घटिया फ्लैट निर्माणः श्री ग्रुप उपभोक्ता को देगा 3.35 लाख

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मथुरा। घटिया किस्म का फ्लैट निर्माण के मामले में उपभोक्ता फोरम ने श्रीग्रुप एवं उसकी सहयोगी फर्म एस.जे.पी. इण्डिया को भवन निर्माण की मरम्मत के लिये तीन लाख बीस हजार, मानसिक प्रताड़ना के लिये 10 हजार एवं वाद व्यय के रूप में 5 हजार की राशि ब्याज के साथ 45 दिन के अन्दर अदा करने के आदेश दिये हैं।
प्राप्त विवरण के अनुसार राधापुरम निवासी रामवीर सिंह पुत्र गुलाब सिंह ने एस.जे.पी. इण्डिया एसोसियेट के मैनेजिंग डायरेक्टर सुदीप अग्रवाल, श्रीग्रुप के प्रबंधक प्रदीप कुमार अग्रवाल से हाइवे स्थित राधापुरम में 15 लाख में फ्लैट संख्या 93ए बुक कराया। जिसमें विज्ञापन में विकास प्राधिकरण के मानक अनुसार एवं पानी की आपूर्ति, निकासी, स्ट्रीट लाइट, अच्छे किस्म के मार्बल पत्थर, भूकम्प रोधी फ्लैट, 9 इंज की दीवार बनाकर देने का दावा किया गया। इसके अलावा 6 माह में फ्लैट का निर्माण कर कब्जा दिया जाना बताया गया। किन्तु एक वर्ष बाद फ्लैट पर कब्जा दिया गया। जिसमें घटिया सामिग्री प्रयोग किये जाने पर फ्लैट की दीवारें निर्माण होने के साथ चटक गईं थीं, फर्स में पत्थर निम्न स्तर का प्रयोग किया गया। जिसकी शिकायत पीड़ित ने निर्माण कर्ताओं से की लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया गया। इस पर पीड़ित के परिवार में शादी होने के कारण घटिया स्तर के फ्लैट में रहने पर मजबूर होना पड़ा। तमाम शिकायतों के बाद भी कोई ध्यान नहीं देने पर पीड़ित ने उपभोक्ता फोरम में शिकायत दर्ज कराई।
उपभोक्ता फोरम में अध्यक्ष योगेन्द्र सिंह, सदस्य सूफिया अशरफ के सामने विपक्षियों द्वारा 9 इंच की दीवार लगाने के दावे को निराधार एवं मानकों के अनुसार फ्लैट निर्माण का दावा करते हुए सभी आरोपों को निराधार बताते हुए दावा निरस्त करने की दलीलें दी गईं। बल्कि तर्क दिया गया कि उन्होंने केवल भूखण्ड बेचा था।

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फ्लैट का निर्माण स्वयं उपभोक्ता द्वारा अपनी लागत से किया गया। जबकि पीड़ित उपभोक्ता द्वारा कॉलोनी वासियों द्वारा की गई शिकायतों के पत्र एवं विपक्षी द्वारा दिये गये जवाब के साक्ष्यों के साथ आरोप लगाया कि विपक्षी बड़े बिल्डर हैं उनके द्वारा आयकर में लाभ प्राप्त करने के लिये पहले भूखण्ड के रूप में विक्रय पत्र निष्पादित किया जाता है और उसके पश्चात् निर्माण कराकर फ्लैट/आवास के रूप में कब्जा दिया जाता है। जिसका विकास प्राधिकरण द्वारा जारी मानचित्र भी प्रस्तुत किया गया। फोरम में बिल्डर ग्रुप द्वारा एक तरफ मानकों के अनुसार फ्लैट निर्माण किया गया वहीं दूसरी तरफ तर्क दिया गया कि उपभोक्ता द्वारा स्वयं फ्लैट का निर्माण किया गया। पीड़ित उपभोक्ता द्वारा इंजीनियर नीरज शर्मा द्वारा फ्लैट मरम्मत की लागत 3 लाख 12 हजार दो सौ रूपये का स्टेटमेंट प्रस्तुत किया गया। जिसे फोरम ने गंभीरता से लेते हुए विपक्षीगण बिल्डरों को सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों का उल्लेख कर पीड़ित उपभोक्ता के फ्लैट निर्माण में घटिया सामिग्री प्रयुक्त मानने का दोषी ठहराते हुए इंजीनियर द्वारा प्रस्तुत 3,12,200 का स्टेटमेंट स्वीकार कर परिवाद प्रस्तुत करने से लेकर भुगतान की तिथि तक 6 प्रतिशत ब्याज के साथ 45 दिन के अन्दर भुगतान करने, मानसिक उत्पीड़न के रूप में 10 हजार, परिवाद खर्चा 5 हजार देने के निर्देश दिये हैं।