विद्युत विभाग ने बिना कनैक्शन के उपभोक्ता को भेजा 25,599 का बिल, लगा 10 हजार का जुर्माना

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मथुरा। ‘‘अंधेर नगरी-चौपट राजा’’ की कहावत विद्युत विभाग पर सटीक चरितार्थ हो रही है। अभी तक गलत बिल भेजे जाने के मामले ही सामने आते रहे हैं लेकिन इससे भी चार कदम आगे चलकर विद्युत विभाग ने बिना कनैक्शन के उपभोक्ता को 25,599 का बिल भेज दिया। जिसे उपभोक्ता फोरम ने निरस्त करते हुए विद्युत विभाग पर 10 हजार का जुर्माना लगाते हुए दो हजार वाद व्यय के रूप में अदा करने के आदेश दिये हैं।
प्राप्त विवरण के अनुसार बिजेन्द्र सिंह पुत्र भूदेव सिंह निवासी श्याम पुरम कॉलोनी जमुनापार मथुरा अपने छोटे भाई हरिओम के साथ उसके मकान में पिछले कई वर्षों से रह रहा है। मकान का कनैक्शन हरिओम के नाम होने पर उसका नियमित भुगतान किया जाता रहा। जबकि चचेरे भाई करन सिंह अपने पैत्रिक गांव बहादीन मकान में आटा चक्की लगाकर अपना पालन पोषण कर रहा है जिसका बिल भी नियमित रूप से जमा करता रहा है। जबकि बिजेन्द्र सिंह के नाम कोई कनैक्शन ना होने तथा नये कनैक्शन के लिये कोई आवेदन ना करने के बावजूद भी 27,675 रूपये का विद्युत बिल उसके नाम भेज दिया गया। जिसे निरस्त कराने के लिये विभाग के अधिकारियों, तहसील दिवस, एसडीओ राया से गुहार लगाई गई। लेकिन कोई सुनवाई नहीं की गई।
पीड़ित ने उपभोक्ता फोरम में शिकायत दर्ज कराते हुए बिल को निरस्त कर न्याय की गुहार लगाई। जिस पर फोरम अध्यक्ष योगेन्द्र सिंह, सदस्य सूफिया अशरफ ने सुनवाई की। जिसमें विद्युत विभाग ने भेजे गये बिल को सही बताते हुए उपभोक्ता द्वारा बिल को जमा ना करने की दलील दी। जबकि उपभोक्ता की तरफ से दलील दी गई कि उसके द्वारा विद्युत कनैक्शन के लिये कोई आवेदन ही नहीं किया गया। बल्कि जमानत राशि भी जमा नहीं कराई गई। फोरम में विद्युत विभाग उपभोक्ता के आवेदन का कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका। जिसपर फोरम ने विद्युत कनैक्शन एवं बिल को फर्जी मानते हुए 28,599 रूपये के बिल को निरस्त करते हुए पीड़ित उपभोक्ता को मानसिक उत्पीड़न के लिये जिम्मेदार मानते हुए विद्युत विभाग पर 10 हजार का जुर्माना तथा वाद व्यय के रूप में 2 हजार रूपये 30 दिन के अन्दर अदा करने के आदेश दिये हैं।

एमवीडीए ने दी कम जमीन, फोरम ने दिये रकम वापिसी के आदेश

मथुरा। उपभोक्ता फोरम द्वारा मथुरा-वृन्दावन विकास प्राधिकरण की मनमानी से त्रस्त उपभोक्ता को राहत देते हुए प्लाट की कम दी गई जमीन के बदले ब्याज सहित जमीन की वर्तमान कीमत की राशि तथा वाद व्यय के रूप में 4 हजार की राशि 30 दिन के अन्दर अदा करने के आदेश दिये हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार कमलेश गोयल पत्नी दीन दयाल अग्रवाल निवासी बी 55 कृष्णा पुरम बिरला मन्दिर मथुरा ने मथुरा-वृन्दावन विकास प्राधिकरण से 112.5 वर्ग मीटर का प्लाट खरीदा था। जिसमें मौके पर 108.75 वर्ग मीटर प्लाट दिया गया। जिसकी शिकायत विभागीय अधिकारियों से करते हुए जमीन पूरी करने या 3.75 वर्गमीटर जमीन की कीमत वापिस करने का मांग की गई। लेकिन प्राधिकरण अफसरों ने कोई ध्यान नहीं दिया। जिसके बाद पीड़िता ने उपभोक्ता फोरम में परिवाद दर्ज कराया। फोरम अध्यक्ष योगेन्द्र सिंह सदस्य सूफिया अशरफ ने मामले की सुनवाई की। जिसमें विकास प्राधिकरण की तरफ से दलील दी गई कि परिवादिनी को पंजीकृत डीड को संशोधित करने के लिये सूचना दी गई जिससे परिवादिनी को कम भूमि का मूल्य वापिस किया जा सके। किन्तु परिवादिनी द्वारा कोई प्रक्रिया शुरू नहीं की गई। जिससे धनराशि वापिस नहीं की जा सकी। प्राधिकरण की ओर से परिवाद निरस्त करने की मांग की गई। जबकि परिवादिनी कमलेश गोयल की ओर से विकास प्राधिकरण के दावों को गलत बताते हुए कम दी गई जमीन की राशि दिलाने की मांग करते हुए अनेक साक्ष्य प्रस्तुत किये।
फोरम ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद विकास प्राधिकरण को दोषी मानते हुए 3.75 वर्ग मीटर जमीन की कीमत प्रचलित दर से 6 प्रतिशत साधारण ब्याज के साथ एवं परिवाद व्यय के रूप में 4 हजार की राशि 30 दिन के अन्दर पीड़ित उपभोक्ता को अदा करने के आदेश दिये हैं।

