विप्र महाकुंभ में ब्राह्मणों ने भाजपा-संघ पर भरी हुंकार, दो महीने में वापिस लो एससी-एसटी एक्ट

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जगदीश वर्मा ‘समन्दर’
वृन्दावन ।
राष्ट्रीय विप्र स्वाभिमान महासंघ के अन्तर्गत प्रियाकान्तजू मंदिर के सामने आयोजित विप्र महाकुम्भ में एकत्रित हुये विप्रसमाज द्वारा एससी एसटी एक्ट शंसोधन के साथ विभिन्न मागें रखीं गयीं। वक्ताओं ने सरकार द्वारा लाये विधेयक को सवर्ण समाज के साथ अन्याय करार दिया वहीं दलित समाज को भी इस विधेयक से नुकसान होना बताया । विशाल मंच पर ब्रजमण्डल और दूसरे जनपदों से आये विप्र एवं अन्य सामाजिक संगठनों के लोगों ने जोशीली आवाज में सरकार तक अपनी बात पहुॅंचाते हुये सभी राजनैतिक दलों को आड़े हाथों लिया । सभी ने एक स्वर में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के आधार पर इसे लागू करने की बात कही । महाकुम्भ में कश्मीरी पण्डितों को पुर्नस्थापित करने के साथ ही सनातन धर्म के देवी-देवताओं पर अभद्र टिप्पणी एवं चित्रण करने वालों के लिये कठोर कानून बनाने की जोरदार मॉंग की । लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा नये विधेयक पर हुई ।
 माथुर चतुर्वेद परिषद के महेश पाठक ने कहा कि सरकार तीर्थ के महत्व को ध्यान में रखते हुये पर्यटन विकसित करे । तीर्थ पुरोहितों का ब्रज विकास के कार्यों में सहयोग लिया जाये । कोसी के जगदीश प्रसाद सुपानियॉं ने कहा कि जब सात जजों की पीठ ने फैंसला सुना दिया तो सरकार क्या सोचकर एक्ट में अध्यादेश लायी । अगर मागें नहीं मानी गयीं तो 20 हजार लोगों के साथ दिल्ली कूच करेगें । श्यामसुन्दर गौतम ने कहा कि इस कानून के लिये कुर्सियों से चिपके सांसद-विधायक दोषी हैं । सरकार तानाशाह है । आशीष बागी ने कहा कि कश्मीर में धारा 370 का खामियाजा देश अब तक भुगत रहा है । उमेश पाण्डेय ने कहा कि हर पार्टी ब्राहम्णों को केवल वोटों के लिये ही प्रयोग कर रही है ।
युवा समाजसेवी विजय शर्मा ने कहा कि सवर्ण समाज की एकजुटता से सरकार की नींद उड़ी हुई है । एक्ट के विरोध में ‘नोटा’ के प्रयोग को गलत बताते हुये कहा कि दलित भाई एकजुटता से अपने वोटों का प्रयोग कर सरकार से अपनी मागें मनवा लेते हैं । और हम नोटा पर मुहर लगाकर अपने अधिकार से पीछे हट रहे हैं । सवर्ण समाज में भी गरीब होते हैं तो उन्हें भी सरकारी सहायता मिलनी चाहिये ।
काशी विद्वत परिषद के नागेन्द्र दत्त गौड़ ने कहा कि यह महाकुम्भ तीन महीने पहले विप्र समाज को एकजुट करने के लिये र्निधारित किया गया था लेकिन इस एक्ट के आने से इसके उद्देश्य में एक बिन्दू और जुड़ गया ।
 सोशल मीडिया पर इस महाकुम्भ और एससी-एसटी एक्ट को लेकर जबरदस्त चर्चा में रहे देवकीनंदन ठाकुरजी महाराज ने प्रमुख वक्ता के रूप में कई मुद्दो पर संजीदगी से अपने विचार रखे । उन्होने कहा कि सरकार को चारों वर्गों को समान रूप से सुरक्षा देकर समाज को जोड़ना चाहिये न कि जातिगत आधार पर कानून बनाकर समाज को तोड़ने का कार्य करना चाहिये । दलितों को सवर्ण समाज का भाई बताते हुये उन्होने कहा वे कौन लोग हैं जो सामाजिक परिवार को तोड़ रहे हैं ? उन्होने कहा कि विप्र समाज कभी नहीं चाहता कि दलितों के साथ अत्याचार हो । दोषियों पर कार्यवाही हो लेकिन नई व्यवस्था से निर्दोष लोगों के कानूनी मुकदमों में फंसने की चिंता है । झूठे मुकदमें के कई उदाहरण प्रकाश में आते रहते हैं।
सरकार के विपक्ष में नहीं समाज के पक्ष में हैं, सभी पार्टियॉं दोषी-
