सावधान! ‘‘मीडिया गैंग’’ आ रहा है….

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मफतलाल अग्रवाल
नई दिल्ली/मथुरा। समाज के अन्दर हुए गुनाहगारों को सामने लाने वाली मीडिया में तमाम गुनाहगार नामी-गिरामी टीवी चैनलों, समाचार पत्रों से लेकर न्यूज पोर्टलों के पत्रकार बनकर कलम और कैमरे को हथियार के रूप में प्रयोग कर कहीं जनता को ठगने में लगे हैं तो कहीं दलाली-ब्लैकमेलिंग, काले कारनामों को अंजाम दे रहे हैं। जिससे पत्रकारिता और पत्रकारों की छवि ध्वस्त होने के कगार पर पहुंच गई है।
देश के चौथे स्तम्भ के रूप में पहचान बन चुकी एवं समाज का आईना कहे जाने वाली मीडिया अब बदनामी के दल-दल में फंसती जा रही है। नामी गिरामी चैनल हो, समाचार पत्र, न्यूज पोर्टल हो या फिर यूट्यूब चैनल इनसे कथित पत्रकारां की पूरे देश में बाढ़ आ गई है। गांव के गली-मोहल्ले से कस्बो-शहरों में पत्रकार और प्रेस लिखे वाहनों की भीड़ नजर आ रही है। थाने-पुलिस चौकियों से लेकर सरकारी कार्यालयों, पत्रकार वार्ताओं में कैमरों-चैनल आईडी के साथ भीड़ नजर आती है। वहीं कथित पत्रकार गरीबों के बांटने वाले राशन विक्रेताओं के इर्द-गिर्द चील-कौवों की तरह मंडराते कभी भी कहीं भी देखे जा सकते हैं। बताते हैं कि सटोरिये, गांजा, अफीम, शराब जैसे काले कारोबार में तमाम कथित पत्रकारों की संलिप्तता सामने आ रही हैं। बल्कि उनसे चौथ वसूली के कारनामे भी आये दिन सामने आते रहते हैं।
बताया जाता है कि कथित पत्रकारों के बीच माफियाओं, अफसरों, मंत्रियों, नेताओं, पुलिस अधिकारियों के साथ फोटो खिंचवाकर ब्लैक मेलिंग-दलाली के कार्यों को अंजाम दे रहे हैं। जिसमें वह अधिकारियों से कार्य कराने के बदले जनता से रकम वसूलते हैं और अपने सम्बंधों के कारण या तो कार्य कराने में सफल हो जाते हैं या फिर दी गई रकम को हड़पने के बाद रकम देने वालों को आंख दिखा देते हैं। हालत यह है कि जो अधिकारी इनके कार्य नहीं करता है उसे किसी ना किसी मामले में फंसाकर सबक सिखाने में पीछे नहीं हटते हैं। इसी तरह पिछले दिनों उ.प्र. के महाराजगंज के जिला परियोजना अधिकारी ;डूडाद्ध सत्येन्द्र कुमार त्रिपाठी ने नौतनवां थाने में गोवा कथित वीडियो बनाकर 15 लाख की चौथ वसूली का मुकदमा अनिल त्रिपाठी, दिलीप त्रिपाठी, अभिमुक्त पाण्डेय उर्फ अमृत पाण्डेय सम्पादक न्यूज वन इण्डिया के विरूद्ध दर्ज कराया गया। जिसमें आरोप है कि उक्त पत्रकार दो वर्ष पूर्व उनके साथ गोवा यात्रा पर गये थे जहां शराब पिलाकर उनसे किन्नरों के साथ डांस कराकर वीडियो बना लिया गया। जिसके नाम पर ब्लैकमेलिंग कर 15 लाख की मांग की गई। जिसे ना देने पर वीडियो वायरल कर दिया गया।