मेडीक्लेम में मिलेंगे उपभोक्ताओं को 2.20 लाख

मथुरा। मेडीक्लेम पॉलिसी के भुगतानों को मनमानी तरीके से निरस्त किये जाने पर उपभोक्ता फोरम ने दो अलग-अलग मामलां में पीड़ितों को राहत देते हुए इलाज पर खर्च की गई 2.20 लाख से अधिक की राशि ब्याज सहित अदा करने के आदेश बीमा कम्पनियों को दिये हैं।
बीमा कम्पनियां उपभोक्ताओं के दावों को मनमानी तरीके से किस तरह निरस्त कर रहीं हैं इसका खुलासा उपभोक्ता फोरम के दो अलग-अलग निर्णयों में सामने आया है। पहला मामला दानबिहारी अग्रवाल ;पोशाक वालेद्ध पुत्र ओंकारमल अग्रवाल निवासी 354 गोवर्धन गेट पुराना शहर वृन्दावन ;मथुराद्ध ने दि ओरियेन्टल इंश्योरेंस कम्पनी से वर्ष 2011 में 2 लाख की स्वास्थ्य पॉलिसी कराई जिसे 2017 तक लगातार प्रीमियम जमा कर चलाता रहा।
बीमा पॉलिसी अवधि के दौरान नवम्बर 2016 को हृदय की बीमारी के चलते नयति मल्टी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पीटल मथुरा में दानबिहारी अग्रवाल को भर्ती कराया गया। जिन्हें 15 नवम्बर को इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई। जिसमें इलाज पर 2.25 लाख की राशि खर्च हो गई। जिसका क्लेम बीमा कम्पनी पर किया गया। जिसे मनमानी तरीके से निरस्त कर दिया गया। पीड़ित ने जिला उपभोक्ता फोरम में परिवाद प्रस्तुत किया। जिसमें सुनवाई के दौरान बीमा कम्पनी द्वारा क्लेम निरस्त करने के दो कारण प्रस्तुत किये जिसमें वर्ष 2013, 2015 में तीन-तीन दिन विलम्ब से प्रीमियम जमा कराना, दूसरा बीमारी छिपाकर पॉलिसी लेना बताया गया। फोरम अध्यक्ष योगेन्द्र सिंह सदस्य सूफिया अशरफ ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद बीमा कम्पनी की दलीलों को ठुकराते हुए माना कि तीन-तीन दिन विलम्ब के बावजूद भी पॉलिसी का नवनीकरण किया गया जबकि पूर्व से बीमार होने का कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया। फोरम ने बीमा कम्पनी द्वारा मनमानी तरीके से दावा निरस्त किये जाने पर सेवा में कमी मानते हुए इलाज पर खर्च हुई 1.80 लाख की राशि 6 प्रतिशत ब्याज के साथ तथा वाद व्यय 4 हजार रूपये 30 दिन के अन्दर बीमा कम्पनी को अदा करने के आदेश दिये हैं।
दूसरा मामला कैलाश प्रसाद गोयल पुत्र यादराम गोयल निवासी 88ए मानस नगर महोली रोड़ मथुरा का है। जिन्होंने दि न्यू इण्डिया इंश्योरेन्स कम्पनी से 2 लाख की स्वास्थ्य पॉलिसी कराई। पॉलिसी अवधि के दौरान उनकी पत्नी सीमा की घुटने की हड्डी टूट गई। जिसका इलाज आगरा नर्सिंग होम में कराया गया। जिस पर 40 हजार का खर्चा आया।
पीड़ित ने इलाज पर खर्च की राशि का दावा किया तो कम्पनी द्वारा पुनः इलाज पर खर्च की गई राशि के बिल मांगे जिस पर पीड़ित ने पत्र लिखकर पूर्व में समस्त बिल वाउचर देने तथा अन्य वाउचर न होने से अवगत कराते हुए अस्पताल से जानकारी करने के सम्बंध में लिखा। लेकिन बीमा कम्पनी ने पुनः पत्र लिखकर बिल वाउचर की मांग की जिसमें असमर्थता व्यक्त करते हुए पत्र लिखा गया। जिसके बाद दावा निरस्त कर दिया गया। फोरम अध्यक्ष योगेन्द्र सिंह सदस्य सूफिया अशरफ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद बीमा कम्पनी को दोषी मानते हुए इलाज पर खर्च हुई 40,032 रूपये 6 प्रतिशत साधारण ब्याज के साथ एवं परिवाद व्यय के रूप में चार हजार रूपये 30 दिन के अन्दर पीड़ित उपभोक्ता को अदा करने के आदेश दिये हैं।