलिस एवं दलाल पत्रकारों का गठजोड़ जनपद में किस तरह घटनाओं का रूप बदलने में माहिर होता जा रहा है इसका खुलासा दूसरी बार बाजना में देखने को मिला। जिसमें अलीगढ़ जनपद के दम्पत्ति परिवार के साथ हुई मारपीट की चीखें जनता तक तो पहुंच गईं लेकिन कथित पत्रकारों को सुनाई नहीं दीं। जबकि दलाल पत्रकारों का जमघट हर समय पुलिस चौकी पर लगा रहता है। पीड़ितों की आवाज को कथित पत्रकारों द्वारा दबा दिये जाने पर चार दिन बाद पीड़ित अपना दर्द जताने एवं पुलिस की कार्यप्रणाली से अवगत कराने के लिये वरिष्ठ पुलिस
अधीक्षक कार्यालय पहुंचे तब जाकर पीड़ितों का दर्द मीडिया में आ सका। जिसमें क्षेत्रीय कथित पत्रकार पुलिस के साथ खड़े नजर आये। इससे पूर्व भी बाजना पुलिस द्वारा एसटीएफ जवान से मारपीट की घटना को एसटीएफ जवान से सांठ-गांठ कर कथित पत्रकारों द्वारा दबा दिया गया। जिसका वीडियो ‘‘विषबाण’’ द्वारा वायरल किये जाने के बाद कथित पत्रकारों द्वारा पुलिस की रची गई कहानी को ही प्राथमिकता देते हुए वास्तविक घटना को दबाया गया। जिससे पुलिस के साथ-साथ दलाल पत्रकारों के गठजोड़ की चर्चाएं क्षेत्र में हर व्यक्ति की जुबान पर चल रही हैं।
जनता का कहना है कि निर्दोषों के उत्पीड़न में जितनी भूमिका पुलिस की है उससे ज्यादा भूमिका क्षेत्रीय चन्द दलाल पत्रकारों की है। जो पुलिस से छोड़ने बंद कराने के नाम पर मोटी रकम वसूलते हैं। जिससे खाकी का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है।