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मध्य प्रदेश के श्यौपुर जिले में सरकारी कर्मचारियों की खबर छपने के नाम पर डरा-धमका कर अवैध वसूली के मामले में दो महिलाओं सहित 4 फर्जी पत्रकारों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। उ.प्र. के फिजियोथेरेपिस्ट डा. सुरेन्द्र कुमार से फर्जी क्लीनिक चलाने के नाम पर 10 हजार की रिश्वत के आरोप में महिला पत्रकार को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। सम्भल में इण्डिया वॉयस के कथित पत्रकार बने बिजेन्दर यादव और उनके दो साथियों पर घर में घुसकर बाथरूम में स्नान कर रही नर्स का वीडियो बनाने, छेड़छाड़-मापीट करने, सोने की चैन लूटने के मामले में नर्स के शोर मचाने पर जनता ने तीनों पत्रकारों की धुनाई कर पुलिस के हवाले कर दिया जिसमें पुलिस ने 452, 354, 323, 356, 504 में मामला दर्ज कर जेल भेज दिया। बिहार के छपरा जिले में राष्ट्रीय चैनल की स्टीकर एवं प्रेस लिखी गाड़ी से 238 अंग्रेजी शराब की बोतल पुलिस ने बरामद कर दो कथित पत्रकारों चन्दन कुमार, वरूण कुमार को जेल भेज दिया।
मध्य प्रदेश के चम्पारण के जाजगीर में फर्जी न्यूज वेब पोर्टल सहारा समय के सम्पादक उत्पल सेन गुप्ता को उसके पत्रकार दिलीप यादव की फर्जी खबर प्रसारित करने के नाम पर 45 हजार की चौथ मांगे जाने पर जेल भेज दिया गया। उ.प्र. के रायबरेली के ऊंचाहार तहसील समाधान दिवस में जिलाधिकारी संजय खत्री, एसपी सुजाता सिंह के सामने 5 कथित पत्रकार अपना जलवा दिखाने लग तो उनकी जांच की गई जिसमें फर्जी पाये जाने पर पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। पत्रकारिता को कलंकित करने का खेल किस तरह खेला जा रहा है इसका खुलासा मथुरा में पिछले दिनों हुआ जहां एक युवती सहित चार पत्रकारों के विरूद्ध शिक्षक संजय द्वारा 10 लाख की चौथ वसूली का मामला थाना हाइवे में दर्ज कराया गया। जिसमें 10 लाख की अवैध वसूली में मध्यस्था की भूमिका निभाने वाले उपजा के उपाध्यक्ष एवं बृज प्रेस क्लब के अध्यक्ष कमलकान्त उपमन्यु सहित शिक्षक संजय उसके दोस्त यशपाल पचईयां के खिलाफ महिला पत्रकार द्वारा न्यायालय के आदेश पर थाना फरह में बलात्कार, छेड़छाड़ के आरोप लगाते हुए मामला दर्ज कराया गया है।
इसी तरह मथुरा के कृष्णा नगर पुलिस चौकी द्वारा सौंस विक्रेता से फर्जी फूड इंस्पेक्टर बनकर 15 हजार की चौथ वसूली के आरोप में सुबीर सेन नामक पत्रकार को जेल भेज दिया गया। हालांकि फूड विभाग के अफसरों की कार्यशैली भी कटघरे में है। पिछले दिनों ही हाथरस के हसायन क्षेत्र में फर्जी स्वास्थ्य विभाग की टीम बनकर अस्पताल, दुकानों की चैकिंग करने वाले 8 पत्रकारों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। इसी तरह कई वर्ष पूर्व मथुरा के प्रमुख चिकित्सक डा. मनीष बसंल द्वारा 5 लाख की चौथ वसूली का मामला 6 पत्रकारों के विरूद्ध दर्ज कराया गया था। पिछले दिनों ही राया क्षेत्र के गांव सोनई में संदिग्ध अवस्था में महिला की मौत होने पर कवरेज करने पहुंचे कथित पत्रकारों का मृतका के मायके वालों ने यह कहते हुए कि वह कोई कानूनी कार्यवाही नहीं कर रहे हैं फोटो ना करने का विरोध किया तो मारपीट हो गई। जिसमें पत्रकारों ने मृतका के परिजनों के खिलाफ थाना राया में मारपीट-लूटपाट का मामला दर्ज करा दिया। जिसमें बाद में समझौते के नाम पर मृतका के गरीब परिवार वालों से 20 हजार की वसूली शिकायतकर्ता पत्रकार द्वारा वसूली गई।
राया क्षेत्र में ही पिछले दिनों स्वाट टीम ने चिकनियां गांव में छापा मारकर अवैध शराब का कारोबार कर रहे पत्रकार के ठिकाने पर छापा मारकर 409 अवैध शराब की पेटी, 3 पैकिंग मशीन सहित उपकरण बरामद किये। लेकिन इस काले कारोबार को अंजाम देने वाला कथित पत्रकार फरार हो गया जबकि उसके अन्य साथी भी फरार हो गये। बताते हैं कि शराब कारोबार में पुलिस एवं आबकारी विभाग की संलिप्तता थी लेकिन किसी के खिलाफ कार्यवाही नहीं हो सकी। इसी तरह वृन्दावन, मांट, गोवर्धन, छाता में भी कथित पत्रकारों द्वारा गोरखधंधों को अंजाम दिया जा रहा है। जिसमें पुलिस एवं प्रशासनिक अफसरों का खुला संरक्षण प्राप्त है। यही कारण है कि अफसर-नेता-पत्रकार-पुलिस के गठजोड़ पर ‘‘राम नाम की लूट है, लूट सके तो लूट’’ की पंक्तियां सटीक चरितार्थ हो रही हैं।

