एससी-एसटी एक्ट में बिना जाँच गिरफ्तारी से बँटेगा समाज – शंकराचार्य

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देश में आज एससी-एसटी एक्ट को लेकर बहस गर्म है । नये विधेयक में जातिगत टिप्पणी के आरोप पर बिना जाँच की गिरफ्तारी से सवर्ण समाज में आक्रोश है । वह इसके विरोध में सड़कों पर है । कुछ संत, कथा प्रवक्ता भी इसके विरोध में आवाज उठा रहे हैं । वहीं दूसरी और दलित समाज अपने प्रति अपमानजनक व्यवहार को रोकने के लिये इसे जरूरी बता रहा है । दलित समाज का आरोप है कि हिन्दु धर्म में वर्ण व्यवस्था के अनुसार उसके साथ शुरू से ही भेदभाव और अन्याय होता आया है । इससे वह कहीं ना कहीं स्वयं को हीन समझता है और जातिगत व्यवस्था को जिम्मेदार ठहराता है । दलित नेताओं का मानना है कि आरक्षण के लाभ के बावजूद दलित समाज की स्थिति नहीं सुधरी है जबकि सवर्ण समाज आरक्षण को खत्म करने की वकालत कर रहा है । ऐसे में हिन्दु धर्म के संत और धर्म गुरूओं की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है कि वह धर्म के नजरिये से समाज के इस भेदभाव और बंटवारे पर क्या राय रखते हैं । पिछले दिनों चातुर्मास के लिये वृन्दावन आये ज्योतिषपीठ-शारदापीठाधीश्वर जगद्गुरू शंकराचार्य  स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज से इन्हीं मुद्दों को लेकर हमारे प्रतिनिधि जगदीश वर्मा ‘समन्दर’ ने विस्तृत वार्ता की । प्रस्तुत हैं वार्ता के प्रमुख अंश –
प्र0  आप किसे हिन्दु मानते हैं ?
उत्तर- जो पुर्नजन्म में विश्वास करता है, गाय को अबध्य मानता है, तीर्थ यात्रा करता है और अपने पितरों को तृप्त करता है, वही हिन्दु हैं ।
प्र0  समाज का एक वर्ग यह मानता है कि सनातन धर्म में वर्ण व्यवस्था के आधार पर लोगों को बॉंट दिया गया । जातिगत आधार पर उसके और टुकड़े हो गये । धर्म के नजरिये से आप क्या देखते हैं ?
उत्तर- जो जिसकी जीविका थी उस जीविका के अनुसार सुलभता से उसको भोजन-वस्त्र की कोई कमी न हो उसके लिये वर्ण व्यवस्था थी । यह भी आवश्यक हो गया था कि भारतीय संस्कृति, धर्म के लिये कुछ लोग आत्मसमर्पण करें, यह ब्राहम्णों ने किया । कुछ लोग रक्षा करते थे, वैश्य व्यापार करते थे और श्रमिक अपना श्रम करते थे । उन्हें अपना पेट भरने में कोई कठिनाई नहीं थी । छुआछूत की जहाँ तक बात है यह सभी में है । आज जिसे छोटी जाति बताया जाता है वह भी छुआछूत मानते हैं ।
प्र0  दलित समाज भेदभाव के आधार पर अपने को उपेक्षित समझता है, इस पर क्या कहेगें ?
उत्तर- कहाँ भेदभाव किया जाता है ? आज भारत सविंधान से चल रहा है, किसी भी वर्ग को कहीं भी अवसर से वंचित नहीं किया जाता । जिन्हें आप दलित कहते हैं वह भारत के प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति हो चुके हैं, रेलमंत्री जैसे सम्मानजनक पदों पर पहुॅंच चुके हैं । इसमें उपेक्षा कहाँ है ?
प्र0  आप कहते हैं कि जातियाँ समाज की क्यारियाँ हैं ? क्या सभी क्यारियों को समान रूप से सम्मान प्राप्त है ?
