अधर्म की राह पर धर्म के मठाधीश…

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मथुरा/वृन्दावन। ‘‘पर उपदेश कुशल बहुतेरे’’ की पंक्तियां धर्म के आधुनिक मठाधीशों पर सटीक साबित हो रही हैं। जो दूसरां को धर्म के रास्ते पर चलने के संदेश देते हैं लेकिन स्वयं अधर्म का मार्ग अपनाकर सरकारी जमीनों पर भव्य आश्रम-मन्दिरों का निर्माण कर कानून को ठेंगा दिखा रहे हैं जिसका खुलासा तहसीलदार सदर की रिपोर्ट में हुआ है। इससे धर्म के ठेकेदारों में हड़कम्प मचा हुआ है।
उ.प्र. सरकार द्वारा भूमाफियाओं को चिन्हित किये जाने के फरमान के बाद प्रशासन द्वारा चलाये जा रहे एंटी भू-माफिया अभियान में चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। जिसमें दुनियां को धर्म के रास्ते पर चलने का उपदेश देने वाले द्वारिका पीठ के जगद्गुरू शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती ने उड़िया बाबा आश्रम के नाम पर वृन्दावन में खसरा नम्बर 421 ख की 0.547 हेक्टेयर बंजर जमीन पर कब्जा कर रखा है। जिसमें जे.के. टायर कानपुर वालों की कोठी भी निर्मित है। इसी तरह देश-विदेश में आकर्षण का केन्द्र बने प्रेम मन्दिर के नाम पर श्यामा-श्याम धाम कृपालु महाराज निवासी रमणरेती वृन्दावन ने खसरा संख्या 63 की 0.607 हैक्टेयर भूमि पर सत्संग भवन एवं मन्दिर का निर्माण कर कब्जा किया हुआ है। जबकि श्री कृष्णानन्द स्वर्ग आश्रम ने खसरा न. 836 ग की 0.162 हेक्टेयर जमीन पर मकान, गौशाला, गीता आश्रम ने 439 ड की 0.340 हैक्टेयर जमीन पर आश्रम, बाउंड्रीवॉल, किशोरी कृपा आश्रम ने खसरा संख्या 101 व 103 पर आश्रम, मकान, पार्क, खसरा संख्या 406 की 0.876 हैक्टेयर जमीन पर देवकी नन्दन पुत्र गोपालदास व बृजलता, घनश्याम दास चेला गिरधर दास व सियाराम बाबा गोवर्धन ने जमीन का बैनामा कराकर हनुमान मन्दिर, कमरा, बरामद, बगीची के रूप में कब्जा लिया गया है। जबकि खसरा संख्या 188 ग की 0.251 हैक्टेयर जमीन पर मां संतोषी आश्रम, फ्लैट्स का निर्माण कर कब्जा किया गया है।
सरकारी जमीन की लूट में समाज को धर्म के रास्ते पर चलने का उपदेश देने वाले मठाधीश ही शामिल नहीं हैं बल्कि देश एवं समाज सेवा, देश के भविष्य निर्माण का ढ़ोल पीटने वाले राष्ट्र सेवक भी इस लूट में किसी से कम नजर नहीं आ रहे हैं। धानुका आश्रम, धानुका विद्यालय, धानुका कोठी, श्यामाबाई का आश्रम, डण्डी आश्रम, होटल बांके बिहारी, इस्कॉन मन्दिर, एमबीटी गैस्ट हाउस, रसियन रेजिडैंसी आदि ने सरकारी जमीन पर कब्जा कर 7 मंजिला भव्य भवन का निर्माण करा डाला। इस लूट में तथा कथित समाज सेवी, माफिया, राजनैतिक नेता भी पीछे नहीं हैं। जिसमें दिलीप गौतम निवासी मनीपाड़ा वृन्दावन ने खसरा संख्या 63 की 0.458 हैक्टेयर जमीन पर कॉलोनी विकसित कर बेच दिया। जबकि खसरा संख्या 30 की 0.360 हैक्टेयर जमीन पर पीतम सैनी पुत्र होशियार सैनी, निरंजन सैनी, भोला पुत्र रामफल निवासी मदन मोहन घेरा वृन्दावन ने नलकूप, कमरा बनाकर कब्जा कर लिया। जबकि खसरा संख्या 418 की 0.364 हैक्टेयर भूमि पर सेठ नरोत्तम शेख सरिया अम्बुजा सीमेंट वालों ने कोठी बनाकर कब्जा कर लिया। जबकि 0.121 हैक्टेयर पर नगर पालिका द्वारा शुलभ शौचालय, पार्किंग का निर्माण करा दिया गया।