दलाली और शिकार की खोज में जुटा रहते हैं कथित पत्रकार

मथुरा। कभी खबरों की खोज में जुटे रहने वाले पत्रकार अब पत्रकारिता के नाम पर कैमरा-कलम को हथियार बनाकर मीडिया गैंग के रूप में जगह-जगह शिकार की तलाश में जुटे रहते हैं। जो कभी पकड़ में आने पर समूह के रूप में अपने साथी को छुड़ाने के लिये पुलिस- प्रशासन पर दबाब बनाने की कोशिश करते हैं।


मीडिया गैंग के कारनामे आये दिन सामने आतते रहते हैं जिसमें कुछ समय पूर्व नौहझील थाना क्षेत्र में कौलाहर में पशुओं के ट्रकों से 100 नम्बर के पुलिस कर्मियों द्वारा वसूली का वीडियो कथित पत्रकारों द्वारा कौलाहर गांव में बना लिया गया। इसकी जानकारी पुलिस कर्मियों को होने पर कथित पत्रकार को पकड़कर पुलिस चौकी बाजना लाया गया। जिसकी जानकारी पर अन्य कथित पत्रकार एकत्रित हो गये और हंगामा करने लगे। जिसमें समझौते के रूप में वसूली गई राशि का बटवारा पुलिस और कथित पत्रकारों के बीच बराबर-बराबर कर मामले पर पर्दा डाल दिया गया। बताते हैं कि यूपी बोर्ड परीक्षा के दौरान भी मीडिया गैंग नकल के नाम पर स्कूल संचालकों से खुलकर वसूली करते हैं।
इसी तरह गरीबों का राशन वितरण करने वाले राशन विक्रेताओं से भी मीडिया गैंग खुलेआम वसूली करते हुए आये दिन देखे जा सकते हैं। सूत्र बताते हैं कि मिट्टी-बालू खनन के नाम पर जमकर वसूली का खेल मीडिया गैंग द्वारा खेला जाता है। जानकार बताते हैं कि मीडिया गैंग पुलिस-प्रशासन के भ्रष्ट अफसरों के लिये मुखबिर की भूमिका भी अदा करते हैं। जहां अवैध कार्यों में लिप्त माफियाओं को पकड़वाकर छुड़वाने के बदले मोटी राशि वसूलते हैं। जानकारी बताते हैं सट्टा, गांजा, अफीम, शराब, कालेतेल, राशन माफिया, मिट्टी-बालू खनन, शिक्षा माफिया आदि के तार पुलिस-प्रशासन के साथ-साथ कथित पत्रकारों से जुड़े रहते हैं जो समय-समय पर उनकी मदद के रूप में खड़े नजर आते हैं।