उत्तर- सभी को सम्मान प्राप्त हैं । हम यह मानते हैं कि जो व्यक्ति अपने कर्तव्य का पालन करते हैं, वह सभी सम्मान के पात्र हैं । इसमें कोई भेदभाव नहीं करते । आज जातिवाद की बात उठाना ही बेकार है क्योंकि आज सभी लोग होटल में, रेल में भोजन कर रहे हैं । वहाँ किसी भी प्रकार के जाति-पाति देखकर नहीं जाते । सभी के यहाँ रोटी खाते हैं । जातिवाद है कहाँ ?
प्र0  जातिगत आधार पर भेदभाव रोकने के लिये सरकार ने एससी-एसटी एक्ट में संशोधन कर बिना जाँच गिरफ्तारी की   व्यवस्था की है, आपका क्या कहना है ?
उत्तर- इस एक्ट के द्वारा समाज को बॉंट दिया गया है । एक्ट के अनुसार दलित व्यक्ति किसी पर जातिसूचक शब्द कहे जाने का आरोप लगाये तो उसे बिना जाँच के लिये 6़0 दिन के लिये जेल जाना पड़ेगा । क्या यह पक्षपात नहीं है ? दूसरी बात यह है कि वे स्वयं ही उन जातियों के आधार पर आरक्षण का लाभ ले रहे हैं । जब आप कहें तो दोष नहीं है और दूसरा कहे तो दोष है । यह क्या बात हुई ?
प्र0  अगर बिना जाँच गिरफ्तारी को समाप्त कर देंगे तो दबंगों को बचाव और जाँच को प्रभावित करने का समय नहीं मिल जायेगा ?
उत्तर- दबंग लोग ही इस एक्ट का दुरूपयोग करेगें । इसमें सवर्ण भी शामिल होगें । वे अपने ही साथियों से दुश्मनी निकालने के लिये दलितों को प्रयोग कर एक-दूसरे पर आरोप लगवायेगें । स्वभाविक रूप से आपसी रंजिश को निकालने को बढ़ावा देने के लिये इसका उपयोग होगा और हो रहा है ।
प्र0  दलित समाज को तो इस एक्ट से लाभ मिलेगा ?
उत्तर- जब आप किसी को बिना कारण के जेल भिजवा देगें तो उसके हदृय में प्रतिक्रिया नहीं होगी ? हिंसा की भावना पैदा होगी, ऐसी व्यवस्था से दलित समाज को भी नुकसान होगा ।
प्र0  एक्ट की नई व्यवस्था के विरोध में तमाम संगठन व कुछ कथावाचक और संत भी आगे आ रहे हैं ? संतों को ऐसे एक्ट या राजनीति से क्या काम है ?
उत्तर- इससे किसी को भी भय हो सकता है चाहे वह कथावाचक, संत या महात्मा ही क्यों न हो । न्याय का सिद्धान्त है कि भले ही अपराधी छूट जाये लेकिन निरपराध को सजा नहीं होनी चाहिये । न्यायालय में भी कई बार संदेह का लाभ देकर मुजरिमों को बरी कर दिया जाता है । इसमें तो इसकी भी गुजांईश नहीं छोड़ी गयी है ।
प्र0  इसके विरोध में वृन्दावन के कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने आवाज उठायी, लेकिन उन्हें आगरा में गिरफ्तार कर लिया गया, इस पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है ?
उत्तर- हमने देवकीनंदन का समर्थन किया है । उन्होने अच्छा कदम उठाया है । पूरे भारत में इसके लिये क्रान्ति हो रही है । यह पूरी तरह गलत है ।
प्र0  क्या दलित समाज हिन्दु धर्म से कट रहा है ? भेदभाव की वजह से वे दूसरे धर्मों में जा रहे है ?
उत्तर- जो ईसाई या अन्य धर्म में जा रहे हैं वहाँ उनके साथ भेदभाव होता है । असल में उनकी गरीबी का लाभ उठाकर यह सब किया जा रहा है । किसी भी अस्पताल में जाईयें वहॉं जाति के आधार पर किसी को भी इलाज से वंचित नहीं किया जाता है ।
प्र0  ईसाई, मुस्लिमों की पहचान उनका धर्म है लेकिन हिन्दुओं को अपनी जाति बतानी पड़ती है, क्या यह भेदभाव नहीं है ?