 देवकीनंदन ठाकुरजी महाराज ने कहा कि हम किसी सरकार के विपक्ष में नहीं बल्कि अपने समाज के पक्ष में हैं । सरकार जनता से है और हम जनता हैं । वे लोग सरकार में बैठकर कानून बनाते हैं लेकिन जनता सरकार बनाती है । इसमें कोई एक पार्टी दोषी नहीं है बल्कि सभी पार्टियों के विधायक सांसद इसे पारित करवाने में शामिल रहे हैं ।
दो महीने का दिया अल्टीमेटम – 
एससी-एसटी एक्ट में बिना जाँच गिरफ्तारी की व्यवस्था को वापस लेने के लिये दो माह का समय देते हुये देवकीनंदन महाराज ने कहा कि सरकार हमारी है, अभी उसी से मॉंग करेंगे । नहीं मानने पर विप्र समाज नये विकल्प तलाशेगा ।
महाकुम्भ का मकसद चुनाव लड़ना नहीं, नहीं लड़ूगाँ चुनाव – 
महाकुम्भ को चुनाव लड़ने का प्लेटफार्म बताने वाले लोगों को जवाब देते हुये देवकीनंदन महाराज ने कहा कि इसका मकसद चुनाव लड़ना नहीं है बल्कि व्रिप समाज को एकजुट कर उनके अधिकार के प्रति जागरूक करना है। भारी भीड़ के बीच घोषणा करते हुये उन्होने कहा कि मैं कभी चुनाव नहीं लड़ूगाँ । भगवान ने जो दिया है वह बहुत है । लेकिन अपने देश और समाज के लिये चुप भी नहीं बैठुॅंगा । उन्होने जोड़ा कि जरूरी नहीं कि चाणक्य चुनाव लड़कर ही अपने देश और समाज की सेवा करे ।
सभी समाजों की बहन-बेटियों की बारातों का मान रखे सवर्ण समाज – 
दलित समाज की बहन-बेटियों की बारात न चढ़ने देने को कुरीती बताते हुये देवकीनंदन महाराज ने कहा कि सभी सभी समाजों की बहन-बेटियॉं हमारे लिये एक जैसी होनी चाहियें । परम्परा के नाम पर बहनों की बारातें न चढ़ने देने का चलन गलत है । सवर्ण समाज को इसे बदलने के लिये आगे आना चाहिये ।
लफड़े से नहीं दोस्ती से डर लगता है – 
वकत्वय के दौरान फर्जी मुकदमों की प्रति दिखाते हुये देवकीनंदन महाराज ने कहा हो सकता है कि कुछ लोग इस आवाज को रोकने के लिये झूठ का सहारा लें और लफड़ों में फंसा दें । लेकिन अब लफड़े से नहीं दोस्ती से डर लगता है ।
मतलब निकल गया तो पहचानते नहीं-
राजनेताओं को इंगित करते हुये महाराज ने कहा कि जो यहाँ हो रहा है उसे दिल्ली-लखनऊ में बैठे लोग भी देख रहे हैं । ताना दिया कि मतलब निकल गया तो पहचानते नहीं । हम मतलब के लिये नहीं बल्कि देश, समाज और धर्म के लिये उनके साथ हैं ।
नवम्बर-दिसम्बर में होगा सभी वर्गों का महाकुम्भ –
मंच से घोषणा की गयी अगर सरकार ने जल्दी ही इस एक्ट में बदलाव नहीं किया तो नवम्बर-दिसम्बर में सभी वर्गों का महाकुम्भ की घोषणा की गयी । इस एक्ट के लिये जो दोषी होगें वे दुबारा सदन नहीं जायगें । सरकार अगर सुप्रीम कोर्ट के अनुसार इस कानून को लागू करे तो हम सरकार के साथ हैं ।
जिन्होने विरोध किया उन्हें जवाब मिल गया- 
ग्रामीण अंचलों में बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में पहुॅचं ब्रजमण्डल से पहुॅंचे हजारों व्रिपों की संख्या से उत्साहित संयोजकों ने इसे विप्र महाकुम्भ का विरोध करने वालों को जवाब बताया । उदयन शर्मा ने कहा कि विप्रों को एकजुट होने से रोकने की तमाम कोशिशें फेल हो गयीं ।
दूसरे जनपदों और प्रदेशों से भी आये सवर्ण समाज के लोग –
सोशल मीडिया पर हुये देवकीनंदन ठाकुरजी महाराज के नाम के साथ हुये प्रचार से औरैया, कानपुर, इलाहाबाद, सोनभद्र, के साथ उत्तराखण्ड, मध्यप्रदेश, हरियाणा तक से लोग आयोजन स्थल पर पहुॅचें ।
सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा ज्ञापन –