मीडिया ने पुलिस को बे-गुनाह, ग्रामीणों को दोषी बना दिया

मथुरा। जनपद में तथाकथित पत्रकारों-पुलिस का गठजोड़ किस तरह काम कर रहा है इसका खुलासा पिछले दिनों बाजना क्षेत्र में सामने आया जहां पुलिस द्वारा ग्रामीणों से की मारपीट की घटना को पहले तो दबा दिया गया लेकिन जब ‘‘विषबाण’’ ने इसका खुलासा किया तो पत्रकारों ने पुलिस को निर्दोष बताते हुए ग्रामीणों को ही दोषी ठहरा दिया।
कथित पत्रकारों-पुलिस-माफियाओं की तिगड़ी जनपद में किस तरह काम कर रही है इसका खुलासा पिछले दिनों हुआ। जिसमें नौहझील थाना क्षेत्र के गांव कौलाना निवासी जितेन्द्र सिंह चौधरी उर्फ जीतू के पिता महेन्द्र सिंह की काफी वर्ष पूर्व मृत्यु हो गई। जिसके बाद उसकी मां महेन्द्री अपने देवर राकेश चौधरी के साथ रहने लगी। जबकि जितेन्द्र की छत्तीसगढ़ पुलिस में नौकरी लग गई जो एसटीएफ में कार्यरत बताया जाता है के नाम यमुना एक्सप्रेस-वे से सटी जमीन ;खेतद्ध को लेकर अपनी ही मां महेन्द्री एवं चाचा से विवाद चल रहा है। बताया जाता है कि जितेन्द्र की मां और चाचा ने जितेन्द्र के खेत की मिट्टी उठाने के बदले बाजना के पूर्व चेयरमेन चौधरी राम स्वरूप सिंह जिनका ईंट भट्टे का कारोबार है से करीब 1.50 लाख का एडवांस ले लिया। जिसमें मिट्टी की कीमत करीब 8 लाख की बताई गई है।
खेत से मिट्टी उठाने की जानकारी जब जितेन्द्र को हुई तो वह छुट्टी लेकर गांव आया और खेत से मिट्टी उठाने का विरोध किया। इसी बीच पुलिस को सूचना देकर जितेन्द्र को पकड़वाने का प्रयास किया गया जो निकटवर्ती गांव भूतगढ़ी में अपने बुआ सास के यहां पहुंच गया जिसका पीछा करते हुए पुलिस भी वहां पहुंच गई और चोरी की बाइक का आरोप लगाते हुए अपने साथ ले जाने लगी। जिसका विरोध करने पर पुलिस द्वारा जितेन्द्र के साथ मारपीट कर दी गई। रिश्तेदार के साथ मारपीट होते देख ग्रामीण भड़क गये और पुलिस को भी सबक सिखा दिया। इस घटना की कई वीडियो बनाई गईं जो ग्रामीणों द्वारा पत्रकारों को दी गईं। लेकिन पुलिस और पत्रकारों की गहरी दोस्ती के कारण मामले पर पर्दा डाल दिया गया और कोई खबर प्रकाशित-प्रसारित नहीं की गई।
ग्रामीणों द्वारा इसकी जानकारी ‘‘विषबाण’’ को दिये जाने पर टीम ने घटना स्थल का दौरा कर आवश्यक साक्ष्य संकलन कर पुलिस की कार्यप्रणाली की ‘‘विषबाण’’ यूट्यूब चैनल पर वीडियो प्रसारित की तो पुलिस-प्रशासन-मीडिया में हड़कम्प मच गया। जिसके बाद कथित पत्रकारों द्वारा पुलिस बचाव करते हुए ग्रामीणों के पुलिस से मारपीट के वीडियो तो जारी किये गये। लेकिन एसटीएफ जवान के साथ पुलिस द्वारा ताबड़तोड़ थप्पड़ बरसाने का वीडियो जारी नहीं किया गया। कथित पत्रकार चोरी की बाइक होना बताते रहे जबकि बाजना पुलिस चौकी प्रभारी धीरज गौतम ने चोरी की बाइक होने से इंकार कर दिया। जितेन्द्र उर्फ जीतू ने ‘‘विषबाण’’ को बताया कि उनके परिजन यमुना एक्सप्रेस-वे सटी जमीन को कब्जाने के लिये उसकी हत्या कराने में जुटे हैं। खेत से मिट्टी उठाने से रोकने पर चोरी की बाइक के नाम पर पुलिस से सांठ-गांठ कर जेल भेजने की साजिश रची गई थी। जिससे पीछे से मिट्टी उठाई जा सके।
जितेन्द्र सिंह का कहना कि जिससे मिट्टी उठाने के पैसे लिये गये उसका आवास बाजना पुलिस चौकी के ही सामने है और पुलिस से नजदीकी सम्बंध हैं। ‘‘विषबाण’’ द्वारा मोबाइल फोन पर सम्पर्क किया तो उनके बडे़ पुत्र राजकुमार चौधरी उर्फ पप्पू चौधरी ने बताया कि जितेन्द्र सिंह की मां महेन्द्री ने मिट्टी उठाने के बदले डेढ़ लाख का एडवांस लिया था। जिसमें खेत की मिट्टी की पूरी कीमत 8 लाख करीब की होती है। इसका विरोध जितेन्द्र सिंह द्वारा किया गया था। दोनों मां-बेटे के मध्य 18 बीघा जमीन को लेकर विवाद बना हुआ है। उन्होंने कहा कि जितेन्द्र को पकड़वाने में उनकी कोई भूमिका नहीं है। कथित पत्रकारों ने खेत से मिट्टी उठाने एवं जमीनी विवाद में मां-बेटे की जंग पर पर्दा डालते हुए पूरी घटना को बाइक चोरी से जोड़ दिया। जो कि कौलाना के ही सुरेश बघेल से जितेन्द्र सिंह ने दो साल पूर्व 25 हजार में खरीदी थी। जिसका पुलिस ने नेट पर सर्च कर सत्यता का पता लगाया। लेकिन कथित पत्रकारों ने पुलिस से मित्रता का फर्ज अदा करते हुए पूरी पत्रकारिता को कलंकित करने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी।
ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस और कथित पत्रकारों का गठजोड़ जनता को लूटने में लगा है। सुबह से लेकर शाम तक थाने-चौकियों पर दलाल पत्रकारों का जमघट लगा रहता है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बबलू कुमार ने भूतगढ़ी की घटना के जांच के आदेश दिये हैं। आखिर इस जांच में कौन दोषी निकलेगा ये तो पुलिस जांच ही तय करेगी। लेकिन कथित पत्रकारों ने जांच से पहले ही पुलिस को निर्दोष बताते हुए ग्रामीणों को दोषी बताकर अपने फर्ज को अंजाम दे दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर एसएसपी कथित पत्रकारों एवं पुलिस के गठजोड़ की निष्पक्ष जांच करा लें तो बड़े-बड़े चौंकाने वाले खुलासे सामने आयेंगे।