उत्तर- अगर कोई अपनी जाति बताता है तो उसे अपनी जाति पर गर्व होना चाहिये । मायावती को तो स्वंय पर गर्व है न, कि हम क्या हैं ? इसी तरह से हर जाति के लोग यह मानते हैं कि हम अपनी जाति से हैं और सम्मान योग्य हैं ।
प्र0  आप पुल गिरने, ट्रैन एक्सीडेंट के लिये आरक्षण का लाभ लेने वालों को जिम्मेदार बताते हैं लेकिन पिछली घटनाओं में अधिकतर सामान्य वर्ग के ही लोग शामिल पाये गये हैं ?
उत्तर- ऐसा नहीं है, उन्हें आरोपित कर दिया जाता है, हम यह नहीं कहते कि हर दुर्घटना का कारण आरक्षित दलित ही हैं, सवर्ण समाज से भी गलती हो सकती है । लेकिन अगर आप उन्हें प्रतिस्पर्धा में लाकर योग्य नहीं बनाते हैं और समाज सेवा में लगा देते हैं तो उसका परिणाम यही होगा । आज आरक्षण का लाभ दिया जा रहा है । 90 नम्बर वाले को पीछे करके आप 30 नम्बर वाले को मौका दे रहे हैं । नौकरी पेट भरने के लिये नहीं होती क्योंकि सरकार निश्चित कर चुकी है भारत का कोई भी नागरिक भूखा नहीं रहेगा । इसीलिये 2 रूपये की दर पर गेंहू और चावल दिया जाता है । नौकरी समाज सेवा के लिये होती है । इसमें योग्यता देखी जानी चाहिये । समाज की सेवा के लिये अगर आप उन्हें योग्य नहीं बनाते हैं और आरक्षण देकर उन्हें समाज की सेवा में लाते हैं तो वह अच्छा कार्य नहीं कर पायगें । डॉक्टर बनेगा तो पेट में कैंची छोड़ेगा, न्यायाधीश बनेगा तो न्याय नहीं कर पायेगा ।
प्र0  आरक्षित समाज का कहना है कि वह काफी समय से पिछड़े हुये हैं, उनके पास वो सुख-साधन नहीं है जिनके आधार पर वह प्रतिस्पर्धा कर सके ?
उत्तर- सरकार को सुविधा देनी चाहिये । हम चाहते हैं कि समाज के प्रत्येक वर्ग को शिक्षा और योग्यता अर्जन के लिये मौका मिलना चाहिये, लेकिन सेवा के लिये योग्यता का ही आधार होना चाहिये ।
प्र0 दलित समाज के कुछ संगठन, नेता जातिगत भेदभाव के लिये हिन्दु धर्म व्यवस्था को जिम्मेदार ठहराते हैं ?
उत्तर- ऐसे लोग अपने आप को दलित कहकर ऊँचे पद पर चले जाते हैं लेकिन समाज वहीं का वहीं रहता है । उसके लिये ये कुछ नहीं करते । एक व्यक्ति आगे बढ़कर शेष समाज के लिये क्या करता है, वह देखिये ? ऐसे लोग अपने घर में न अपनी जाति की बहु लाते हैं और न अपनी लड़की को अपनी जाति में देते हैं । वह सवर्णों में मिल जाते हैं । क्या यह अन्याय नहीं है ?
प्र0  आप सनातन धर्म की सर्वोच्च संस्था होने के नाते चारो वर्गों को एक साथ लाने और भेदभाव को खत्म करने का उन्हें कैसे भरोषा दिलायगें ?
उत्तर- हमारा कहना है कि सभी वर्गों को परस्पर प्रेम से रहना चाहिये । किसी को जाति के आधार पर दूसरे से नफरत नहीं करनी चाहिये । हम गाँव में रहे हैं, वहाँ परस्पर रिश्ते होते हैं । जिस गाँव में बेटी ब्याही जाती थी उसके गाँव के लोग वहाँ पानी तक नहीं पीते थे, चाहे वह किसी भी समाज की बेटी हो । यह हमारे संस्कार थे लेकिन जब से लाभ के लिये जातियों का राजनीतिकरण हुआ है तब से समस्या उत्पन्न हुई है ।
प्र0  लेकिन आज तो हमारी यह संस्कृति, विरासत कहीं खो रही है ?