सदर तहसीलदार उमेश कुमार द्वारा शासन-प्रशासन को दी गई रिपोर्ट के खुलासे के बाद धर्म के ठेकेदारों में हड़कम्प मच गया है और अपने बचाव में आ गये हैं जिसमें वह प्रशासन की रिपोर्ट को गलत करार दे रहे हैं। जबकि वृन्दावन नगर में राजनैतिक और प्रशासनिक संरक्षण में जमीन कब्जाने का खेल बड़े पैमाने पर खेला जा रहा है। इसका खुलासा वृन्दावन के राजपुर बांगर स्थित चैतन्य बिहार फेस-2 की खसरा नं. 73 व 78 की भूमि में सामने आया है। जिसे वर्ष 1992 में पूर्व जिलाधिकारी ने गजट नोटिफिकेशन संख्या 2529/9 आ-1-92-5 एल-ए/91 द्वारा 30.03.1994 को अधिग्रहित कर मथुरा-वृन्दावन विकास प्राधिकरण को तहसील के माध्यम से कब्जा करा दिया गया। जिसे प्राधिकरण ने पट्टों के रूप में आवंटियों को आवंटित कर दिया। लेकिन इस जमीन पर राजनैतिक संरक्षण में धर्मेंन्द्र कुमार पुत्र राजन सिंह निवासी ग्राम मगदा पोस्ट बाठौन मथुरा ने बाउंड्रीवॉल कराकर कब्जा कर लिया। जिसकी शिकायत आवंटियों द्वारा शासन-प्रशासन से की गई। जिसमें प्रशासन की कार्यवाही से करोड़ों की जमीन से बेदखल होते देख उ.प्र. के एक कद्दावर मंत्री के परिजनों को हिस्सेदार बनाकर जांच का रूख ही बदलवा दिया गया। जिसमें जमीन की जांच मथुरा-वृन्दावन के किसी अधिकारी की जगर मांट तहसीलदार को दे दी गई। जिसमें कब्जाधारक के पक्ष में रिपोर्ट लगाना बताया जा रहा है। जिस पर प्रश्न चिन्ह लगाते हुए पीड़ितों ने न्याय की गुहार लगाई है।
विकास प्राधिकरण सचिव रमेश चन्द द्वारा 11 मई 2018 को एसडीएम मथुरा को पत्र लिखकर जमीन की पैमाइस के आदेश पर आपत्ति व्यक्त करते हुए भली-भांति परीक्षण के बाद ही अग्रेहित कार्यवाही करने के लिये कहा है। लेकिन राजनैतिक-प्रशासनिक- माफियाओं के गठजोड़ के सामने विकास प्राधिकरण और आवंटी अपनी जमीन बचाने को संघर्ष कर रहे हैं। इसी तरह दूसरा मामला मथुरा के गोवर्धन चौराहा कृष्णा नगर पुलिस चौकी के सामने का है जहां नजूल एवं निजी भूमि पर शहर के प्रमुख व्यवसाई विनोद गर्ग ने मुकन्द रिसोर्ट मैरिज होम खड़ा कर दिया। जिसकी शिकायतों पर मुख्यमंत्री कार्यालय एवं मण्डलायुक्त आगरा के सख्त आदेशों के बावजूद भी प्रशासन कागजी घोड़े दौड़ाने में लगा है। जिसमें मथुरा-वृन्दावन विकास प्राधिकरण द्वारा एक बार मुकन्द रिसोर्ट को सील करने के बाद प्रदेश के कद्दावर मंत्री के इशारे पर सील को खोलकर पुनः चालू करा दिया गया।
शासन-प्रशासन में ऊँची पहुंच का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि प्रमुख संत विजय कौशल महाराज पर भी यमुना खादर में आश्रम बनवाने की शिकायत के बावजूद भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, योगगुरू रामदेव ने उनके आश्रम में आयोजित कार्यक्रम में भाग लिया। इसी तरह गोवर्धन के प्रमुख संत सियाराम बाबा ने वृन्दावन में सरकारी भूमि का बैनामा कराकर आश्रम खड़ा कर दिया है। उनके आश्रम पर पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के भाई शिवपाल यादव का सपा सरकार के दौरान आये दिन अवागमन बना रहा। जबकि अनेक प्रमुख संतों के आश्रमों पर भी सभी राजनैतिक पार्टियों, नेताओं, जजां, अफसरों का आना-जाना लगा रहता है। जिससे जमीन कब्जाने का सिलसिला बदस्तूर जारी रहता है और प्रशासन सरकारी जमीन पर कब्जा होते देख मूक दर्शक बना होकर तमाशा बीन बना रहता है। एक बार फिर सरकारी जमीनों पर कब्जे का मामला सामने आने पर नोटिस भेजने का खेल शुरू हो गया है। जिसमें कार्यवाही होने की उम्मीद करना बेमानी ही नजर आ रहा है।