अफसर-पुलिस के साथ फोटो खिंचाने में छिपा है दलाली का राज

मथुरा। ‘‘हर डाल पर उल्लू बैठा है, अंजामे गुलिस्ता क्या होगा’’ की पंक्तियां राजनैतिक-प्रशासनिक और मीडिया- माफिया के गठजोड़ पर सटीक साबित हो रही हैं। जहां तथा-कथित दलाल पत्रकारों की घुसपैठ पुलिस चौकी से लेकर तहसील, जिला से लेकर देश-प्रदेश के मुख्यालयों तक है।
पत्रकारिता में गन्दगी कितना असर दिखा रही इसका असर हर तरफ देखा जा सकता है जहां कथित दलाल पत्रकारों का जमघट पुलिस चौकी, थाने, ब्लॉक, तहसील, जिला, राज्य, दिल्ली मुख्यालय तक नजर आता है। ये दलाल पत्रकार दरोगा से लेकर अफसरों-मत्रियों के साथ फोटो खिचांकर उनसे नजदीकी सम्बंध दर्शाकर कार्य कराने का ठेका लेकर पचास-सौ रूपय से लेकर हजारों, लाखों, करोड़ों की दलाली करते हैं। जानकार सूत्र बताते हैं कि दलाल पत्रकार केवल अफसर-मंत्रियों से सम्बंध तो बनाने में लगे ही रहते हैं बल्कि ये काम ना करने वाले अफसरों को भी ब्लैक मेल करने में गुरेज नहीं करते हैं। सूत्र बताते हैं कि दलाल पत्रकारों का गठजोड़ मीडिया मैनेज करने का भी ठेका लेते हैं। जिन्हें पर्दे के पीछे लेन-देन कर किसी को हीरो तो किसी को जीरो बनाने का खेल बड़े पैमाने पर खेला जाता है।
जानकार कहते हैं कि राशन, आबकारी, पुलिस, स्वास्थ्य से लेकर मथुरा-वृन्दावन विकास प्राधिकरण में दलाल पत्रकारों का हर समय जमघट लगा रहता है। सूत्र बताते हैं कि कस्बा नगर में एक मार्केट के निर्माण पर लगी रोक को हटवाने के बदले पत्रकार संगठन के पदाधिकारी द्वारा भवन निर्माण स्वामी से ढ़ाई लाख की राशि वसूली गई। इसी तरह एक राष्ट्रीय चैनल के पत्रकार द्वारा एक व्यापारी नेता के रिश्तेदार से भवन निर्माण से रोक हटवाने के बदले एक लाख की राशि वसूली गई। जिसमें रोक ना हटने पर पत्रकार द्वारा राशि लौटाई गई। इसी पत्रकार द्वारा सुरीर कोतवाली के गांव ओहावा के ग्रामीण से पुलिस के नाम पर 75 हजार की राशि वसूली गई। जिसकी जानकारी होने पर क्षेत्राधिकारी कोतवाल द्वारा पत्रकार को लताड़ लगाई गई। सुरीर कोतवाली में गांजा विक्रेता से पुलिस के नाम पर दो पत्रकारों द्वारा 1 लाख की वसूली का मामला सामने आया जिसको लेकर पुलिस और दलालों के मध्य कई दिनों तक जमकर जंग छिड़ी रही। ऐसे ही खबरों को छापने-रोकने के बदले भी गिफ्ट-लिफाफा-वसूली का खेल जोर-शोर से बेरोक-टोक चल रहा है।