आयोजन के समापन से पूर्व मंच पर देवकीनंदन महाराज एवं संयोजक मण्डल ने सिटी मजिस्ट्रेट मनोज कुमार सिंह को प्रधानमंत्री-राष्ट्रपति के नाम से आठ मॉंगों का ज्ञापन सौंपा गया ।
भारी संख्या में जमी रही फोर्स, इंटेलीजैंस लेती रही पल-पल का ब्यौरा-
 ग्वालियर में देवकीनंदन महाराज के वकत्वय से मची हलचल के बाद स्थानीय प्रशासन इस आयोजन को लेकर चौकन्ना हो गया । आयोजन से नाम जुड़ा होने के चलते शांति सेवा धाम पर प्रशासनिक अधिकारी डेरा डाले रहे । सुबह भारी फोर्स आयोजन स्थल पर तैनात हो गयी । इंटैलीजैन्स ब्यूरों के लोग भी जनता में घूमकर पल-पल की खबरें लेते रहे । प्रशासन ने आयोजन की वीडियोग्राफी करायी है ।
अखिल भारतीय ब्राहम्ण महासभा के संरक्षण में राष्ट्रीय विप्र स्वाभिमान महासंघ के साथ  विप्र महाकुम्भ में विप्र समाज के अलावा अन्य दर्जनों संस्थाओं ने भाग लेकर अपनी आवाज उठायी ।
अखिल भारतीय वैश्य एकता परिषद् , ब्राह्मण परिषद् उत्तर प्रदेश, अखिल विश्व ब्राह्मण-हिन्दुत्व शक्ति मोर्चा, राष्ट्रीय महासंघ, क्षत्रिय महासभा (फर्रुखाबाद), श्रीब्राह्मण सभा हरिद्वार, उत्तराखण्ड, अखिल भारतीय ब्राह्मण एकता परिषद् (कन्नौज), अखिल भारतीय ब्राह्मण परिषद (औरेया), श्री ब्राह्मण सभा हरिद्वार, अखिल भारतीय पालीवाल ब्राह्मण समाज सकरीय, अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा हाथरस, मैथिल ब्राह्मण सेवा समिति, खरौट, श्री परशुराम सेना, भिण्ड मालनपुर, मिशन पॉसीबल आदि संस्थाये शामिल रहीं ।
कार्यक्रम में बद्रीश जी महाराज ने मंच संचालन किया । विश्व शांति सेवा चैरीटेबल ट्रस्ट के सचिव विजय शर्मा, कार्ष्णि विद्वत परिषद के नागेन्द्र दत्त, पं. बिहारी लाल वशिष्ठ, रमेश दत्त शर्मा, माथुर चतुर्वेद परिषद के महेश पाठक, अशोक व्यास, जगदीश प्रसाद सुपानिया, अशोक शास्त्री, सौरभ गौड़, रामविलास चतुर्वेदी, सुधीर शुक्ला, विपिन बापू, दयाशंकर, अच्युत लाल, उदयन शर्मा, अभिषेक व्यास एड. विकास पाराशर, अनुपम गौतम, तुलसी स्वामी, महेन्द्र सिंह शर्मा, महेश चन्द्र शुक्ला, पन्ना लाल गौतम, जगदीश प्रसाद सुमानिया, पूर्व विधायक हुकुमचंद तिवारी, रमाकान्त गोस्वामी, पार्वती वल्लभ, शशि शुक्ला, चन्द्र प्रकाश शर्मा, श्यामसुन्दर शर्मा बिट्टू भईया, चन्द्रमोहन दीक्षित, आशीष शर्मा, गोपेश गोस्वामी, विनोद दीक्षित, हरिवंश मिश्रा, मदन मोहन पाण्डेय, अवधेश शर्मा, राकेश पाण्डेय, रमेश शास्त्री, आचार्य चन्द्रप्रकाश शर्मा, आचार्य इंन्द्रेश शरण, विष्णु शर्मा, धर्मेन्द्र शर्मा (धन्नू भईया), विवेक पंडित, शैकीं शर्मा, भागवत शर्मा (मोनू) आदि सहित हजारों विप्रबंधु उपस्थित थे ।
वृन्दावन में आयोजित ‘विप्र महाकुम्भ’ में विप्र समाज द्वारा निम्न माँगें रखी गयी –
1.  एससी/एसटी एक्ट को सुप्रीम कोर्ट के आधार अनुसार ही लागू किया जाये ।
2.  सवर्ण आयोग का गठन किया जाये ।
3.  कश्मीरी ब्राहम्णों को पुर्नस्थापित किया जाये ।
4.  श्रीगीता ग्रन्थ को राष्ट्रीय ग्रन्थ घोषित करके शैक्षिक पाठ्यक्रम में शामिल किया जाये ।
5.  सनातन धर्म के ग्रन्थ एवं देवी-देवताओं की मूर्तियों का अपमान करने वालों के विरूद्ध
    कानूनी  कार्यवाही करने एवं सख्त दण्ड का विधान हो, इस पर ईशनिंदा की तर्ज पर
    कानून बने ।
6.  सम्पूर्ण भारतवर्ष के तीर्थ स्थलों, मंदिरों में पंडा-पुजारियों एवं तीर्थ पुरोहितों के अधिकारों
    का संरक्षण किया जाये ।
7.  भगवान श्री परशुराम जी की जयन्ती पर राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया जाये ।
8.  सम्पूर्ण बृज चौरासी कोस को तीर्थ स्थल घोषित किया जाये ।