उत्तर- इसकी शिक्षा ही नहीं दी जा रही है, इसे गलत ढंग से समाज के सामने प्रचारित किया जा रहा है । इसके लिये मीडिया भी जिम्मेदार है । पहले गाँव का दामाद पूरे गाँव का दामाद हो जाता था । अपनी जाति के रिश्ते बदल जाते थे लेकिन दूसरी जाति के रिश्ते नहीं बदलते थे। जिसे लोग छोटी जाति कहते हैं पहले उसका बुजुर्ग गलती होने पर बड़ी जाति के व्यक्ति को भी डॉंट सकता था । यही हमारी रीति थी । हमारे यहाँ ऐसे जातिगत झगड़े कभी नहीं हुये । ईसाइयों ने हमारी गरीबी का फायदा उठाकर यह जाल रचा है । इस गरीबी के लिये सवर्ण समाज नहीं सरकार जिम्मेदार है ।
प्र0  आपको कॉंग्रेसी विचारधारा का माना जाता है, आप संत हैं, क्या आपको सभी को समान भाव से नहीं देखना चाहिये ?
उत्तर- हम सभी को समान भाव देते हैं । हमारे यहाँ जो दीक्षा लेने आते हैं हम उनकी जाति और पार्टी नहीं पूछते । 1942 में हमने भारत के स्वतन्त्रता आन्दोलन में भाग लिया था । इस बात को जो जानता है वह हमारी इज्जत करता है । जो लोग हमें कॉंग्रेसी कहते हैं उन्होने आजादी के लिये कुछ भी नहीं किया है । हमें तो गर्व है कि हमने अपना कुछ योगदान किया है ।
प्र0  कई मुद्दों को लेकर आप अक्सर मोदी सरकार की आलोचना करते रहे हैं , क्या कोई ऐसा विषय है जिस पर आप उनकी तारीफ कर सकें ?
उत्तर- हम मोदी के विरोधी नहीं हैं, लेकिन झूठ नहीं बोलना चाहिये । यूपीए सरकार के जमाने में उन्होने क्या कहा था ? कि ‘‘भारत गौ-माँस का सबसे बड़ा निर्यातक है, इससे मेरा हदृय जलता है, आपका जलता है कि नहीं जलता, मैं नहीं जानता ’’ यह उनके शब्द हैं । अब इतना निर्यात क्यों हो रहा है ? गंगा की अविरल धारा क्यों नहीं बह रही है, काश्मीर की समस्या क्यों नहीं हल हो रही है ? उन्होने जो कुछ कहा था, उसको करके नहीं दिखाया । हम उनके व्यक्तिगत विरोधी नहीं हैं । यह जानबूझकर प्रचारित किया गया है । मोदी जी जब द्वारिका जाते हैं तो हमारी गद्दी पर जाकर पूजा करते हैं । हम तो यह चाहते हैं कि उनके द्वारा देश की सेवा हो जाये । लेकिन जब नहीं होती है तब हम नहीं कहें तो कौन कहेगा ?
प्र0  लोग कहते हैं कि अभी नरेन्द्र मोदी का कोई विकल्प नहीं है, क्या आपको लगता है मोदी का कोई विकल्प बन सकता है ?
उत्तर- विकल्प पहले से नहीं बनता है । मोदी को पहले कौन जानता था लेकिन वह विकल्प बने । जब समय पर कोई व्यक्ति आयेगा तो विकल्प भी तैयार हो जायेगा ।
प्र0  आपने वृन्दावन में चार्तुमास प्रवास पूरा किया है । यहाँ यमुना की दयनीय स्थिति है उस पर क्या कहेगें ?
उत्तर- यमनोत्री से जो जल की धारा चलती है वह सीधी की सीधी वृन्दावन आनी चाहिये । लेकिन उससे पहले ही यमुना को कई जगह रोककर दिल्ली का मल मूत्र इसमें छोड़े दिया जाता है । आज जो यमुना है वह केवल मध्यप्रदेश की नदियों का पानी मिलकर यमुना का रूप बनता है । इन्होने सर्वनाश कर रखा है । अगर जीवित रहना है तो स्वच्छ जल को बचाना ही होगा ।